उत्तर प्रदेश का सहारनपुर शहर एक बार फिर अपनी पुरानी गंगा-जमुनी तहजीब की खूबसूरत मिसाल पेश कर रहा है। सावन का पवित्र महीना शुरू होते ही इस शहर के बाजारों में कांवड़ यात्रा की खास रौनक साफ तौर पर देखने को मिल रही है। शहर की हर गली और मोहल्ला अब पूरी तरह से त्योहारी रंग में रंग चुका है। इन व्यापक तैयारियों के बीच सबसे खास बात यह है कि भगवान शिव के भक्तों के लिए जो कांवड़ ड्रेस तैयार की जा रही है, उसे मुख्य रूप से मुस्लिम कारीगर बना रहे हैं। शहर की विभिन्न होजरी फैक्ट्रियों में इस समय दिन-रात काम चल रहा है, ताकि कांवड़ियों को समय पर उनके कपड़े मिल सकें।
आस्था और कारोबार का अनूठा संगम
कांवड़ यात्रा के दौरान विशेष कपड़ों की मांग इतनी भारी होती है कि शहर की फैक्ट्रियों में ऑर्डर पूरा करने की एक होड़ सी मची रहती है। इस विशाल आयोजन के लिए निर्माण का काम कोई रातों-रात पूरा नहीं होता। वास्तव में, यात्रा शुरू होने से लगभग दो महीने पहले ही कारीगर इन कपड़ों की कटाई और सिलाई के काम में पूरी तरह से जुट जाते हैं। उत्पादन का यह स्तर बहुत विशाल है, जहां हर साल लाखों की संख्या में परिधान तैयार किए जाते हैं। पारंपरिक रूप से भगवा रंग कांवड़ियों की पहली पसंद होता है, लेकिन अब बाजार की मांग में काफी विविधता आ चुकी है। होजरी कारखानों में भगवा के साथ-साथ सफेद, काले, पीले और कई अन्य आकर्षक रंगों में कपड़े बड़ी तादाद में तैयार किए जा रहे हैं। इतना ही नहीं, उद्योग से जुड़े लोग हर साल ग्राहकों की बदलती पसंद को ध्यान में रखते हुए नए-नए डिजाइन भी बाजार में लॉन्च करते हैं, ताकि शिव भक्तों की यात्रा और भी खास बन सके।
नफरत मिटाने वाला एक सकारात्मक संदेश
इन मुस्लिम कारीगरों के लिए यह काम महज कोई मौसमी व्यापार या आजीविका कमाने का साधारण जरिया नहीं है। यह उनके लिए आपसी विश्वास, गहरे सम्मान और सामाजिक एकता का एक जीता-जागता उदाहरण है। ये कामगार पूरी ईमानदारी, गहरी लगन और सच्ची श्रद्धा के साथ दिन-रात एक करके उन कपड़ों को सिलते हैं, जिन्हें पहनकर हिंदू श्रद्धालु मीलों लंबी और कठिन धार्मिक यात्रा पर निकलते हैं। मौजूदा वक्त में, जहां कुछ तत्व धर्म के नाम पर समाज में दूरियां और नफरत पैदा करने की कोशिश करते हैं, वहीं सहारनपुर के ये कारखाने पूरे देश को एक बेहद ही सकारात्मक संदेश दे रहे हैं। यह साझा प्रयास मजबूती से साबित करता है कि जब लोग एक-दूसरे की मान्यताओं का सम्मान करते हैं, तो समाज का ताना-बाना और भी मजबूत होता है।
डेढ़ दशक से चल रही है यह परंपरा
सहारनपुर में कपड़ों के एक प्रमुख निर्माता फरमान अहमद इसी आपसी भाईचारे की कहानी को बयां करते हैं। वह पिछले 15 सालों से शिव भक्तों के लिए विशेष परिधान बनाने के काम से गहराई से जुड़े हुए हैं। उन्होंने साल 2010 में इस खास निर्माण की शुरुआत की थी। इतने सालों के लंबे सफर में उनके काम का दायरा काफी बढ़ चुका है। आज की तारीख में उनकी फैक्ट्री में कांवड़ियों के लिए लगभग 50 अलग-अलग तरह के डिजाइन तैयार किए जाते हैं, जो बाजार में काफी लोकप्रिय हैं।
अपनी खुशी जाहिर करते हुए फरमान अहमद ने कहा, "हमें बहुत अच्छा लगता है कि हमारे द्वारा बनाई गई ड्रेस पहनकर भोले के भक्त गंगाजल लेने जाते हैं।"
उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि सहारनपुर शहर हमेशा से हिंदू-मुस्लिम एकता का एक मजबूत प्रतीक रहा है। उनके अनुसार, जिस इलाके में वे रहते हैं, वहां सभी धर्मों के लोग एक साथ मिलकर शांति से रहते हैं। जब भी कोई त्योहार आता है, तो पूरा समुदाय उसे बिना किसी भेदभाव के, मिल-जुलकर और पूरे उत्साह के साथ मनाता है।




















