एशियन गेम्स 2026 की मेंस हॉकी प्रतियोगिता के खिताबी मुकाबले में भारत ने एकतरफा खेल दिखाते हुए मलेशिया को 5-1 के विशाल अंतर से पराजित किया। इस खिताबी जीत के साथ भारतीय टीम ने न केवल स्वर्ण पदक अपने नाम किया, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर एक नया कीर्तिमान भी स्थापित किया। एशियन गेम्स के इतिहास में यह पहला अवसर बना है जब भारत की मेंस और महिला दोनों टीमों ने एक ही संस्करण की हॉकी स्पर्धा में गोल्ड मेडल हासिल किया है। इसके अलावा इस टूर्नामेंट की स्वर्णिम सफलता ने भारतीय दल को 2028 में आयोजित होने वाले लॉस एंजिलिस ओलंपिक खेलों का सीधा टिकट भी दिला दिया है। पूरे मैच के दौरान भारतीय खिलाड़ियों ने शानदार तालमेल पेश किया और पहले, दूसरे तथा तीसरे क्वार्टर में लगातार आक्रमण कर गोल दागे, जबकि मलेशियाई टीम केवल पहले क्वार्टर में एक बार गोल करने में कामयाब हो सकी।
शुरुआती झटकों के बीच पहला क्वार्टर रहा रोमांचक
मैच का आगाज होते ही भारतीय टीम ने मलेशिया पर दबाव बनाने की रणनीति अपनाई। मुकाबले के शुरुआती कुछ मिनटों में भारतीय खिलाड़ियों ने सतर्कता बरती और रक्षात्मक संतुलन बनाए रखने पर ध्यान दिया। हालांकि जल्द ही टीम अपनी लय में लौटी और मलेशियाई पाले में लगातार आक्रामक मूव बनाने शुरू कर दिए। खेल के शुरुआती दौर में भारत को एक पेनल्टी कॉर्नर प्राप्त हुआ, लेकिन विपक्षी रक्षापंक्ति ने उसे नाकाम कर दिया और गोल नहीं हो सका। इसके बावजूद भारतीय टीम ने अपने हमले जारी रखे और कुछ ही मिनटों बाद दूसरा पेनल्टी कॉर्नर हासिल कर लिया। खेल के 11वें मिनट में मिले इस मौके को कप्तान हरमनप्रीत सिंह ने गोल में तब्दील कर भारत को 1-0 की महत्वपूर्ण बढ़त दिला दी।
भारतीय खेमे का यह जश्न ज्यादा लंबा नहीं खिंच पाया। बढ़त मिलने के ठीक तीन मिनट बाद मलेशिया ने जबरदस्त पलटवार किया। 14वें मिनट में मलेशियाई खिलाड़ी शेलो सिलवेरियस ने भारतीय सुरक्षा पंक्ति को भेदते हुए शानदार मैदानी गोल दाग दिया। इस मैदानी गोल के साथ ही मुकाबला 1-1 की बराबरी पर पहुंच गया और पहले क्वार्टर का खेल बराबरी के रोमांचक मोड़ पर समाप्त हुआ।
दूसरे क्वार्टर में जुगराज सिंह ने दिलाई बढ़त
दूसरे क्वार्टर की शुरुआत में मलेशियाई टीम ने अपने खेल का अंदाज बदला और पहले से कहीं ज्यादा आक्रामक रुख अपनाते हुए हमले तेज कर दिए। मलेशियाई फॉरवर्ड्स ने भारतीय घेरे में कई बार घुसपैठ की कोशिश की, मगर भारतीय रक्षापंक्ति पूरी तरह चौकस रही। भारत ने सही समय पर काउंटर अटैक किया और पेनल्टी कॉर्नर हासिल करने में सफलता पाई। मैच के 23वें मिनट में जुगराज सिंह ने मिले पेनल्टी कॉर्नर पर कोई गलती नहीं की और गेंद को गोलपोस्ट में डालकर भारत को 2-1 से आगे कर दिया।
एक गोल से पिछड़ने के बाद मलेशियाई खिलाड़ियों ने स्कोर बराबर करने के लिए पूरा जोर लगाया और भारतीय गोलपोस्ट पर लगातार दबाव बनाने का प्रयास किया। भारतीय डिफेंस ने अनुशासन और मुस्तैदी का परिचय देते हुए मलेशिया के हर आक्रमण को नाकाम कर दिया। हाफ टाइम की सीटी बजने तक भारतीय टीम ने अपने इस 2-1 के अंतर को पूरी मजबूती से कायम रखा।
तीसरे क्वार्टर में हार्दिक सिंह का निर्णायक पेनल्टी स्ट्रोक
हाफ टाइम के बाद तीसरे क्वार्टर में भारतीय टीम ने आक्रामक तेवर बरकरार रखे और गोल करने के कई बेहतरीन मौके तैयार किए। हालांकि शुरुआती लम्हों में टीम को कुछ चूकों का सामना करना पड़ा। पहले जुगराज सिंह एक पेनल्टी कॉर्नर को गोल में बदलने से चूक गए, जिसके बाद नीलकांत भी आसान दिख रहे मैदानी मौके को गोल में तब्दील नहीं कर पाए। इसके बाद मिले एक और पेनल्टी कॉर्नर पर कप्तान हरमनप्रीत सिंह का प्रयास भी गोल में तब्दील होने से रह गया।
लगातार हमलों के बीच भारत को तुरंत एक और पेनल्टी कॉर्नर मिल गया। इस बार हरमनप्रीत सिंह द्वारा लिए गए ताकतवर शॉट को मलेशियाई खिलाड़ी ने शरीर से अवैध तरीके से रोका। अंपायर ने इसे गंभीर उल्लंघन मानते हुए भारत के पक्ष में पेनल्टी स्ट्रोक का फैसला सुनाया। मैच के 42वें मिनट में हार्दिक सिंह ने इस सुनहरे मौके को भुनाया और बिना किसी चूक के गेंद को नेट में उलझाकर भारत का स्कोर 3-1 कर दिया। भारत ने इस बढ़त के बाद मलेशिया को वापसी का कोई मौका नहीं दिया और अंततः 5-1 की विशाल जीत के साथ स्वर्ण पदक पर कब्जा जमाया।



















