उत्तराखंड में वर्ष 2027 में होने वाले विधानसभा चुनावों के मद्देनजर प्रशासनिक और राजनीतिक हलचल काफी तेज हो गई है। राज्य के चुनावी माहौल को सुचारू रूप से आगे बढ़ाने के लिए निर्वाचन विभाग ने कमर कस ली है और मतदाता सूचियों के पुनरीक्षण को लेकर एक बड़ा प्रशासनिक अपडेट साझा किया है। आगामी बारह नवंबर को राज्य की नई मतदाता सूची का आधिकारिक प्रकाशन किया जाएगा, जिससे चुनावों से जुड़ी आगामी प्रक्रिया को और स्पष्टता मिलेगी।
इस पूरे घटनाक्रम की रूपरेखा तैयार करने के लिए मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. बीवीआरसी पुरुषोत्तम ने मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय राजनीतिक दलों के वरिष्ठ प्रतिनिधियों के साथ एक अहम उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता की। इस विचार-विमर्श के दौरान भारत निर्वाचन आयोग द्वारा तय किए गए मानकों और दिशा-निर्देशों के तहत आगामी चुनावी तैयारियों के हर पहलू पर गहन चर्चा की गई, जिसमें मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण का मुद्दा सबसे प्रमुख रहा।
प्रशासनिक स्तर पर पारदर्शिता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से राज्य के सभी जिलों में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन यानी ईवीएम और वोटर वेरिफाइड पेपर ऑडिट ट्रेल यानी वीवीपैट मशीनों की प्रथम स्तरीय जांच की प्रक्रिया आरंभ कर दी गई है। इस तकनीकी और संवेदनशील प्रक्रिया में राजनीतिक दलों के अधिकृत नुमाइंदों को भी विशेष तौर पर साझीदार बनाया गया है ताकि पूरी चुनावी व्यवस्था पूरी तरह निष्पक्ष, पारदर्शी और भरोसेमंद बनी रहे।
विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण अभियान के जरिए उन युवा मतदाताओं को भी जोड़ने का पूरा मौका दिया जा रहा है जो एक जनवरी 2027 तक अठारह वर्ष की आयु पूरी कर लेंगे। ये युवा मतदाता सूची में अपना नाम शामिल कराने के लिए वैध आवेदन प्रस्तुत कर सकेंगे। निर्वाचन विभाग के अनुसार बारह नवंबर को ड्राफ्ट सूची सामने आने के बाद आम नागरिक मतदाता सूची में नए नाम जुड़वाने, पुराने नाम हटवाने या किसी भी प्रकार की त्रुटि में संशोधन के लिए अपनी आपत्तियां और दावे दर्ज करा सकेंगे। हाल ही में चले इस विशेष अभियान के अंतर्गत नए नाम दर्ज कराने के लिए फॉर्म-6 के तहत कुल 1,00,744 आवेदन प्राप्त हो चुके हैं।
























