उत्तराखंड की धर्मनगरी हरिद्वार स्थित चंडी घाट पर उत्तर प्रदेश के पीलीभीत जिले से आए एक परिवार ने सनातन धर्म के प्रति अपनी निष्ठा व्यक्त करते हुए घर वापसी की। पीलीभीत निवासी माहिद अपनी पत्नी सबीना और अपने तीन बच्चों को लेकर हरिद्वार पहुंचे, जहां पवित्र गंगा तट पर वैदिक विधि-विधान, गंगा पूजन और हवन यज्ञ के जरिए उन्होंने पूरे परिवार सहित हिंदू धर्म स्वीकार कर लिया। तीर्थ सेवा न्यास के संत रामविशाल दास के सान्निध्य और प्रेरणा से इस धार्मिक अनुष्ठान का आयोजन किया गया।
चंडी घाट पर वैदिक रीति-रिवाजों से हुआ अनुष्ठान
गुरुवार के दिन आयोजित इस अनुष्ठान में परिवार के सभी सदस्यों ने भाग लिया। कार्यक्रम की शुरुआत पवित्र गंगा नदी में स्नान के साथ हुई, जिसके बाद तट पर विशेष हवन और पूजा-अर्चना संपन्न कराई गई। धार्मिक रीति-रिवाजों को पूरा कराने के साथ-साथ परिवार का नामकरण संस्कार भी विधिपूर्वक किया गया। इस प्रक्रिया के तहत माहिद का नया नाम मोहित रखा गया, जबकि उनकी पत्नी सबीना का नाम बदलकर खुशी तय हुआ।
स्वेच्छा से सनातन धर्म अपनाने का दिया बयान
धार्मिक विधि पूरी होने के उपरांत बात करते हुए मोहित ने स्पष्ट किया कि उन्होंने यह निर्णय पूरी तरह अपनी अंतरात्मा और स्वेच्छा से लिया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि उन पर किसी भी प्रकार का कोई दबाव या प्रभाव नहीं डाला गया था। उन्होंने बताया कि सनातन धर्म के भीतर मौजूद गहरा सम्मान, उदारता और दयाभाव उन्हें हमेशा से प्रभावित करते रहे हैं, जिसकी वजह से उन्होंने परिवार संग इस परंपरा को अंगीकार किया।
लंबे समय से घर में मना रहे थे त्योहार
उनकी पत्नी सबीना उर्फ खुशी ने इस बदलाव की पृष्ठभूमि साझा करते हुए बताया कि उनका परिवार काफी समय से हिंदू रीति-रिवाजों और त्योहारों को अपने दैनिक जीवन में अपनाता आ रहा था। उन्होंने कहा कि सनातन परंपरा के बीच उन्हें आत्मिक शांति का अनुभव होता है, इसी भाव से प्रेरित होकर उन्होंने अपने बच्चों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए हरिद्वार आकर घर वापसी करने का मार्ग चुना।
संत रामविशाल दास ने दी जानकारी
तीर्थ सेवा न्यास के संत रामविशाल दास ने पूरे घटनाक्रम पर जानकारी देते हुए कहा कि परिवार ने स्वेच्छा से सनातन धर्म के सिद्धांतों को समझा और सोच-विचार कर वापसी का कदम उठाया। उन्होंने बताया कि गंगा स्नान और वैदिक हवन यज्ञ के उपरांत परिवार के सभी सदस्यों का विधिवत नामकरण संस्कार संपन्न कराया गया, जिससे वे औपचारिक रूप से इस धार्मिक धारा से जुड़ गए।





















