उत्तराखंड का चर्चित जिम कॉर्बेट टाइगर रिजर्व अपनी समृद्ध जैव विविधता के लिए पूरी दुनिया में जाना जाता है, जहां अब वन्यजीवों की सूची में एक नया नाम जुड़ गया है। रिजर्व के दायरे में आने वाली बिजरानी रेंज के भीतर पहली बार एक हाइना यानी लकड़बग्घे की मौजूदगी दर्ज की गई है। इस दुर्लभ घटना के सामने आने के बाद से ही पर्यावरण प्रेमियों और वन्यजीव विशेषज्ञों के बीच भारी रोमांच और चर्चा का माहौल बन गया है। वन विभाग के अमले को यह अनोखा जीव तब दिखाई दिया जब कर्मी अंधेरा होने के बाद अपनी नियमित गश्त पूरी करके वापस लौट रहे थे। इस जीव की स्पष्ट तस्वीर सामने आने के बाद महकमे ने इसकी गतिविधियों को गहराई से समझने के लिए विशेष तकनीकी इंतजाम करने का मन बना लिया है।
सोशल मीडिया पर साझा की गई तस्वीर
कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के निदेशक डॉ. साकेत बडोला ने इस अनोखे वन्यजीव की तस्वीर को अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर सार्वजनिक किया है। बिजरानी क्षेत्र में इस शिकारी जानवर के मिलने से उन लोगों की धड़कनें तेज हो गई हैं जो इस संरक्षित क्षेत्र के भीतर पलने वाले जीवों पर गहरी नजर रखते हैं। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या आने वाले दिनों में भी यह जीव इसी इलाके के आसपास मंडराता हुआ नजर आएगा या नहीं। हालांकि इससे पहले कॉर्बेट के इस खास हिस्से में कभी भी इस प्रजाति की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई थी, इसलिए इस बात की तस्दीक करने के लिए लगातार साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं कि यह यहां का स्थाई मेहमान है या किसी अन्य क्षेत्र से भटककर यहां पहुंचा है।
बाघों के गढ़ के रूप में है पहचान
यह संरक्षित वन क्षेत्र मुख्य रूप से बाघों की सुरक्षित आबादी के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शोहरत बटोर चुका है। यहाँ की जलवायु और घने जंगल हाथियों, तेंदुओं के अलावा अनगिनत प्रजाति के पक्षियों और अन्य वन्यजीवों को प्राकृतिक आवास प्रदान करते हैं। इस रिजर्व के भीतर मौजूद जीवन की यह विशाल विविधता इसे देश के सबसे महत्वपूर्ण आरक्षित जंगलों में शामिल करती है। ऐसे में बिजरानी के जंगलों में अचानक लकड़बग्घे का दिख जाना इस बात का प्रमाण है कि इस पारिस्थिकी तंत्र में और भी कई रहस्य छिपे हो सकते हैं। आम पर्यटकों और वन्यजीव प्रेमियों के लिए यह दृश्य किसी रोमांचक तोहफे से कम नहीं है, जबकि वन कर्मियों के लिए यह शोध और सुरक्षा का एक नया विषय बन गया है।
कैमरा ट्रैप के जरिए होगी गतिविधियों की निगरानी
इस अनपेक्षित जीव के सामने आने के बाद वन विभाग ने इलाके में रणनीतिक रूप से कैमरा ट्रैप स्थापित करने की पूरी तैयारी कर ली है। इन स्वचालित कैमरों की मदद से यह समझने में आसानी होगी कि यह जानवर किस रास्ते से आता है और इस विशेष ज़ोन में कितनी बार अपनी उपस्थिति दर्ज कराता है। कैमरों से मिलने वाले डिजिटल साक्ष्य इसकी आवाजाही के पैटर्न और व्यवहार को डिकोड करने में बेहद मददगार साबित होंगे। शुरुआती जानकारियों के मुताबिक इस जीव को अकेले घूमते हुए देखा गया है, लेकिन यह कितने वक्त से इस क्षेत्र में सक्रिय है, इसका सही अंदाजा लगातार मॉनिटरिंग के बाद ही लगाया जा सकेगा।
तराई पश्चिमी वन प्रभाग से भी जुड़े हैं तार
दिलचस्प बात यह है कि इससे पहले भी उत्तराखंड के तराई पश्चिमी वन प्रभाग के भीतर इस तरह के जीव के देखे जाने की खबरें सामने आ चुकी हैं। अब कॉर्बेट के भीतर इस प्रजाति की दस्तक ने इस बात को बल दिया है कि राज्य के इन जंगलों में इनकी आवाजाही बढ़ रही है। इन तमाम पहलुओं की तस्दीक करने के लिए ही विभाग द्वारा उन्नत तकनीक का सहारा लिया जा रहा है ताकि यह साफ हो सके कि यह प्राणी केवल इत्तेफाक से इस तरफ आया था या इस भूभाग में इसका नियमित बसेरा बन चुका है।
























