बागेश्वर में वाहन चलाने की कला सीखने के साथ-साथ उसकी देखरेख और छोटी-मोटी तकनीकी खराबियों को खुद दूर करने की समझ होना अब युवाओं के लिए रोजगार के नए रास्ते खोल सकता है। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान की तरफ से स्थानीय युवाओं के लिए एक विशेष 31 दिवसीय मोटर वाहन प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। आगामी 1 अक्टूबर से शुरू होने वाले इस प्रशिक्षण सत्र में 30 से अधिक युवाओं को शामिल किया जाएगा, ताकि वे परिवहन के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बन सकें।
प्रशिक्षण का उद्देश्य और जरूरत
ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान के फैकल्टी चंदन भाकुनी ने इस पहल के बारे में विस्तार से बताते हुए कहा कि मौजूदा समय में मोटर वाहन के क्षेत्र में रोजगार और स्वरोजगार के अवसरों में लगातार विस्तार हो रहा है। पहाड़ी क्षेत्रों की भौगोलिक स्थिति को देखते हुए वहां के जनजीवन और रोजमर्रा की गतिविधियों में वाहन और परिवहन की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में यदि युवाओं के पास केवल वाहन चलाने का कौशल न होकर उसके रखरखाव और सामान्य तकनीकी समस्याओं को समझने की भी क्षमता हो, तो उनके लिए रोजगार के द्वार और अधिक सुगम हो जाते हैं। इसी व्यावहारिक जरूरत को पूरा करने के लिए संस्थान यह विशेष प्रशिक्षण सत्र आयोजित कर रहा है। इस पाठ्यक्रम के दौरान युवाओं को ड्राइविंग की बुनियादी शिक्षा के साथ-साथ वाहन की सेहत से जुड़ी जरूरी बातें और छोटी-मोटी तकनीकी दिक्कतों को समय रहते पहचानने के तरीके सिखाए जाएंगे।
व्यावहारिक और प्रायोगिक ज्ञान पर जोर
इस पूरे 31 दिवसीय प्रशिक्षण के दौरान प्रशिक्षुओं को केवल सैद्धांतिक बातें नहीं, बल्कि प्रायोगिक या प्रैक्टिकल तरीके से प्रशिक्षित किया जाएगा। कार्यक्रम की रूपरेखा इस प्रकार तैयार की गई है कि युवाओं को वाहन के सामान्य रखरखाव, ड्राइविंग के दौरान बरती जाने वाली जरूरी सावधानियों और तकनीकी समस्याओं की सटीक पहचान करने का सीधा अनुभव मिल सके। आयोजकों का मुख्य प्रयास यही है कि युवा केवल स्टीयरिंग संभालना ही न सीखें, बल्कि मशीनरी की बुनियादी समझ भी अपने भीतर विकसित करें। व्यावहारिक प्रशिक्षण के माध्यम से इन युवाओं को भविष्य में आने वाली तमाम पेशेवर चुनौतियों और वास्तविक परिस्थितियों का सामना करने के लिए मानसिक रूप से तैयार किया जाएगा, ताकि वे कार्यस्थल पर किसी भी मुश्किल में न घबराएं।
नौकरी और स्वरोजगार दोनों के खुलेंगे विकल्प
इस मोटर वाहन प्रशिक्षण पाठ्यक्रम को पूरा करने के बाद युवाओं के सामने रोजगार के कई नए रास्ते और विकल्प खुल सकते हैं। प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले युवा विभिन्न निजी संस्थानों, ट्रांसपोर्ट कंपनियों और वाहन से जुड़े अन्य क्षेत्रों में नौकरी के अवसर तलाश सकते हैं। इसके अलावा, यदि उनके पास जरूरी संसाधन और अवसर उपलब्ध होते हैं, तो वे किसी के अधीन काम करने के बजाय अपना खुद का छोटा स्वरोजगार भी शुरू कर सकते हैं। ग्रामीण इलाकों और पर्वतीय क्षेत्रों के युवाओं के लिए इस तरह के कौशल विकास कार्यक्रम इसलिए भी अत्यधिक उपयोगी हैं क्योंकि एक बार हुनरमंद होने के बाद उन्हें रोजगार के लिए हमेशा बड़े शहरों की तरफ पलायन करने की आवश्यकता नहीं पड़ती। वे अपने ही आसपास के इलाकों में स्थानीय स्तर पर काम के नए अवसर खोज सकते हैं। वाहन चलाने और उसके रखरखाव का यह विशेष हुनर परिवहन सेवाओं, निजी गाड़ी संचालन और संबंधित उद्योगों में बेहद काम आता है।
युवाओं में आत्मविश्वास जगाने की अनूठी पहल
इस प्रशिक्षण में हिस्सा ले रहे प्रशिक्षार्थी अजय कुमार का कहना है कि ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान की तरफ से उठाया गया यह 31 दिवसीय कदम युवाओं को हुनरमंद और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक बेहद सराहनीय प्रयास है। जो भी इच्छुक युवा इस कार्यक्रम का लाभ उठाना चाहते हैं, वे ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान से संपर्क करके आवेदन और अन्य औपचारिकताओं की पूरी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। हालांकि, आवेदन करने से पहले सभी युवाओं को यह सलाह दी जाती है कि वे संस्थान से संपर्क करके इस प्रशिक्षण की पात्रता, आवश्यक दस्तावेजों की सूची, निर्धारित तिथियों और अन्य जरूरी नियमों की जानकारी अवश्य हासिल कर लें, ताकि प्रक्रिया में कोई अड़चन न आए।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने का प्रयास
एक अन्य प्रशिक्षार्थी बलवंत कोरंगा ने अपनी बात रखते हुए कहा कि इस प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य केवल तकनीकी कौशल देना ही नहीं है, बल्कि इसके जरिए युवाओं के भीतर आत्मविश्वास को भी मजबूत करना है। जब युवा तकनीकी रूप से दक्ष हो जाते हैं, तो उनका मनोबल स्वतः बढ़ जाता है। इससे वे केवल नौकरी की तलाश तक सीमित नहीं रहते, बल्कि स्वरोजगार के क्षेत्र में भी बड़े कदम बढ़ाने का साहस जुटा पाते हैं। स्थानीय युवाओं को इस तरह का व्यावहारिक और उपयोगी प्रशिक्षण देकर उन्हें मुख्यधारा के रोजगार से जोड़ना अंततः ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ बनाने में एक बड़ा योगदान साबित हो सकता है।



















