सेवा संकल्प अभियान के तहत वाराणसी से वडनगर की यात्रा पर निकले युवाओं के दल से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सीधा संवाद किया। इस बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री ने राष्ट्र निर्माण में सेवा की भावना, समाज सुधार की निरंतर आवश्यकता और अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति के प्रति आदर भाव पर विस्तार से अपने विचार रखे। उन्होंने स्पष्ट किया कि सामाजिक बदलाव और जनसेवा को केवल चुनावी नफे-नुकसान अथवा वोटबैंक की राजनीति के दायरे में नहीं बांधा जाना चाहिए, बल्कि समाज की कुरीतियों को दूर करने और सकारात्मक बदलाव लाने के लिए निस्वार्थ भाव से अनवरत प्रयास किए जाने चाहिए।
महात्मा गांधी के जीवन दर्शन का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि जब हम बापू के पूरे सफर का अध्ययन करते हैं, तो यह बात साफ दिखाई देती है कि वे केवल अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ स्वतंत्रता संग्राम का नेतृत्व ही नहीं कर रहे थे, बल्कि एक असाधारण सामाजिक सुधारक भी थे। उन्होंने तत्कालीन समाज में फैली तमाम विकृतियों और कुरीतियों के विरुद्ध कड़े कदम उठाए और जनचेतना जागृत की। प्रधानमंत्री ने युवाओं से आह्वान किया कि समाज में लगातार सकारात्मक परिवर्तन लाने की इस विरासत को आगे बढ़ाया जाना चाहिए, और जो भी व्यक्ति समाज की सेवा करता है, उसके योगदान का खुले दिल से सम्मान होना चाहिए।
कुंभ के सफाईकर्मियों के चरण धोने का निर्णय क्यों लिया था
संवाद के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने प्रयागराज कुंभ के दौरान सफाईकर्मियों के चरण पखारने के अपने उस बहुचर्चित निर्णय का विशेष रूप से उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि प्रयागराज में स्वच्छता कर्मियों ने जिस निष्ठा और अथक परिश्रम से अपने दायित्व को निभाया था, उसी की बदौलत पूरा कुंभ दुनिया भर में अपनी सफाई व्यवस्था के लिए सराहा गया और इससे अंतरराष्ट्रीय पटल पर भारत का गौरव काफी बढ़ा था।
प्रधानमंत्री ने उस भावुक पल को साझा करते हुए कहा कि उनके मन में यह विचार पूरी तरह स्पष्ट था कि जिन स्वच्छता दूतों ने पूरे विश्व में देश का मान सम्मान बढ़ाया है, उनके पैर धोकर आशीर्वाद लेना ही उनके प्रति सच्ची कृतज्ञता होगी। इसी सोच के साथ उन्होंने सफाईकर्मियों के पैर धोकर उन्हें सर्वोच्च नागरिक सम्मान प्रदान किया था। प्रधानमंत्री ने रेखांकित किया कि सेवा करने वाले हर श्रमजीवी की गरिमा को पहचानना और उसे यथोचित प्रतिष्ठा देना पूरे समाज का सामूहिक कर्तव्य है।
बीते 12 वर्षों में शहरों और गांवों की घटी खाई
देश के ढांचागत विकास और सामाजिक प्रगति का ब्योरा देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बताया कि बीते 12 वर्षों के दौरान भारत में ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच का अंतर बहुत तेजी से कम हुआ है। बुनियादी सुविधाओं के विस्तार ने दूरदराज के क्षेत्रों की तस्वीर बदली है।
उन्होंने कहा कि आज देश के गांवों में सड़क, पानी, बिजली जैसी अधोसंरचना में ऐतिहासिक सुधार दर्ज किया गया है। इसके साथ ही विभिन्न योजनाओं और अवसरों की बदौलत ग्रामीण महिलाओं, बहनों और बेटियों के जीवन में आत्मनिर्भरता का स्तर काफी बढ़ा है, जो एक सशक्त और संतुलित समाज की नींव रख रहा है।
वडनगर की भूमि से मिले संस्कार और काशी की सेवा के रंग
अपनी व्यक्तिगत जीवन यात्रा और आत्मिक जुड़ाव का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि उनकी जन्मभूमि वडनगर ने उन्हें जीवन के प्रारंभिक संस्कार दिए, जबकि उनकी कर्मभूमि काशी ने उन संस्कारों में जनसेवा के अनगिनत रंग भरने का काम किया। उन्होंने यात्रा में शामिल युवाओं की सराहना करते हुए कहा कि वे इस यात्रा को सेवा के विविध रंगों से जीवंत बना रहे हैं।
प्रधानमंत्री के अनुसार, यह यात्रा देशभक्ति, समर्पण, उच्च संस्कारों और दृढ़ संकल्प के रंगों से सजी है, और यह ऊर्जा विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने के बाद ही विश्राम लेगी। उन्होंने कहा कि सेवा संकल्प यात्रा दरअसल इसी अंतर्निहित सेवा भाव की प्रत्यक्ष अभिव्यक्ति है, जो पूरे मार्ग में स्पष्ट रूप से दिखाई दे रही है।
पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जयंती पर याद किए सात सूत्र
शुक्रवार को पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जन्म-जयंती के अवसर पर प्रधानमंत्री मोदी ने उनके जीवन दर्शन और विचारों को स्मरण किया। उन्होंने कहा कि पंडित दीनदयाल जी ने अपने संपूर्ण जीवन से निरंतर आगे बढ़ते रहने का मूल मंत्र यानी चरैवति-चरैवति-चरैवति का संदेश दिया। वे स्वयं एक अविरल यात्री थे और एक सेवा यात्री के तौर पर समाज के लिए चलते रहना ही कार्यकर्ताओं का सच्चा ध्येय होना चाहिए।
प्रधानमंत्री ने कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय ने समाज के प्रति अपने कर्तव्यों के निर्वहन के लिए सात बुनियादी सूत्र दिए हैं, जिनका स्मरण प्रत्येक कार्यकर्ता को जनसेवा के लिए नई ऊर्जा और प्रेरणा देता है
- सेवाभाव: समाज के प्रति निस्वार्थ समर्पण और परोपकार की भावना।
- संतुलन: जीवन, विचारों और सामाजिक दायित्वों के बीच सामंजस्य।
- संयम: आचरण और व्यवहार में अनुशासन बनाए रखना।
- समन्वयक: समाज के विभिन्न वर्गों को साथ लेकर चलने की क्षमता।
- सकारात्मकता: हर परिस्थिति में आशावादी और रचनात्मक दृष्टिकोण।
- संवेदना: दूसरों के सुख-दुख और कठिनाइयों को गहराई से महसूस करना।
- संवाद: निरंतर आपसी बातचीत और संपर्क से विश्वास को मजबूत करना।
वडनगर से काशी और काशी से वडनगर की दोहरी यात्राएं
प्रधानमंत्री ने बताया कि इससे ठीक एक दिन पहले उन्होंने वडनगर से वाराणसी की ओर निकले सेवा यात्रियों के जत्थे से भी इसी प्रकार संवाद किया था। उन्होंने कहा कि यह एक सुखद संयोग है कि एक दिन पहले वडनगर से निकली टोली से बात हुई और अब काशी से उनके गृह नगर वडनगर जा रहे युवाओं से बात करने का अवसर मिला।
उन्होंने कहा कि युवा दल बाबा विश्वनाथ और मां गंगा का आशीर्वाद प्राप्त करके यात्रा पर निकला है और मार्ग में निरंतर जनसेवा के कार्य करते हुए वडनगर के अति प्राचीन हाटकेश्वर महादेव मंदिर में शीश नवाएगा। प्रधानमंत्री ने यात्रा के दौरान रास्ते में सेवा कार्य करते हुए आगे बढ़ने की इस पहल को युवाओं के लिए अत्यंत सौभाग्यशाली और प्रेरणादायी बताया।





















