स्मार्ट सिटी परियोजना के अंतर्गत शामिल उत्तर प्रदेश के सहारनपुर शहर में आधारभूत सुविधाओं को सुदृढ़ करने के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ अलग ही तस्वीर पेश कर रही है। शहर के वार्ड 36 में स्थित अजमत कॉलोनी के सैकड़ों परिवार पिछले तीन हफ्तों से नगर निगम की पाइपलाइन से आ रहे बदबूदार और दूषित पानी का सामना करने को विवश हैं। खाना पकाने, नहाने और कपड़े धोने जैसी प्राथमिक दैनिक आवश्यकताओं के लिए आपूर्ति पर निर्भर इन नागरिकों के सामने अब पेयजल का गंभीर संकट खड़ा हो गया है।
घंटों मैल बैठाने के बाद किया जा रहा पानी का उपयोग
दूषित आपूर्ति के कारण स्थानीय निवासियों की दिनचर्या बुरी तरह प्रभावित हो गई है। नलों से सीधे आने वाला पानी इतना मटमैला और अशुद्ध होता है कि उसका तुरंत उपयोग करना संभव नहीं है। घरों में महिलाएं और पुरुष पानी को बाल्टियों अथवा बोतलों में भरकर पांच से छह घंटे के लिए स्थिर छोड़ देते हैं। जब मिट्टी और गाद नीचे तली में बैठ जाती है, तब ऊपर बचे पानी को सावधानीपूर्वक निथारकर पीने तथा रसोई के कार्यों में लिया जाता है। स्वच्छ जल का कोई अन्य विकल्प न होने के कारण परिवार इसी जोखिम भरे तरीके को अपनाने के लिए मजबूर हैं।
जनप्रतिनिधियों और निगम से गुहार के बाद भी नहीं मिला समाधान
मुहल्ले के निवासियों ने इस गंभीर स्थिति को लेकर स्थानीय पार्षद से औपचारिक रूप से शिकायत दर्ज कराई थी। पार्षद स्तर से नगर निगम प्रशासन के समक्ष इस मुद्दे को उठाया भी गया, किंतु अभी तक इस दिशा में कोई स्थायी तकनीकी सुधार नहीं हो सका है। मोहम्मद फरमान ने बताया कि वार्ड के हजारों घरों में इसी पाइपलाइन नेटवर्क से पानी पहुंचाया जाता है। अन्य कोई जल स्रोत उपलब्ध न होने की वजह से लोग दूषित आपूर्ति पर ही आश्रित हैं, जबकि लंबे समय से शिकायत के बावजूद समस्या जस की तस बनी हुई है।
प्रशासनिक दावों और सुधार के प्रयासों से नहीं बनी बात
कॉलोनी के निवासी दानिश ने करीब एक सप्ताह पूर्व भी इस संकट को लेकर शिकायत दर्ज कराई थी, जिसके जवाब में उन्हें जल्द स्थिति सामान्य होने का केवल औपचारिक आश्वासन ही मिला। वहीं एक अन्य स्थानीय निवासी अखलाक का कहना है कि समस्या को बीस दिन से अधिक का समय बीत चुका है। शिकायत के बाद विभाग की ओर से एक चेक वॉल्व लगवाया गया था और यह हिदायत दी गई थी कि पानी को लगातार बहने दिया जाए ताकि लाइन में जमी गंदगी अपने आप बाहर निकल जाए। हालांकि निरंतर जलापूर्ति चालू रखने के बाद भी पानी साफ नहीं हुआ। स्थानीय लोगों का आरोप है कि अब संपर्क करने पर जिम्मेदार लोग हाथ खड़े कर रहे हैं और आगे कार्रवाई करने से बच रहे हैं।



















