राजस्थान में पाली जिले के बाली उपखंड क्षेत्र के अंतर्गत इंसानी बस्तियों के नजदीक मगरमच्छों की आवक लगातार बढ़ती जा रही है। हाल ही में क्षेत्र के लालपुरा गांव में तड़के एक सनसनीखेज वाकया देखने को मिला, जब एक रिहायशी मकान के मुख्य द्वार पर 8 फीट लंबा और तकरीबन 70 किलोग्राम वजनी भारी-भरकम मगरमच्छ आ धमका। अचानक घर की चौखट पर इतने विशाल जलीय जीव की मौजूदगी से पूरे मोहल्ले और गांव में हड़कंप मच गया। सूचना मिलने के बाद मौके पर पहुंची बचाव टीम ने करीब एक घंटे के कड़े प्रयास के बाद इस मगरमच्छ को सुरक्षित काबू में कर लिया और बाद में इसे जवाई बांध के इलाके में छोड़ दिया।
तड़के तीन बजे दरवाजे पर हुई खटपट, बाहर निकलते ही उड़े होश
लालपुरा निवासी मगनाराम मीणा अपने परिवार, पत्नी और बच्चों के साथ घर के भीतर सो रहे थे। भोर में लगभग 3 बजे के आसपास मुख्य दरवाजे पर किसी भारी चीज के जोर-जोर से टकराने की तेज आवाजें आने लगीं। जब मगनाराम ने किसी अनहोनी की आशंका के चलते किवाड़ खोला, तो सामने का नजारा देखकर उनके होश उड़ गए। दहलीज के ठीक बाहर 8 फीट लंबा भीमकाय मगरमच्छ मौजूद था।
मगनाराम ने भारी घबराहट के बीच धैर्य बनाए रखा और परिजनों को सुरक्षित करते हुए तुरंत आसपास के ग्रामीणों के साथ-साथ वन विभाग को इस बात की खबर दी। सूचना मिलते ही वनपाल प्रकाश मीणा हरकत में आए और वाइल्ड एंड स्ट्रीट एनिमल रेस्क्यू टीम को तुरंत मौके के लिए रवाना किया गया।
एक घंटे चली कड़ी मशक्कत, जवाई बांध में किया गया मुक्त
रेंजर महेंद्र पाल सिंह के दिशा-निर्देशन में रेस्क्यू दल ने लालपुरा पहुंचकर मोर्चा संभाला। इस अभियान में कांतिलाल प्रजापत, गोविंद प्रजापत और दिलीप सेन शामिल थे। दल ने सबसे पहले सुरक्षा घेरा तैयार करते हुए मौके पर जमा ग्रामीणों को सुरक्षित दूरी पर पीछे हटाया, ताकि कोई अनहोनी न हो।
लगभग एक घंटे तक चले योजनाबद्ध और जोखिम भरे अभियान के बाद बचाव कर्मियों ने रस्सियों की मदद से मगरमच्छ के मुंह और पैरों को बांधकर उसे पूरी तरह काबू किया। इसके बाद सुरक्षित तरीके से वाहन में लादकर उसे जवाई बांध के प्राकृतिक जल क्षेत्र में ले जाकर छोड़ दिया गया, जिससे ग्रामीणों ने राहत की सांस ली।
रिहायशी इलाकों का रुख क्यों कर रहे हैं मगरमच्छ?
बाली क्षेत्र में पानी के प्राकृतिक स्रोतों से निकलकर मगरमच्छों का बस्तियों की ओर रुख करना लगातार आम होता जा रहा है। स्थानीय निवासियों और वन्यजीव विशेषज्ञों ने इस असामान्य हलचल के पीछे मुख्य रूप से गिरते जल स्तर और भोजन के संकट को जिम्मेदार बताया है
- जल स्तर में निरंतर गिरावट: जवाई बांध और आसपास के अन्य जलाशयों में पानी का स्तर घटने से मगरमच्छों का प्राकृतिक वास स्थल सिमट रहा है। पर्याप्त जलभराव न होने के कारण ये जीव नमी और नए आश्रय की तलाश में आबादी की तरफ निकल पड़ते हैं।
- भोजन और शिकार का गंभीर अभाव: जलस्रोतों में जलीय जीवों और शिकार की कमी के चलते मगरमच्छ भूख मिटाने के लिए बस्तियों का रुख करने को विवश हो रहे हैं।
- असामान्य खानपान का संकट: ग्रामीणों का दावा है कि बस्तियों में भटकते हुए मगरमच्छ कई मर्तबा गाय का गोबर खाते भी देखे गए हैं। विशेषज्ञों के अनुसार शिकार न मिलने की लाचारी में यह जलीय परभक्षी पेट भरने के लिए इस तरह के अस्वाभाविक व्यवहार को अपना रहा है।
ग्रामीण क्षेत्रों में मगरमच्छों की बार-बार दस्तक से दहशत का माहौल बना हुआ है। ग्रामीणों ने मांग उठाई है कि वन्यजीवों के जलस्रोतों में पानी और भोजन की व्यवस्था पर ध्यान दिया जाए, ताकि वे बस्तियों की ओर न भटकें।





















