शहरी घरों और आधुनिक फ्लैटों में हरियाली का शौक रखने वालों के सामने अक्सर जगह की कमी सबसे बड़ी रुकावट बन जाती है। बालकनी छोटी होना या आंगन का अभाव लोगों को मनचाहा बगीचा बनाने से रोक देता है। इस समस्या का व्यावहारिक समाधान वर्टिकल गार्डनिंग के रूप में सामने आया है, जहां जमीन या फर्श पर गमलों की कतार लगाने के बजाय घर की खाली दीवारों और छत का सदुपयोग किया जाता है। कम जगह में ज्यादा पौधे उगाने की यह तकनीक छोटे आशियानों को भी प्राकृतिक सुंदरता से भर देती है।
क्या है वर्टिकल गार्डनिंग और यह कैसे काम करती है
ऋषिकेश के अनुभवी गार्डनर राम सागर के अनुसार, जिन घरों में बागवानी के लिए खुला दायरा नहीं है, उनके लिए दीवार आधारित गार्डनिंग सबसे मुफीद व्यवस्था है। इस प्रक्रिया में जमीन घेरने वाले पारंपरिक गमलों के स्थान पर दीवारों पर विशेष ढांचे तैयार किए जाते हैं। धातु अथवा लकड़ी के मजबूत स्टैंड दीवार पर स्थापित किए जाते हैं, जिन पर छोटे आकार के गमले आसानी से टिकाए जा सकते हैं।
इसके अलावा दीवार पर सीधे कसे जाने वाले वॉल प्लांटर्स और छत या ग्रिल से लटकने वाले हैंगिंग पॉट्स का उपयोग भी व्यापक स्तर पर किया जाता है। इस व्यवस्था का सबसे बड़ा फायदा यह है कि एक ही दीवार पर विभिन्न किस्मों के कई पौधे एक साथ व्यवस्थित हो जाते हैं। फर्श पूरी तरह खाली रहता है, जिससे घर या बालकनी में आवाजाही बाधित नहीं होती और सीमित क्षेत्रफल में भी भरपूर हरियाली नजर आती है।
दीवारों पर कौन से पौधे, सब्जियां और हर्ब्स लगाएं
वर्टिकल गार्डन सिर्फ सजावटी पौधों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह रसोई की दैनिक जरूरतों को पूरा करने का माध्यम भी बन सकता है। गार्डनर राम सागर स्पष्ट करते हैं कि दीवार पर लगे छोटे कंटेनरों में स्नेक प्लांट, मनी प्लांट, पोथोस, फर्न और स्पाइडर प्लांट जैसी हवा को तरोताजा रखने वाली और देखने में आकर्षक किस्में आसानी से फलती-फूलती हैं।
रसोई में रोजाना काम आने वाले ताजे मसालों और औषधीय पौधों के तौर पर पुदीना, धनिया, तुलसी, अजवाइन और हरी मिर्च भी इन वर्टिकल ढांचों में उगाई जा सकती हैं। हरी पत्तेदार सब्जियों के शौकीन लोग पालक, मेथी और लेट्यूस की खेती कर सकते हैं। यदि आपके पास दीवार पर थोड़े बड़े साइज के प्लांटर्स लगाने की गुंजाइश है, तो उनमें टमाटर और रसीली स्ट्रॉबेरी के पौधे भी सफलतापूर्वक विकसित किए जा सकते हैं।
पौधों की नियमित देखभाल और सिंचाई के जरूरी नियम
वर्टिकल गार्डन स्थापित करने के बाद उसकी नियमित देखरेख बेहद अहम भूमिका निभाती है। गार्डनर राम सागर का कहना है कि पौधों के स्वस्थ विकास के लिए रोशनी का संतुलन समझना बुनियादी शर्त है। कुछ प्रजातियों को तेज धूप की आवश्यकता होती है, जबकि कई इनडोर या छायादार पौधे हल्की और छनी हुई रोशनी में बेहतर पनपते हैं। इसलिए दीवार का चयन करते समय वहां आने वाली धूप का ध्यान रखना चाहिए।
सिंचाई के मामले में विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है। गमलों में जरूरत से ज्यादा पानी देने से बचना चाहिए, क्योंकि जलभराव होने पर पौधों की जड़ें गलकर सड़ने लगती हैं। मिट्टी की ऊपरी परत छूकर देखें और जब वह सूखी महसूस हो, तभी पानी दें। समय-समय पर पौधों की पीली या सूखी पत्तियों को काटकर अलग करते रहें ताकि पोषण स्वस्थ शाखाओं तक पहुंचे। मिट्टी में हवा का संचार बनाए रखने के लिए हर कुछ दिनों में खुरपी से गुड़ाई करते रहें और जैविक पोषण के तौर पर नियमित अंतराल पर कंपोस्ट या वर्मी कंपोस्ट डालते रहें।
























