राजधानी लखनऊ और उसके आसपास के इलाकों को गोमती नदी के उफान से स्थाई राहत दिलाने की दिशा में बड़ा प्रशासनिक फैसला लिया गया है। फैजुल्लागंज से लेकर नैमिष तक के विस्तृत दायरे को सुरक्षित रखने के मकसद से ग्रीन कॉरिडोर की रूपरेखा पर एक नया तटबंध तैयार किया जाएगा। यह ढांचा केवल पानी रोकने की दीवार भर नहीं होगा, बल्कि इसके ऊपर सड़क मार्ग भी बनाया जाएगा जिससे स्थानीय नागरिकों को आवागमन की एक वैकल्पिक और सुरक्षित सुविधा मिल सकेगी। इस निर्माण को मंजूरी मिल चुकी है और चालू मानसून के समाप्त होते ही आवंटित बजट के साथ निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा।
जमीनी हालात का जायजा और हवाई मुआयना
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को बख्शी का तालाब तहसील के जलभराव वाले गांवों का दौरा करके वास्तविक स्थिति परखी। इस दौरान उन्होंने प्रभावित ग्रामीणों से प्रत्यक्ष बातचीत की, उनकी समस्याएं जानीं और राहत सामग्री का वितरण किया। जमीनी निरीक्षण से पूर्व उन्होंने फैजुल्लागंज से लेकर नैमिषारण्य तक फैले बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का हवाई सर्वेक्षण भी किया, ताकि नुकसान और जलभराव के फैलाव का सटीक अनुमान लगाया जा सके। मौके पर राहत व बचाव अभियान में जुटी विशेष टीमों और स्वास्थ्य विभाग द्वारा लगाए गए चिकित्सा शिविरों की कार्यप्रणाली का भी परीक्षण किया गया।
जल निकासी और पंपिंग प्रणाली का खाका
बाढ़ सुरक्षा बंधे के निर्माण के साथ ही पानी निकासी की समुचित योजना तैयार करने का दायित्व सिंचाई विभाग के प्रमुख सचिव को सौंपा गया है। पूरे क्षेत्र का विस्तृत तकनीकी सर्वे कर औपचारिक प्रस्ताव जल्द तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। योजना इस तरह बनाई जा रही है कि तटबंध बनने के बाद बारिश का स्थानीय पानी आबादी वाले हिस्सों में न जमा हो सके। बस्तियों और रिहायशी कॉलोनियों में भरने वाले पानी को तत्काल नदी में वापस फेंकने के लिए शक्तिशाली पंपिंग सेट लगाए जाएंगे। इससे नदी का जलस्तर ऊंचा होने पर भी जलभराव की समस्या नहीं पनपेगी और बंधे पर बनी पक्की सड़क बारहों महीने यातायात के लिए खुली रहेगी।
पहाड़ों और तराई की बारिश से चढ़ा गोमती का जलस्तर
मैदानी इलाकों में अचानक बढ़े जलस्तर के कारणों की व्याख्या करते हुए यह रेखांकित किया गया कि बीते 10 दिनों की अवधि में उत्तर प्रदेश के 50 से अधिक जनपदों में मूसलाधार बारिश दर्ज की गई है। पड़ोसी देश नेपाल के साथ-साथ तराई के जिलों जैसे पीलीभीत, लखीमपुर खीरी और सीतापुर में अत्यधिक वर्षा हुई। इन ऊपरी जलक्षेत्रों का पानी बहाव के साथ पांच से छह दिनों के भीतर निचले क्षेत्रों में पहुंचा, जिसके फलस्वरूप गोमती नदी खतरे के निशान के पास जा पहुंची। इसी बहाव ने बख्शी का तालाब, लखनऊ उत्तर और फैजुल्लागंज से नैमिष तक की पट्टी को जलमग्न कर दिया और बाढ़ जैसी विषम परिस्थितियां उत्पन्न कर दीं। प्रशासन लगातार इस प्रवाह पर नजर बनाए हुए था।
प्रभावितों के लिए 26 सामग्रियों का राहत किट
बाढ़ के पानी से घिरे परिवारों के भरण-पोषण के लिए व्यापक राहत किट बांटी जा रही है, जिसमें दैनिक जरूरत की 26 वस्तुएं सम्मिलित की गई हैं। प्रत्येक पात्र परिवार को मिलने वाले इस पैकेज में 10 किलो आटा, 10 किलो चावल, 10 किलो आलू, दो किलो अरहर की दाल और एक लीटर सरसों अथवा रिफाइंड खाद्य तेल शामिल है। इसके अतिरिक्त दैनिक जीवन में काम आने वाले जरूरी सामान जैसे नमक, विभिन्न मिर्च-मसाले, पानी भरने के लिए बाल्टी, खाने के लिए लाई और भुजा, रोशनी के लिए मोमबत्तियां, माचिस तथा बारिश से बचाव हेतु बरसाती और तिरपाल भी इसमें मुहैया कराए जा रहे हैं।
राहत शिविरों में गर्म खाना और पोषण का प्रबंध
विस्थापित परिवारों को खुले आसमान के नीचे रहने से रोकने के लिए स्थानीय प्राथमिक स्कूलों और मैरिज हॉलों को राहत शिविरों में परिवर्तित किया गया है। इन आश्रय स्थलों में दोनों वक्त ताजा गर्म भोजन परोसा जा रहा है। छोटे बच्चों के स्वास्थ्य को देखते हुए उनके लिए नियमित दूध और गर्भवती महिलाओं के लिए अतिरिक्त पोषक आहार की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। इसके साथ ही बेजुबान मवेशियों के चारे का भी ख्याल रखा जा रहा है, जिसके तहत शिविरों में पशुपालकों को सूखा भूसा और पौष्टिक चोकर उपलब्ध कराया जा रहा है। बिजली गुल होने की स्थिति से निपटने के लिए शिविरों में पेट्रोमैक्स और सोलर लाइट के प्रबंध किए गए हैं, जबकि खाली पड़े घरों की सुरक्षा के लिए ग्राम चौकीदार, होमगार्ड, पीआरडी और पुलिस जवान रात भर गश्त कर रहे हैं।
मुआवजा राशि, पक्के आवास और स्वास्थ्य सुरक्षा
आपदा के दौरान किसी व्यक्ति की पानी में डूबने अथवा आकाशीय बिजली की चपेट में आने से मृत्यु होने पर आश्रित परिजनों को फौरन ₹4 लाख की आर्थिक मदद दी जाएगी। जिन परिवारों के कच्चे या पक्के मकान बारिश और पानी के दबाव से पूरी तरह ध्वस्त हो गए हैं, उन्हें प्रधानमंत्री अथवा मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत नया पक्का मकान स्वीकृत किया जाएगा। मवेशियों की हानि पर भी पशुपालकों को वित्तीय भरपाई मिलेगी। जलस्तर कम होने के तुरंत बाद राजस्व और कृषि विभाग खेतों में पहुंचकर नष्ट हुई फसलों का पारदर्शी सर्वे करेंगे, जिसके आधार पर किसानों को मुआवजा राशि बांटी जाएगी। स्वास्थ्य स्तर पर बीमारियों और जहरीले जीवों से बचाव के लिए सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर एंटी स्नेक वेनम और जानवरों के काटने पर लगने वाले एंटी रेबीज टीकों का पर्याप्त स्टॉक अनिवार्य किया गया है।
केंद्रीय स्तर से संपर्क और प्रशासनिक उपस्थिति
राहत कार्यों के दौरान यह भी साझा किया गया कि केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सोमवार सवेरे दूरभाष पर स्थिति की समीक्षा की। उन्होंने फैजुल्लागंज से नैमिष तक प्रस्तावित तटबंध को जलभराव की पुरानी समस्या का ठोस समाधान करार दिया। शासन ने इस परियोजना के लिए तुरंत बजट आवंटन की प्रक्रिया पूरी कर ली है। इस राहत वितरण कार्यक्रम के दौरान उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक, मुख्यमंत्री के मुख्य सलाहकार अवनीश अवस्थी, क्षेत्रीय विधायक योगेश शुक्ला, विधायक डॉ. नीरज बोरा, विधान परिषद सदस्य पवन सिंह चौहान, भाजपा जिलाध्यक्ष विजय मौर्य, इटौंजा नगर पंचायत अध्यक्ष अखिलेश कुमार अवस्थी तथा सिंचाई व पुलिस प्रशासन के आला अधिकारी मौजूद रहे।



















