राजस्थान के बीकानेर जिले में संरक्षित खेती और आधुनिक कृषि तकनीकों को गति देने के लिए एक अहम पहल शुरू की गई है। जिले के उद्यानिकी किसानों को खेतों में प्लास्टिक मल्चिंग तकनीक का इस्तेमाल करने पर कुल लागत का 50 प्रतिशत तक अनुदान दिया जाएगा। इस विशेष सरकारी पहल का मुख्य मकसद खेतों में अनावश्यक खरपतवार की रोकथाम करना, सीमित सिंचाई जल का अत्यधिक कुशल उपयोग सुनिश्चित करना और बागवानी फसलों की समग्र पैदावार व गुणवत्ता को बेहतर बनाना है। बीकानेर जिले के लिए उद्यान विभाग ने कुल 70 हेक्टेयर क्षेत्र में इस योजना का प्रत्यक्ष लाभ पहुंचाने का प्रशासनिक लक्ष्य निर्धारित किया है।
राष्ट्रीय बागवानी मिशन के तहत प्रति हेक्टेयर सहायता का गणित
उद्यान विभाग के सहायक निदेशक मुकेश गहलोत के अनुसार राष्ट्रीय बागवानी मिशन के अंतर्गत संरक्षित खेती के विस्तार के लिए प्लास्टिक मल्च के प्रयोग को निरंतर प्रोत्साहित किया जा रहा है। योजना के प्रावधानों के तहत किसानों को प्लास्टिक मल्च शीट की कुल लागत का 50 प्रतिशत वित्तीय सहयोग मिलेगा, जो अधिकतम 20 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर तक सीमित रहेगा। योजना नियमों के मुताबिक एक व्यक्तिगत किसान को अधिकतम 2 हेक्टेयर क्षेत्र के लिए प्रोरेटा आधार पर यह आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जा सकती है। इससे बड़े पैमाने पर खेती करने वाले किसानों के साथ-साथ मध्यम जोत वाले काश्तकार भी आधुनिक तकनीक अपनाने में सक्षम हो सकेंगे।
अनुबंधित फर्मों से खरीद और लागत के मानक नियम
योजना के अंतर्गत आर्थिक लाभ प्राप्त करने के लिए किसानों को उद्यान विभाग द्वारा पहले से सूचीबद्ध एवं अनुबंधित फर्मों से ही निर्धारित गुणवत्ता वाली प्लास्टिक मल्च शीट की खरीद करनी होगी। प्रति हेक्टेयर प्रयुक्त मल्च शीट की गणना 40 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर की आधार लागत या अनुबंधित फर्म द्वारा तय की गई वास्तविक दर, दोनों में से जो भी कम होगी, उसके आधार पर करके 50 प्रतिशत की अनुदान राशि जारी की जाएगी। इसके अलावा अनुसूचित क्षेत्रों की विशेष भौगोलिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए मल्च शीट की इकाई लागत में 15 प्रतिशत की अतिरिक्त सीमा भी निर्धारित की गई है, ताकि स्थानीय काश्तकारों को उनके परिवेश के अनुसार समुचित लाभ मिल सके।
बीकानेर जिले में 70 हेक्टेयर का लक्ष्य और श्रेणीवार आवंटन
उद्यान अनुसंधान एटीसी के उपनिदेशक प्रेमाराम ने विस्तृत ब्योरा देते हुए स्पष्ट किया कि बीकानेर जिले में कुल 70 हेक्टेयर क्षेत्रफल में प्लास्टिक मल्चिंग तकनीक लागू करने का लक्ष्य तय किया गया है। सामाजिक संतुलन और समावेशी विकास को ध्यान में रखते हुए इस लक्ष्य को श्रेणियों में बांटा गया है, जिसके अंतर्गत 50 हेक्टेयर क्षेत्र सामान्य श्रेणी के किसानों के लिए तथा 20 हेक्टेयर क्षेत्र अनुसूचित जाति वर्ग के किसानों के लिए आरक्षित रखा गया है। अधिकारियों का मानना है कि इस तकनीक के व्यावहारिक प्रयोग से मिट्टी में लंबे समय तक नमी सुरक्षित रहती है, जिससे शुष्क और अर्ध-शुष्क इलाकों में सिंचाई जल की भारी बचत होती है। साथ ही फसल पर धूप और कीटों के सीधे दुष्प्रभाव में कमी आने से अंतिम उत्पाद का बाजार मूल्य भी सुधरता है।
नए आवेदकों को प्राथमिकता और पात्रता की शर्तें
विभाग ने लाभ वितरण की प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता बनाए रखने के लिए पात्रता के कड़े मानदंड तय किए हैं। मुकेश गहलोत ने बताया कि योजना का आवंटन करते समय ऐसे काश्तकारों को पहली प्राथमिकता दी जाएगी, जिन्होंने पहले कभी इस अनुदान का लाभ नहीं उठाया है। दूसरी ओर, जिन किसानों ने वर्ष 2025-26 के दौरान पहले ही इस योजना के तहत आर्थिक लाभ प्राप्त कर लिया है, वे मौजूदा चरण में आवेदन के पात्र नहीं माने जाएंगे। विभाग की स्पष्ट नीति अधिक से अधिक नए किसानों को इस तकनीकी दायरे में जोड़ने की है, ताकि जिले के व्यापक क्षेत्र में उद्यानिकी का आधुनिकीकरण किया जा सके।
राज किसान पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया
योजना से जुड़ने के इच्छुक सभी पात्र किसान राज्य सरकार के आधिकारिक राज किसान पोर्टल के माध्यम से अपना ऑनलाइन आवेदन पत्र जमा कर सकते हैं। उद्यान विभाग ने पूरी प्रक्रिया को डिजिटल बनाते हुए ऑनलाइन पत्रावलियां आमंत्रित की हैं। किसानों को परामर्श दिया गया है कि वे आवेदन सबमिट करने से पहले अपनी भूमि के आवश्यक दस्तावेज, बैंक विवरण और पात्रता शर्तों की विधिवत जांच कर लें। आवेदन से संबंधित किसी भी तकनीकी कठिनाई या मार्गदर्शन के लिए किसान अपने संबंधित क्षेत्र के सहायक कृषि अधिकारी अथवा स्थानीय कृषि पर्यवेक्षक उद्यान से सीधे संपर्क कर जानकारी जुटा सकते हैं।





















