उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद शहर को स्मार्ट सिटी बनाने का दावा करने वाले नगर निगम की कार्यप्रणाली पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। शहर के विभिन्न वार्डों में गलियों और जल निकासी व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए हर साल करोड़ों रुपये आवंटित किए जाते हैं, लेकिन पहली ही बरसात में विकास कार्यों की हकीकत सामने आ जाती है। ताजा मामला वार्ड संख्या 35 का है, जहां लालऊ रोड पर लाखों रुपये के बजट से बनाए जा रहे एक महत्वपूर्ण आरसीसी नाले के निर्माण कार्य में अत्यधिक घटिया सामग्री का धड़ल्ले से इस्तेमाल किया जा रहा है। निर्माण स्थल पर गिट्टी के साथ बड़े पैमाने पर मिट्टी मिलाकर मसाला तैयार किया जा रहा है, जिससे नाले की मजबूती और टिकाऊपन पर खतरे के बादल मंडराने लगे हैं।
लालऊ रोड पर 66.89 लाख रुपये की परियोजना में धांधली
वार्ड संख्या 35 के तहत लालऊ पानी की टंकी से लेकर मां संतोषी ट्रेडर्स तक जल निकासी को सुचारु बनाने के उद्देश्य से आरसीसी नाले का निर्माण कराया जा रहा है। फिरोजाबाद नगर निगम द्वारा स्वीकृत इस बड़ी परियोजना के लिए कुल 66 लाख 89 हजार 445 रुपये का भारी-भरकम बजट तय किया गया है। इतने बड़े बजट के बावजूद मौके पर निर्माण कार्य के दौरान भारी लापरवाही और मानकों की अनदेखी देखी गई। नाले के पास एकत्र की गई गिट्टी के ढेर में नीचे मिट्टी दबी हुई पाई गई, जिसे सीधे उठाकर मजदूर कंक्रीट का मसाला बनाने में इस्तेमाल कर रहे थे। इस तरह मिट्टी युक्त मिश्रण से तैयार आरसीसी संरचना समय से पहले ही क्षतिग्रस्त हो सकती है।
ठेकेदार बंटी का बयान और काम पर उठते सवाल
निर्माण स्थल पर मौजूद ठेकेदार बंटी से जब गिट्टी में मिट्टी की मिलावट को लेकर सीधा सवाल किया गया, तो उन्होंने किसी भी जानबूझकर की गई मिलावट से इनकार कर दिया। ठेकेदार का कहना था कि गिट्टी में मिट्टी की कोई बड़ी मिलावट नहीं है और केवल थोड़ी-बहुत धूल या मिट्टी हो सकती है। हालांकि, मौके पर उठ रहे सवालों और विरोध के बाद ठेकेदार द्वारा उस विवादित गिट्टी का उपयोग अस्थायी रूप से रोक दिया गया। इसके बावजूद यह घटना यह स्पष्ट करती है कि सरकारी धन का इस्तेमाल कर कराए जा रहे विकास कार्यों में किस तरह गुणवत्ता के साथ समझौता किया जा रहा है, जिससे भविष्य में बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंच सकता है।
शहर के अन्य इलाकों में भी ध्वस्त हो चुकी हैं नालियां
फिरोजाबाद में घटिया निर्माण सामग्री के कारण जनसुविधाओं के ध्वस्त होने का यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे पूर्व कोटला रोड पर स्थित श्रीराम कॉलोनी में बनाई गई नाली हल्की सी बारिश का पानी झेल नहीं सकी और टूटकर जमींदोज हो गई थी। शहर के कई अन्य मोहल्लों से भी ऐसी शिकायतें लगातार सामने आती रही हैं, जहां नई बनी नालियां और नाले कुछ ही हफ्तों में धराशायी हो जाते हैं। इसके चलते स्थानीय नागरिकों को न केवल जलभराव की समस्या का सामना करना पड़ता है, बल्कि नगर निगम के राजकोष को भी करोड़ों रुपये का नुकसान पहुंचता है।
महापौर कामिनी राठौर की चुप्पी से गहराया जनआक्रोश
लाखों रुपये की लागत से हो रहे निर्माण कार्यों में खुलेआम हो रही इस गड़बड़ी को लेकर जब नगर निगम की सर्वोच्च प्रशासनिक प्रतिनिधि महापौर कामिनी राठौर से संपर्क किया गया, तो उन्होंने इस विषय पर कुछ भी टिप्पणी करने से साफ इनकार कर दिया। महापौर की यह खामोशी अधिकारियों और ठेकेदारों की मिलीभगत की आशंकाओं को बल दे रही है। शहरवासी अब मांग कर रहे हैं कि 66.89 लाख रुपये की इस लालऊ रोड परियोजना सहित हाल ही में हुए सभी निर्माण कार्यों की निष्पक्ष जांच कराई जाए और दोषी ठेकेदारों के खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाए।



















