उत्तराखंड के नैनीताल जिले में पुलिस महकमे के भीतर अनुशासनहीनता और गंभीर कदाचार का एक बेहद चौंकाने वाला मामला प्रकाश में आया है। पुलिस बल में पदानुक्रम और अनुशासन को प्राथमिक आधार माना जाता है, जहां कनिष्ठ कर्मी अपने वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशों का अक्षरशः पालन करते हैं। हालांकि, नैनीताल में सामने आई इस हालिया घटना ने सुरक्षा तंत्र की आंतरिक कार्यप्रणाली और अधिकारियों की गरिमा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हल्द्वानी सर्किल में कार्यरत एक महिला उपनिरीक्षक के साथ स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप यानी एसओजी में तैनात एक सिपाही द्वारा अभद्रता, गाली-गलौज, मारपीट और हथियार तानने के संगीन आरोप लगे हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए उच्चाधिकारियों ने आरोपी सिपाही को निलंबित कर दिया है और पूरे मामले की विस्तृत विभागीय जांच शुरू कर दी गई है।
कोतवाली परिसर में विवाद और हाथापाई की पूरी घटना
यह अप्रिय घटना नैनीताल कोतवाली परिसर के भीतर महिला हेल्प डेस्क के पास घटित हुई। प्राप्त जानकारी के अनुसार, सुबह के समय एसओजी में तैनात सिपाही अनिल गिरी और हल्द्वानी सर्किल में चौकी प्रभारी के पद पर पदस्थ महिला उपनिरीक्षक के बीच किसी बात को लेकर कहासुनी शुरू हुई। प्रत्यक्षदर्शियों और दर्ज कराई गई शिकायत के विवरण के अनुसार, दोनों के बीच बहस कुछ ही पलों में काफी तीखी हो गई। विवाद बढ़ने पर सिपाही ने अपना आपा खो दिया और उसने महिला उपनिरीक्षक पर हाथ उठाते हुए जोरदार थप्पड़ जड़ दिया। इतना ही नहीं, आरोप है कि इसके तुरंत बाद सिपाही ने अपनी सरकारी पिस्तौल निकाल ली और महिला अधिकारी की कनपटी पर तान दी। थाने जैसे सुरक्षित और सार्वजनिक परिसर में घटी इस हरकत से मौके पर मौजूद अन्य पुलिसकर्मियों में भारी अफरातफरी मच गई।
वरिष्ठ अधिकारियों के हस्तक्षेप के बाद निलंबन की कार्रवाई
घटना के तुरंत बाद पीड़ित महिला उपनिरीक्षक ने अपने साथ हुए दुर्व्यवहार की पूरी जानकारी उच्चाधिकारियों को दी। सिपाही अनिल गिरी के विरुद्ध 11 अक्टूबर को नैनीताल के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक मंजूनाथ टीसी से औपचारिक शिकायत की गई थी। शिकायत मिलने के प्रारंभिक चरण में प्रशासनिक कदम उठाते हुए सिपाही को एसओजी की शाखा से हटाकर नैनीताल कोतवाली में स्थानांतरित कर दिया गया था। हालांकि, पीड़ित अधिकारी इस स्थानांतरण से संतुष्ट नहीं थीं और उन्होंने स्पष्ट किया कि एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी पर कनिष्ठ कर्मी द्वारा किए गए इस जानलेवा हमले और अपमान पर कठोर दंडात्मक कदम उठाए जाने चाहिए। इसके बाद महिला उपनिरीक्षक ने पुलिस कप्तान और पुलिस महानिरीक्षक से प्रत्यक्ष मुलाकात की और मामले में प्राथमिकी दर्ज कर विधिक कार्रवाई की मांग रखी। बताया गया कि पीड़िता ने थाने के भीतर लगे सीसीटीवी कैमरों की रिकॉर्डिंग भी वरिष्ठ अधिकारियों को दिखाई, जिसमें मारपीट की घटना साफ तौर पर दिखाई दे रही थी। इस अकाट्य साक्ष्य के सामने आने के बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने आरोपी सिपाही अनिल गिरी को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने का आदेश जारी किया।
शिकायत पत्र में दर्ज धमकियों और उत्पीड़न का सिलसिलेवार ब्योरा
कोतवाली प्रभारी को सौंपे गए अपने विस्तृत शिकायत पत्र में महिला चौकी प्रभारी ने उन परिस्थितियों का सिलसिलेवार विवरण प्रस्तुत किया है, जिसके कारण यह अप्रिय स्थिति उत्पन्न हुई। शिकायत के अनुसार, 10 अक्टूबर 2026 की दोपहर करीब 3 बजकर 15 मिनट पर एसओजी कर्मी अनिल गिरी ने अपने निजी मोबाइल नंबर से महिला उपनिरीक्षक के फोन पर कॉल किया था। बातचीत के दौरान सिपाही ने बेहद अशोभनीय, अश्लील और अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल करते हुए उनके साथ गाली-गलौज की। शिकायत में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि सिपाही ने महिला अधिकारी की व्यक्तिगत और पेशेवर गरिमा को गहरी ठेस पहुंचाई। सिपाही ने उन्हें, उनके पति और उनके बच्चों को जान से मारने की खुली धमकी भी दी। उसने फोन पर यह भी कहा कि वह महज पांच मिनट के भीतर पुलिस चौकी पहुंच रहा है। सिपाही के इस आक्रामक रवैये के बाद महिला उपनिरीक्षक अपने और अपने परिवार की सुरक्षा को लेकर गहरे तनाव में आ गईं। उन्होंने उसी दिन यानी 10 अक्टूबर को ही वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक नैनीताल को लिखित प्रारूप, मौखिक तौर पर और व्हाट्सएप संदेश के जरिए पूरे प्रकरण की जानकारी दी थी।
ड्यूटी के दौरान दोबारा दबाव और हथियार से धमकाने का प्रकरण
शिकायत पत्र में आगे उल्लेख किया गया है कि 11 अक्टूबर को महिला उपनिरीक्षक को एक परीक्षा आयोजन के दौरान पुलिस सेक्टर अधिकारी के दायित्व पर तैनात किया गया था। वह सुबह 6 बजे से ही अपने निर्धारित कर्तव्य स्थल पर ड्यूटी दे रही थीं। आरोप है कि इसी दौरान सिपाही अनिल गिरी ने एसओजी के आधिकारिक सीयूजी मोबाइल नंबर से महिला अधिकारी के निजी फोन पर दोबारा कॉल किया। फोन पर सिपाही ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक से शिकायत करने को लेकर नाराजगी जाहिर की और उस पर आपत्ति जताते हुए महिला अधिकारी से तीखे सवाल पूछे। सिपाही ने एक बार फिर उन्हें गंभीर परिणाम भुगतने की धमकियां दीं। शिकायत के अनुसार, इसके बाद जब दोनों का कोतवाली परिसर में आमना-सामना हुआ, तो सिपाही ने बहस के दौरान महिला अधिकारी पर पिस्तौल तान दी। महिला चौकी प्रभारी की शिकायत के आधार पर पुलिस के आधिकारिक तंत्र ने जांच प्रक्रिया को आगे बढ़ाया है, जबकि विभिन्न आरोपों के संबंध में स्वतंत्र तकनीकी एवं गवाह-आधारित साक्ष्यों की पुष्टि की जा रही है।
तबादला आदेशों की अवहेलना और एसओजी में तैनाती पर उठे सवाल
इस पूरे मामले ने एसओजी में सिपाही अनिल गिरी की लगातार बनी रही तैनाती पर भी गंभीर प्रशासनिक प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं। उपलब्ध प्रशासनिक विवरणों के अनुसार, पूर्व में मारपीट से जुड़े एक अन्य मामले में पुलिस मुख्यालय स्तर पर कराई गई जांच के उपरांत अनिल गिरी और एसओजी के कुछ अन्य कर्मियों का स्थानांतरण कुमाऊं रेंज से हटाकर गढ़वाल रेंज में कर दिया गया था। पुलिस मुख्यालय द्वारा स्पष्ट तबादला आदेश जारी किए जाने के बावजूद संबंधित कर्मियों को जिले से कार्यमुक्त नहीं किया गया था। वे आदेशों की अनदेखी करते हुए नैनीताल जिले के एसओजी दस्ते में ही लगातार अपनी सेवाएं दे रहे थे। मुख्यालय के स्पष्ट आदेश के बाद भी संबंधित पुलिसकर्मियों को रिलीव न किए जाने की बात सामने आने से प्रशासनिक अनुशासन और वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशों के क्रियान्वयन को लेकर विभाग की जवाबदेही पर सवाल उठना स्वाभाविक माना जा रहा है।
पुलिस बल में महिला कर्मियों की सुरक्षा और पूर्व के मामले
नैनीताल जिले में वर्दीधारी महिला कर्मियों के साथ कनिष्ठ कर्मचारियों द्वारा अभद्रता का यह कोई पहला प्रसंग नहीं है। जिले में इससे पहले भी एक अन्य महिला चौकी प्रभारी के साथ एक सिपाही द्वारा मारपीट और बदसलूकी किए जाने का मामला सामने आया था। हालांकि, उस प्रकरण में कोई औपचारिक प्राथमिकी दर्ज होने की पुष्टि नहीं हुई थी और प्रशासनिक स्तर पर संबंधित आरोपी सिपाही का स्थानांतरण सीमांत जिले पिथौरागढ़ में कर दिया गया था। बार-बार सामने आ रहे ऐसे मामलों ने पुलिस विभाग के भीतर महिला अधिकारियों की कार्यस्थल पर सुरक्षा, शिकायतों के प्रति त्वरित प्रशासनिक जवाबदेही और विभागीय नियमों के कड़ाई से पालन पर एक व्यापक विमर्श छेड़ दिया है। वर्तमान मामले में महिला चौकी प्रभारी द्वारा उठाए गए कदमों के बाद विभाग में आंतरिक जांच जारी है, जिससे पूरे घटनाक्रम की सत्यता और आगे की कानूनी कार्यवाही का मार्ग तय होगा।






















