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सपा नेता महबूब अली के अभेद्य गढ़ अमरोहा में क्या तीन दशक बाद वापसी कर पाएगी भाजपाउत्तर प्रदेश
3 अक्तू॰ 2026, 7:45 pm (40 मिनट पहले)· 0

सपा नेता महबूब अली के अभेद्य गढ़ अमरोहा में क्या तीन दशक बाद वापसी कर पाएगी भाजपा

अमरोहा विधानसभा सीट पर पिछले पांच चुनावों से सपा नेता महबूब अली अजेय रहे हैं, जहां भाजपा ने अंतिम बार वर्ष 1996 में जीत दर्ज की थी। जानिए पिछले तीन दशकों का पूरा चुनावी इतिहास और 2027 के संभावित समीकरण।

पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति में संख्या 41 वाली अमरोहा विधानसभा सीट हमेशा से चर्चा के केंद्र में रही है। अमरोहा लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले इस चुनावी इलाके में समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता महबूब अली का मजबूत सियासी प्रभाव माना जाता है। वह इस सीट से लगातार पांच बार विधायक निर्वाचित हो चुके हैं। इस मुस्लिम बहुल इलाके में भारतीय जनता पार्टी को अंतिम चुनावी सफलता ठीक तीन दशक पहले वर्ष 1996 में मिली थी। उसके बाद से हुए सभी चुनावों में भाजपा को पराजय का सामना करना पड़ा है। वर्ष 2022 के पिछले विधानसभा चुनाव में सपा के महबूब अली ने भाजपा प्रत्याशी को 71 हजार 36 मतों के विशाल अंतर से शिकस्त दी थी। पिछले तीस वर्षों के चुनावी आंकड़ों पर नजर डालें तो कांग्रेस, बहुजन समाज पार्टी और राष्ट्रीय लोकदल जैसी पार्टियां एक बार भी यहां जीत दर्ज करने में सफल नहीं रही हैं। ऐसे में उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारी के मद्देनजर इस सीट का सियासी इतिहास और बदलते समीकरण बेहद महत्वपूर्ण हो जाते हैं।

अयोध्या घटनाक्रम के बाद 1991 में भाजपा की जीत

उत्तर प्रदेश में वर्ष 1991 के विधानसभा चुनाव के दौरान अयोध्या में गोलीकांड के बाद राज्य का सियासी माहौल पूरी तरह बदल चुका था। उस दौर में अमरोहा सीट पर भाजपा के उम्मीदवार प्रताप सिंह का सीधा मुकाबला जनता दल के तत्कालीन विधायक मोहम्मद हयात से हुआ था। इस कड़े मुकाबले में प्रताप सिंह ने 44 हजार 923 मत हासिल कर जीत दर्ज की थी। उन्होंने जनता दल के मोहम्मद हयात को 14 हजार 716 मतों से हराया, जिन्हें कुल 30 हजार 207 वोट मिले थे। इसी चुनाव में जनता पार्टी के टिकट पर उतरे अफसर खान केवल 17 हजार 751 वोटों पर सिमट गए थे। कांग्रेस पार्टी ने समर पाल सिंह को अपना प्रत्याशी बनाया था, जिन्हें 13 हजार 249 वोट हासिल हुए थे। बहुजन समाज पार्टी के प्रत्याशी कमरुद्दीन 8 हजार 592 वोट पाकर पांचवें पायदान पर रहे थे।

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1993 में जनता दल के मोहम्मद हयात की वापसी

अयोध्या में विवादित ढांचा गिराए जाने के बाद वर्ष 1993 में जब उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव हुए, तो अमरोहा की जनता ने सियासी समीकरण उलट दिए। जनता दल के हाजी मोहम्मद हयात ने भाजपा के मंगल सिंह सैनी को एक बेहद नजदीकी मुकाबले में शिकस्त दी थी। हाजी मोहम्मद हयात को 52 हजार 175 मत मिले, जबकि मंगल सिंह सैनी 49 हजार 579 वोट ही हासिल कर सके। इस तरह जनता दल ने 2 हजार 596 वोटों के मामूली अंतर से भाजपा से यह सीट वापस छीन ली। इस चुनाव में समाजवादी पार्टी और कांग्रेस क्रमशः तीसरे व चौथे स्थान पर खिसक गई थीं। सपा प्रत्याशी इशरत अली को 16 हजार 392 मत मिले थे, जबकि कांग्रेस के उम्मीदवार खुर्शीद अहमद 11 हजार 306 वोटों तक ही सीमित रह गए थे।

1996 में मंगल सिंह की जीत और भाजपा की आखिरी सफलता

वर्ष 1996 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने अमरोहा में जोरदार वापसी की। यह चुनाव दोनों प्रमुख प्रतिद्वंद्वियों के बीच बेहद कांटे की टक्कर वाला साबित हुआ था। भाजपा प्रत्याशी मंगल सिंह ने मात्र 908 मतों के अंतर से चुनावी जंग जीत ली थी। मंगल सिंह के खाते में 67 हजार 526 वोट आए, जबकि समाजवादी पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ रहे महबूब अली 66 हजार 618 वोट पाने में सफल रहे थे। इस मुकाबले में कांग्रेस पार्टी के प्रत्याशी खुर्शीद अहमद भी मैदान में डटे थे, जिन्हें 29 हजार 553 वोट प्राप्त हुए थे। यह अंतिम मौका था जब भाजपा अमरोहा सीट पर विजयी पताका फहराने में कामयाब रही थी।

2002 में दल बदलने के बावजूद महबूब अली का पहला चुनावी परचम

वर्ष 2002 के विधानसभा चुनाव से पहले महबूब अली ने समाजवादी पार्टी का साथ छोड़ दिया और डीपी यादव की पार्टी राष्ट्रीय परिवर्तन दल यानी आरपीडी के सिंबल पर चुनावी मैदान में उतरे। पार्टी बदलने के बावजूद मतदाताओं ने उन पर पूरा भरोसा जताया। उस समय भाजपा और राष्ट्रीय लोकदल यानी आरएलडी का गठबंधन था, जिसके चलते सीट बंटवारे में यह सीट आरएलडी के खाते में गई थी और भाजपा ने अपना उम्मीदवार नहीं उतारा था। आरपीडी प्रत्याशी के रूप में महबूब अली ने 59 हजार 314 वोट हासिल किए और आरएलडी के डॉ. हरि सिंह ढिल्लों को 9 हजार 272 वोटों के अंतर से पराजित किया। डॉ. हरि सिंह ढिल्लों को 50 हजार 42 वोट मिले थे। बहुजन समाज पार्टी के खुर्शीद अनवर 13 हजार 507 वोट पाकर तीसरे, सपा के हाजी मोहम्मद हयात 7 हजार 573 वोट पाकर चौथे और कांग्रेस के खुर्शीद अहमद अंसारी 4 हजार 563 वोट पाकर पांचवें स्थान पर रहे थे।

2007 में बसपा की लहर के बीच 678 वोटों से रोमांचक जीत

वर्ष 2007 का विधानसभा चुनाव उत्तर प्रदेश की राजनीति में ऐतिहासिक माना जाता है, जब मायावती के नेतृत्व में बसपा ने पूर्ण बहुमत हासिल किया था। हालांकि पूरे प्रदेश में बसपा की लहर के बावजूद अमरोहा सीट पर मुकाबला पूरी तरह अलग रहा और बसपा यहां चौथे पायदान पर खिसक गई थी। इस चुनाव में महबूब अली दोबारा समाजवादी पार्टी के बैनर तले मैदान में उतरे, जहां उनका मुकाबला एक बार फिर भाजपा के मंगल सिंह से हुआ। दोनों उम्मीदवारों के बीच अमरोहा के चुनावी इतिहास की सबसे करीबी टक्कर देखने को मिली। महबूब अली ने मात्र 678 मतों के अत्यंत बारीक अंतर से जीत दर्ज कर अपनी विधायकी बचाई। महबूब अली को 42 हजार 115 वोट मिले थे, जबकि मंगल सिंह 41 हजार 437 वोटों पर सिमट कर रह गए। आरएलडी उम्मीदवार नदीम अब्बास को 17 हजार 251 वोट मिले और वह तीसरे स्थान पर रहे, जबकि बसपा के आदिल परवेज 16 हजार 639 वोटों के साथ चौथे नंबर पर रहे। कांग्रेस प्रत्याशी खुर्शीद अनवर को केवल 6 हजार 3 वोट मिले थे।

2012 में परिसीमन के बाद महबूब अली की जीत की हैट्रिक

वर्ष 2008 के परिसीमन के बाद 2012 में हुए आम चुनाव में समाजवादी पार्टी को पूरे प्रदेश में स्पष्ट बहुमत मिला था। अमरोहा में भी महबूब अली के लिए मुकाबला काफी एकतरफा साबित हुआ। महबूब अली ने 60 हजार 807 वोट प्राप्त कर 21 हजार 805 वोटों के बड़े अंतर से शानदार जीत हासिल की और लगातार तीसरी बार विधायक बनकर जीत की हैट्रिक लगाई। इस चुनाव में भाजपा के उम्मीदवार राम सिंह 39 हजार 2 वोट पाकर दूसरे स्थान पर रहे। बसपा के शाहिद 32 हजार 886 वोटों के साथ तीसरे नंबर पर रहे, जबकि पीईसीपी के प्रत्याशी नौशाद अली ने 24 हजार 768 वोट जुटाए थे।

2017 की भाजपा लहर में भी बरकरार रहा महबूब अली का दबदबा

वर्ष 2017 के चुनाव में जब पूरे उत्तर प्रदेश में भाजपा की जबर्दस्त चुनावी लहर चल रही थी, तब भी अमरोहा का सियासी किला सपा के पक्ष में अडिग खड़ा रहा। सपा प्रत्याशी महबूब अली ने 74 हजार 713 वोट हासिल किए और 15 हजार 42 मतों के अंतर से लगातार चौथी बार जीत दर्ज की। इस चुनाव की खास बात यह थी कि भाजपा यहां दूसरे स्थान पर भी नहीं पहुंच सकी और तीसरे नंबर पर खिसक गई थी। बसपा के नौशाद अली 59 हजार 671 वोट हासिल कर मुख्य मुकाबले में रनर-अप रहे थे। भाजपा प्रत्याशी डॉ. कुंवर सेन सैनी 45 हजार 420 वोट पाकर तीसरे स्थान पर रहे, जबकि आरएलडी के सलीम खान को 14 हजार 132 मत मिले थे।

2022 में महबूब अली ने बनाया 71 हजार वोटों की जीत का रिकॉर्ड

वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में महबूब अली ने अपने पूरे राजनीतिक जीवन की सबसे विशाल जीत दर्ज की। उन्होंने लगातार पांचवीं बार विधायक बनकर एक नया रिकॉर्ड अपने नाम किया। महबूब अली ने कुल 1 लाख 28 हजार 735 मत हासिल किए और भाजपा के राम सिंह को 71 हजार 36 मतों के भारी अंतर से शिकस्त दी। भाजपा के राम सिंह को केवल 57 हजार 699 वोट ही मिल सके थे। बसपा प्रत्याशी मोहम्मद नवाज 34 हजार 585 वोट प्राप्त कर तीसरे स्थान पर रहे थे। इस प्रचंड जीत ने अमरोहा में सपा के राजनीतिक प्रभाव को और अधिक सुदृढ़ कर दिया।

तीन दशकों के चुनावी आंकड़े और 2027 की सियासी तस्वीर

यदि 1991 से लेकर 2022 तक संपन्न हुए 8 विधानसभा चुनावों का विश्लेषण किया जाए, तो समाजवादी पार्टी ने 4 बार, भारतीय जनता पार्टी ने 2 बार, जनता दल ने 1 बार और राष्ट्रीय परिवर्तन दल ने 1 बार इस सीट पर जीत का स्वाद चखा है। कांग्रेस और बसपा पिछले तीन दशकों में एक बार भी इस सीट पर जीत का खाता नहीं खोल पाई हैं। व्यक्तिगत प्रदर्शन की बात करें तो महबूब अली 1996 में रनर-अप रहे थे, जिसके बाद उन्होंने 2002, 2007, 2012, 2017 और 2022 के लगातार पांच चुनावों में अमरोहा पर अपना दबदबा बनाए रखा। वर्ष 2002 में उन्होंने आरपीडी से जीत हासिल की थी, जबकि उसके बाद लगातार चार बार वह सपा के टिकट पर विधानसभा पहुंचे।

वर्ष 2027 के आगामी विधानसभा चुनाव के परिप्रेक्ष्य में अमरोहा सीट को भेदना भाजपा के लिए एक बड़ी राजनीतिक चुनौती माना जा रहा है। 2011 की जनगणना के अनुसार इस विधानसभा क्षेत्र में 50 प्रतिशत से अधिक आबादी मुस्लिम समुदाय की है, जिसके साथ अनुसूचित जाति के मतदाताओं की भी यहां बड़ी तादाद मौजूद है। यह सामाजिक समीकरण सपा के पक्ष में मजबूत आधार तैयार करता है। वर्ष 2002 में भाजपा ने आरएलडी के साथ गठबंधन के तहत यह सीट अपने सहयोगी दल को सौंपी थी, ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या 2027 में भी सीट बंटवारे को लेकर कोई नया दांव चला जाएगा। वहीं दूसरी ओर सपा और कांग्रेस के संभावित गठबंधन के अलावा बसपा की भूमिका भी अहम होगी, क्योंकि 2017 में बसपा प्रत्याशी नौशाद अली 59 हजार 671 वोटों के साथ दूसरे स्थान पर रहे थे।

सवाल-जवाब

अमरोहा विधानसभा सीट से मौजूदा विधायक कौन हैं?
अमरोहा विधानसभा सीट से समाजवादी पार्टी के महबूब अली मौजूदा विधायक हैं, जो लगातार पांच बार से इस सीट का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।
भाजपा ने अमरोहा विधानसभा सीट पर अंतिम बार कब जीत दर्ज की थी?
भाजपा ने अंतिम बार वर्ष 1996 में अमरोहा सीट जीती थी, जब मंगल सिंह ने महबूब अली को मात्र 908 वोटों से हराया था।
वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में महबूब अली की जीत का अंतर कितना था?
2022 के चुनाव में महबूब अली ने भाजपा प्रत्याशी राम सिंह को 71 हजार 36 वोटों के विशाल अंतर से पराजित किया था।
अमरोहा में सबसे करीबी विधानसभा मुकाबला किस वर्ष हुआ था?
अमरोहा में सबसे करीबी मुकाबला 2007 में हुआ था, जब महबूब अली ने भाजपा के मंगल सिंह को महज 678 वोटों के अंतर से हराया था।
क्या महबूब अली ने कभी किसी अन्य दल के टिकट पर भी अमरोहा से चुनाव जीता है?
हां, वर्ष 2002 के चुनाव में महबूब अली ने डीपी यादव की पार्टी राष्ट्रीय परिवर्तन दल (आरपीडी) के टिकट पर चुनाव लड़कर जीत दर्ज की थी।
अमरोहा विधानसभा क्षेत्र का धार्मिक और सामाजिक समीकरण क्या है?
2011 की जनगणना के अनुसार इस क्षेत्र में 50 प्रतिशत से अधिक मुस्लिम आबादी है, साथ ही अनुसूचित जाति वर्ग के मतदाताओं की भी खासी संख्या है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Karan Malhotra@karan-malhotra·6 मिनट पहले

तीस साल से एक ही नेता का दबदबा रहना और बाकी दलों का खाता तक न खुलना वाकई हैरानी की बात है। 2027 में यहां कुछ नया देखने को मिलेगा या वही पुराना नतीजा रहेगा?

Rohan Verma@rohan-verma·6 मिनट पहले

करण भाई, महबूब अली का यह गढ़ वाकई बहुत मजबूत है। पिछली बार हार का अंतर इतना बड़ा था कि 2027 में इसे भेदना किसी के लिए भी आसान नहीं होगा।

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