उत्तर प्रदेश के कई जिलों में पिछले दो दिनों से जारी मूसलाधार बारिश ने जनजीवन को बुरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया है। लगातार हो रही इन मानसूनी बरसात की घटनाओं के बीच प्रदेशभर से दुखद खबरें सामने आई हैं, जहां पिछले अड़तालीस घंटों के भीतर बारिश और उससे जुड़े हादसों में कुल पंद्रह लोगों की जान चली गई है। इस आपदा ने केवल इंसानी जिंदगियों को ही प्रभावित नहीं किया है, बल्कि भारी पैमाने पर पशुओं की हानि हुई है और किसानों की तैयार फसलें भी बर्बाद हो गई हैं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने खुद मोर्चा संभालते हुए प्रशासनिक मशीनरी को मैदान में उतरने के सख्त निर्देश जारी किए हैं।
प्रशासनिक अमला फील्ड में उतरा, मुआवजे की प्रक्रिया हुई तेज
मुख्यमंत्री के साफ निर्देशों के बाद तमाम जिलों के जिलाधिकारी और प्रशासनिक अधिकारी तुरंत एक्शन मोड में आ गए हैं। सरकार की ओर से यह स्पष्ट निर्देश दिए गए थे कि बारिश और जनहानि के मामलों में पीड़ित परिवारों को पच्चीस नहीं बल्कि चौबीस घंटे के भीतर आर्थिक सहायता और मुआवजा राशि मुहैया कराई जाए। इस आदेश के अनुपालन में जिलाधिकारियों ने प्रभावित परिजनों तक राहत राशि पहुंचाने की प्रक्रिया तत्काल प्रभाव से शुरू कर दी है। सरकारी मशीनरी यह सुनिश्चित करने में जुटी है कि संकट की इस घड़ी में किसी भी पीड़ित परिवार को आर्थिक मदद के लिए दफ्तरों के चक्कर न काटने पड़ें और सहायता राशि सीधे उनके तक पहुंचे।
अन्नदाताओं की फसलों का हो रहा सर्वे
इंसानी नुकसान और पशु हानि के साथ-साथ इस बेमौसम और भारी बरसात ने खेती-किसानी को भी भारी आघात पहुंचाया है। खेतों में लहलहाती फसलें पानी में डूबने से सड़ गई हैं, जिससे किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें खींच गई हैं। मुख्यमंत्री के विशेष निर्देशों के तहत अब कृषि और राजस्व विभाग के अधिकारी सीधे खेतों में पहुंचकर हुए नुकसान का जमीनी आकलन कर रहे हैं। इस सर्वे का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना है कि किस किसान की कितनी फसल बर्बाद हुई है, ताकि नियमानुसार तय मुआवजा जल्द से जल्द अन्नदाताओं के बैंक खातों तक पहुंचाया जा सके।
राहत शिविरों का संचालन और सुरक्षा प्रबंध
बाढ़ और भारी जलभराव से बुरी तरह प्रभावित इलाकों में जिला प्रशासन की रेस्क्यू टीमें लगातार डटी हुई हैं। इन संकटग्रस्त क्षेत्रों में फंसे लोगों और परिवारों को सुरक्षित निकालकर नजदीकी बाढ़ राहत शिविरों तक पहुंचाने का काम युद्धस्तर पर चल रहा है। इन राहत शिविरों में शरण लेने वाले नागरिकों के लिए खानपान, चिकित्सा और अन्य जरूरी सुविधाओं की मुकम्मल व्यवस्था करने के कड़े निर्देश दिए गए हैं, ताकि बेघर हुए लोगों को किसी प्रकार की कठिनाई का सामना न करना पड़े।
लापरवाही पर होगी सख्त कार्रवाई की चेतावनी
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रशासनिक अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक करते हुए दो टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि आपदा राहत कार्यों में किसी भी स्तर पर कोताही या लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे लगातार जमीनी स्तर पर निगरानी बनाए रखें और हर एक जरूरतमंद तक तत्काल सहायता पहुंचाएं। सरकार का यह प्रयास है कि इस प्राकृतिक आपदा के समय आम जनमानस को हरसंभव संबल प्रदान किया जाए और हालात को जल्द से जल्द पूरी तरह नियंत्रण में लाया जाए।





















