राम मंदिर चढ़ावा घोटाला: SIT ने लवकुश मिश्रा को दबोचा, घर से मिले 10-12 लाख रुपयेuttar-pradesh
2 घंटे पहले· 5

राम मंदिर चढ़ावा घोटाला: SIT ने लवकुश मिश्रा को दबोचा, घर से मिले 10-12 लाख रुपये

अयोध्या राम मंदिर के चढ़ावे में कथित गड़बड़ी की जांच कर रही SIT ने लवकुश मिश्रा को हिरासत में ले लिया और उनके घर से 10-12 लाख रुपये बरामद किए. परिसर में करीब 8 घंटे चली जांच के बाद टीम ने अयोध्या में ही रात बिताई और कार्रवाई आज भी जारी रहेगी.

SIT के शिकंजे में लवकुश मिश्रा

अयोध्या में राम मंदिर के चढ़ावे में कथित गड़बड़ी की पड़ताल कर रही विशेष जांच टीम (SIT) ने इस मामले में पहली बड़ी कार्रवाई करते हुए लवकुश मिश्रा नाम के व्यक्ति को हिरासत में ले लिया है. जांच टीम के मुताबिक उनके घर की तलाशी के दौरान 10-12 लाख रुपये नकद बरामद हुए. इस बरामदगी के बाद पूरा मामला और गंभीर हो गया है और SIT की जांच आज भी राम मंदिर परिसर में जारी रहेगी.

रातभर डटी रही जांच टीम

SIT की सक्रियता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि टीम बीते दिन राम जन्मभूमि परिसर में देर रात 11 बजे तक मौजूद रही. परिसर में जांच का यह अभियान करीब 8 घंटे तक चला. काम खत्म होने के बाद टीम के सदस्य लौटे नहीं, बल्कि अयोध्या में ही रुक गए और सरयू अतिथि गृह में रात्रि विश्राम किया. दानपात्र गबन के इस मामले में SIT आज भी जांच का सिलसिला आगे बढ़ाएगी.

गोपाल राव की बार-बार पेशी पर उठते सवाल

राम मंदिर की रोजमर्रा की व्यवस्थाओं में गोपाल राव को बेहद अहम चेहरा माना जाता है. मंदिर का रखरखाव, साफ-सफाई, श्रद्धालुओं की सुविधाएं और चढ़ावे का प्रबंधन जैसी कई बड़ी जिम्मेदारियां उन्हीं के पास हैं. यही वजह है कि जांच के दौरान उन्हें बार-बार मंदिर बुलाए जाने को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं और सवाल खड़े हो रहे हैं.

अखिलेश यादव का सरकार पर तंज

दान के दुरुपयोग के आरोपों की जांच के लिए SIT बनाए जाने पर समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने सोमवार को उत्तर प्रदेश सरकार को आड़े हाथों लिया. उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि यह दुखद है कि BJP सरकार IIT (इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी) खड़ी करने के बजाय SIT बनाने में जुटी है. गौरतलब है कि यह मुद्दा सबसे पहले समाजवादी पार्टी ने ही एक हफ्ते से भी पहले उठाया था. पार्टी ने इसे सनातन धर्म का अपमान करार दिया और कहा कि इससे दुनियाभर के करोड़ों सनातनियों की भावनाएं आहत हुई हैं. तभी से अखिलेश यादव और अयोध्या से ताल्लुक रखने वाले पूर्व मंत्री पवन पांडे लगातार और पूरी मुखरता से इस मामले को उठाते आ रहे हैं.

दूसरी तरफ यूपी और केंद्र की BJP सरकार ने इस पूरे मसले पर खामोशी अख्तियार कर रखी है. वहीं राम मंदिर तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सचिव चंपत राय ने सफाई देते हुए कहा कि दान के हिसाब-किताब की पड़ताल चल रही है और अब तक ऐसी कोई बात सामने नहीं आई है जो "ज़िक्र करने लायक" हो.

ट्रस्ट और प्रशासन का भरोसा

राज्य सरकार का कहना है कि SIT पूरे मामले की व्यापक जांच कर अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपेगी. इसी बीच राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र ने सोमवार को भरोसा दिलाया कि जांच में किसी भी स्तर पर ढिलाई नहीं बरती जाएगी. मिश्र ने कहा, ''जांच के दो पहलू हैं-आपराधिक और भविष्य में सुधार से संबंधित. जब दोनों पहलुओं पर काम होगा तभी हम श्रद्धालुओं का विश्वास और मजबूत कर पाएंगे.'' उन्होंने यह भी कहा कि मंदिर ट्रस्ट जांच में पूरा सहयोग देगा और SIT को हरसंभव मदद मुहैया कराई जाएगी. मिश्र ने बताया कि इस सिलसिले में रविवार को उन्होंने जिला प्रशासन से बातचीत की थी, जहां से पूर्ण सहयोग का आश्वासन मिला है.

मंत्री दयाशंकर सिंह की चुप्पी

उधर मऊ जनपद के प्रभारी मंत्री दयाशंकर सिंह ने सोमवार को मऊ के जिला कलेक्ट्रेट में प्रेस वार्ता की. इस दौरान जब पत्रकारों ने उनसे राम मंदिर दान चोरी के मामले में सवाल किया तो उन्होंने टालते हुए कहा कि इस पर वह कुछ भी नहीं बोलेंगे.

कैसे और किसके आदेश पर बनी SIT

यह विशेष जांच टीम मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश और ट्रस्ट के अनुरोध पर गठित की गई है. ट्रस्ट ने इसे "भ्रामक सूचनाओं को रोकने और सच्चाई सामने लाने" के लिए जरूरी बताया था और कहा था कि राम मंदिर की छवि को धूमिल करने की कोशिशें की जा रही हैं. SIT में लखनऊ के मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत, पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) किरण एस और वित्त विभाग के विशेष सचिव नील रतन को शामिल किया गया है.

सवाल-जवाब

लवकुश मिश्रा कौन है और उसे क्यों हिरासत में लिया गया?
राम मंदिर चढ़ावा घोटाले की जांच कर रही SIT ने लवकुश मिश्रा को हिरासत में लिया है, जिसके घर से 10-12 लाख रुपये बरामद हुए.
SIT किसके आदेश पर बनी है?
यह विशेष जांच टीम मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश और राम मंदिर ट्रस्ट के अनुरोध पर गठित की गई है.
SIT में कौन-कौन शामिल है?
इसमें लखनऊ के मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत, आईजी किरण एस और वित्त विभाग के विशेष सचिव नील रतन शामिल हैं.
अखिलेश यादव ने इस पर क्या कहा?
उन्होंने तंज कसा कि BJP सरकार IIT बनाने के बजाय SIT बनाने में लगी है और मामले को सनातन धर्म का अपमान बताया.
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