मणिपुर के कांगपोकपी जिले में तनाव की स्थिति बनी हुई है। यहां दो कुकी युवकों की निर्मम हत्या के विरोध में जारी विरोध प्रदर्शन को और तेज करते हुए बंद की अवधि 48 घंटे के लिए बढ़ा दी गई है। कमेटी ऑन ट्राइबल यूनिटी ने सरकारी मशीनरी पर निष्क्रियता और अब तक कोई ठोस कदम न उठाने का आरोप लगाते हुए यह फैसला लिया है। संगठन का साफ कहना है कि जब तक पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए धरातल पर सख्त कार्रवाई नहीं दिखती, तब तक विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा।
पड़ोसी जिले से बरामद हुए थे शव
इस पूरे मामले की शुरुआत तब हुई जब ताफौ कुकी गांव से बीते हफ्ते दो युवक अचानक लापता हो गए थे। परिजनों और स्थानीय लोगों द्वारा खोजबीन के बाद रविवार की सुबह पड़ोसी सेनापति जिले के एक पहाड़ी इलाके से दोनों के क्षत-विक्षत शव बरामद किए गए। युवकों की हत्या की खबर फैलते ही इलाके में भारी आक्रोश फैल गया। शव मिलने के तुरंत बाद कमेटी ऑन ट्राइबल यूनिटी ने रविवार से कांगपोकपी जिले में 24 घंटे के बंद का ऐलान किया था।
सरकारी रुख से नाराजगी, बंद का विस्तार
प्रारंभिक 24 घंटे का समय खत्म होने के बाद सोमवार को जारी एक आधिकारिक बयान में संगठन ने अपनी नाराजगी जाहिर की। संगठन ने आरोप लगाया कि प्रशासन इस गंभीर मामले में अनिर्णय, चुप्पी और विफलता का शिकार बना हुआ है। इसी के चलते बंद को अगले 48 घंटे के लिए और आगे बढ़ाने का निर्णय लिया गया। कुकी-जो समुदाय ने दो टूक शब्दों में कहा है कि वे केवल खोखले आश्वासनों को स्वीकार नहीं करेंगे, बल्कि दोषियों के खिलाफ एक निश्चित समय-सीमा के भीतर निर्णायक कार्रवाई चाहते हैं।
आवश्यक सेवाओं को मिली छूट
आम जनता की परेशानियों को ध्यान में रखते हुए बंद के दौरान कुछ महत्वपूर्ण सेवाओं को बंद के दायरे से बाहर रखा गया है। आयोजकों ने स्पष्ट किया है कि स्कूल, चिकित्सा सुविधाएं और अस्पताल, मीडिया से जुड़े कामकाज और हवाई अड्डे तक की यात्रा करने वाले यात्रियों को इस बंद से पूरी तरह छूट रहेगी ताकि जरूरी गतिविधियों में कोई बाधा न पहुंचे।
जातीय तनाव और हिंसा का दर्दनाक इतिहास
राज्य में हिंसा और अशांति का यह पहला मामला नहीं है। इसी साल फरवरी में कुकी और नगा समुदायों के बीच भड़की जातीय झड़पों के बाद से अब तक 50 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है, जबकि दर्जनों घरों को आग के हवाले कर दिया गया। यह झड़पें तमेंगलोंग, नोने, कामजोंग, उखरुल और कांगपोकपी जिलों में फैली थीं। इससे पहले मई 2023 में घाटी में रहने वाले मैतेई और पहाड़ी इलाकों के कुकी समुदाय के बीच बड़े पैमाने पर जातीय हिंसा भड़की थी। उस भयानक संघर्ष में 300 से अधिक लोगों की जान चली गई थी, 49 लोग लापता हो गए थे और हजारों नागरिकों को अपना घर-बार छोड़कर विस्थापित होना पड़ा था।



















