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ग्रेटर नोएडा में यमुना एक्सप्रेसवे पर स्लीपर बस अग्निकांड में नौ यात्रियों की जान गई, चालक दल पर गंभीर लापरवाही के आरोपउत्तर प्रदेश
24 सित॰ 2026, 5:08 pm (41 मिनट पहले)· 0

ग्रेटर नोएडा में यमुना एक्सप्रेसवे पर स्लीपर बस अग्निकांड में नौ यात्रियों की जान गई, चालक दल पर गंभीर लापरवाही के आरोप

यमुना एक्सप्रेसवे पर दिल्ली से महोबा जा रही स्लीपर बस में आग लगने से नौ लोगों की मौत हो गई। एफआईआर के अनुसार आग लगने से पहले जलने की गंध और चालक दल द्वारा सिगरेट पीने पर यात्रियों की चेतावनी को अनसुना कर दिया गया था।

उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा क्षेत्र में यमुना एक्सप्रेसवे पर एक दर्दनाक सड़क हादसा हुआ, जहां आग की चपेट में आने से एक निजी स्लीपर टूरिस्ट बस पूरी तरह खाक हो गई। इस भयावह हादसे में नौ यात्रियों ने अपनी जान गंवा दी, जबकि कई अन्य लोग गंभीर रूप से झुलस गए हैं। यह स्लीपर बस दिल्ली से उत्तर प्रदेश के महोबा की ओर जा रही थी और घटना के वक्त इसमें 35 से अधिक यात्री सवार थे। पुलिस प्राथमिक सूचना रिपोर्ट (एफआईआर) में दर्ज बयानों के आधार पर इस भीषण अग्निकांड को लेकर कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं, जो बस चालक दल के बेहद गैर-जिम्मेदाराना रवैये को उजागर करते हैं।

सफर के दौरान सिगरेट पीने पर विवाद और यात्रियों की अनदेखी

एफआईआर के अनुसार, यात्रा के दौरान बस चालक और कंडक्टर लगातार केबिन में सिगरेट पी रहे थे। बस में सवार मुसाफिरों ने चलती गाड़ी के अंदर धुआं उड़ाने पर कड़ा विरोध दर्ज कराया था। इसके बावजूद चालक दल ने यात्रियों की आपत्ति को गंभीरता से लेने के बजाय उनका मजाक उड़ाया और उन पर हंसते हुए चुपचाप अपनी सीट पर बैठने की धमकी दी। यात्रियों ने अपनी सुरक्षा को लेकर चिंता जताई थी, लेकिन चालक और परिचालक अपनी मनमानी पर अड़े रहे।

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जलने की बदबू को बताया आम बात, गाड़ी रोकने से किया मना

कुछ ही देर बाद तेज गति से दौड़ रही बस के भीतर कुछ जलने की तीखी गंध फैलने लगी। परेशान यात्रियों ने तुरंत आगे जाकर ड्राइवर को आगाह किया कि वाहन में कुछ गड़बड़ी हो सकती है और गाड़ी को फौरन सड़क किनारे रोककर जांच की जाए। चालक और कंडक्टर ने इस चेतावनी को भी पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया। उन्होंने यात्रियों से कहा कि इस तरह की गंध बस के अंदर अक्सर आती रहती है और इसमें घबराने की कोई बात नहीं है। बार-बार गुहार लगाने पर भी चालक ने न तो वाहन रोका और न ही इंजन या केबिन का कोई मुआयना किया, बल्कि वह लगातार सिगरेट पीता रहा।

केबिन से लपटें उठने पर चालक का अमानवीय जवाब

सवारियों की आशंका कुछ ही मिनटों में सच साबित हो गई जब बस के अगले हिस्से से अचानक आग की तेज लपटें निकलने लगीं। सामने आग भड़कते देख बस के अंदर चीख-पुकार मच गई और यात्री जान बचाने के लिए चिल्लाने लगे। एफआईआर में दर्ज शिकायत के मुताबिक, जब यात्रियों ने दहशत में आकर बस रोकने की मिन्नतें कीं, तो चालक ने बेहद क्रूरता से जवाब दिया, "मुझे कोई फ़र्क नहीं पड़ता कि तुम मरो या जियो, मैं बस नहीं रोकूँगा।" इस अमानवीय प्रतिक्रिया के बाद आग ने देखते ही देखते पूरी गाड़ी को अपनी चपेट में ले लिया।

एसी सिस्टम में धमाके और लुब्रिकेटिंग ऑयल से फैली विकराल आग

शुरुआती तकनीकी जांच में यह बात सामने आई है कि आग की शुरुआत बस के एयर कंडीशनिंग (एसी) सिस्टम में हुए एक जोरदार धमाके से हुई। इस धमाके के फौरन बाद इंजन के लुब्रिकेटिंग ऑयल ने आग पकड़ ली, जिसने लपटों को अत्यंत भीषण बना दिया। देखते ही देखते जहरीले और घने काले धुएं ने पूरी स्लीपर बस को ढक लिया, जिसके चलते अंदर फंसे यात्रियों के लिए खिड़कियों और दरवाजों से बाहर निकलना नामुमकिन हो गया। इस घुटन और आग की चपेट में आने से नौ लोगों की मौके पर ही मौत हो गई।

सुरक्षा उपकरणों का अभाव और पुराने नियमों के उल्लंघन

जांच में यह भी स्पष्ट हुआ है कि यह टूरिस्ट बस मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में पंजीकृत है। इस वाहन का पुराना रिकॉर्ड भी बेहद खराब रहा है और इस पर विभिन्न उल्लंघनों के चलते कुल 1 लाख 55 हजार रुपये का चालान बकाया था। इन चालानों में अत्यधिक तेज रफ्तार (ओवरस्पीडिंग), बस परमिट के नियमों का उल्लंघन, खतरनाक तरीके से गाड़ी चलाना, बस की छत पर भारी सामान लादना तथा चालक और परिचालक द्वारा निर्धारित यूनिफॉर्म न पहनना शामिल है। सबसे घातक पहलू यह रहा कि वाहन के भीतर आग बुझाने के प्राथमिक उपकरण (फायर सेफ्टी इक्विपमेंट) तक मौजूद नहीं थे, जिसके कारण शुरुआती पलों में आग पर काबू पाने का कोई साधन नहीं बचा।

सवाल-जवाब

यमुना एक्सप्रेसवे पर बस अग्निकांड में कितने लोगों की जान गई?
इस भीषण हादसे में नौ यात्रियों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य लोग गंभीर रूप से झुलस गए हैं।
यह स्लीपर बस कहां से कहां जा रही थी और इसमें कितने यात्री थे?
यह बस दिल्ली से उत्तर प्रदेश के महोबा जा रही थी और घटना के वक्त इसमें 35 से अधिक यात्री सवार थे।
शुरुआती जांच के अनुसार बस में आग लगने का मुख्य कारण क्या था?
शुरुआती पड़ताल से पता चला है कि आग बस के एयर कंडीशनिंग (एसी) सिस्टम में हुए धमाके और इंजन के लुब्रिकेटिंग ऑयल में आग लगने से फैली।
एफआईआर के अनुसार यात्रियों ने आग लगने से पहले क्या शिकायत की थी?
यात्रियों ने चालक और कंडक्टर के सिगरेट पीने पर आपत्ति जताई थी और जलने की गंध आने पर बस रोकने को कहा था, जिसे नजरअंदाज कर दिया गया।
हादसाग्रस्त बस पर पहले से कितने रुपये का चालान बकाया था?
मध्य प्रदेश के छतरपुर में पंजीकृत इस बस पर ओवरस्पीडिंग और नियम उल्लंघनों के कारण कुल 1 लाख 55 हजार रुपये का चालान था।
क्या बस में आग बुझाने के सुरक्षा उपकरण मौजूद थे?
नहीं, बस में अनिवार्य फायर सेफ्टी उपकरण नहीं थे, जिसके चलते आग लगने पर उसे बुझाया नहीं जा सका।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 4

Arjun Mehta@arjun-mehta·6 मिनट पहले

चालक की ऐसी लापरवाही और अमानवीयता देखकर रोंगटे खड़े हो जाते हैं। जब यात्रियों ने पहले ही धुआँ और जलने की गंध की शिकायत कर दी थी, तब भी गाड़ी न रोकना और ऐसा जवाब देना कि कोई फर्क नहीं पड़ता, सीधे तौर पर हत्या है। परिवहन नियमों और कमर्शियल वाहनों की फिटनेस पर प्रशासनिक स्तर पर बहुत सख्ती की जरूरत है।

Ravikash Gupta@ravikash·6 मिनट पहले

अर्जुन जी, आपकी बात बिल्कुल सही है। पिछले साल जब मैं दिल्ली से आ रहा था, तब हमारी बस में भी ऐसी ही बदबू आई थी और ड्राइवर ने अनसुना कर दिया था। भगवान का शुक्र है कि कुछ नहीं हुआ।

Karan Malhotra@karan-malhotra·28 मिनट पहले

नौ बेकसूर लोगों की जान सिर्फ इसलिए चली गई क्योंकि ड्राइवर को सिगरेट पीने से रोकने और जलने की बदबू की शिकायत पर उसकी अकड़ खत्म नहीं हुई। पिछले साल जब मैं दिल्ली से महोबा जा रहा था, तब हमारी बस का ड्राइवर भी ऐसे ही धुआं उड़ा रहा था और टोकने पर लड़ने को तैयार हो गया था। भगवान का शुक्र है कि तब ऐसा हादसा टल गया था, वरना आज मेरा परिवार भी इसी दर्द से गुजर रहा होता।

Rohan Verma@rohan-verma·28 मिनट पहले

करण, सच में ड्राइवर की वो बात सुनकर ही रोंगटे खड़े हो गए कि 'मरो या जियो'। ऐसे लोगों का लाइसेंस हमेशा के लिए रद्द होना चाहिए।

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