उत्तराखंड के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल नैनीताल की सड़कों पर इन दिनों नगर पालिका के कुछ ऐसे वाहनों का संचालन हो रहा है, जिन्हें लेकर स्थानीय निवासियों और व्यापारियों ने गंभीर आपत्तियां दर्ज कराई हैं। शहर की सड़कों पर बिना नंबर प्लेट और बिना स्पष्ट फिटनेस प्रमाणपत्र के दौड़ती इन गाड़ियों की स्थिति को लेकर आम जनता में नाराजगी साफ देखने को मिल रही है। लोगों का कहना है कि जहां यातायात नियमों का उल्लंघन करने पर आम नागरिकों के खिलाफ तुरंत सख्त कार्रवाई की जाती है, वहीं सरकारी विभागों की गाड़ियों में बरती जा रही इन अनियमितताओं पर जिम्मेदार अधिकारी पूरी तरह से आंखें मूंदे बैठे हैं। इन जर्जर वाहनों के सड़कों पर इस तरह बेधड़क घूमने से किसी भी समय बड़े सड़क हादसों की आशंका बनी रहती है, जिससे सुरक्षा व्यवस्था पर भी बड़े सवाल खड़े हो रहे हैं।
स्थानीय स्तर पर बढ़ रही है चिंता और नाराजगी
शहर के निवासियों और कारोबारियों ने नगर पालिका के इन खस्ताहाल वाहनों की हालत पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए संबंधित महकमों से तत्काल प्रभाव से जांच कराने और उचित कदम उठाने की पुरजोर मांग की है। दूसरी ओर, नगर पालिका प्रशासन ने भी इस समस्या को स्वीकार करते हुए अपनी स्थिति स्पष्ट की है। अधिकारियों का यह कहना है कि पुराने और जर्जर हो चुके वाहनों के कारण यह दिक्कत आ रही है। हालांकि, राहत की बात यह है कि नए वाहनों के बेड़े को शामिल करने के लिए शासन स्तर पर प्रस्ताव भेजा गया था, जिसे अब मंजूरी मिल चुकी है और प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।
दस्तावेजों और नंबर प्लेट का अभाव
नागरिकों का मुख्य आरोप यह है कि शहर में साफ-सफाई और कचरा उठाने जैसे अहम कार्यों में इस्तेमाल होने वाली नगर पालिका की कई गाड़ियों की हालत बेहद दयनीय हो चुकी है। कई वाहनों पर आगे या पीछे नंबर प्लेट तक नहीं लगी हुई है, जबकि उनके वैध फिटनेस और बीमा से जुड़े जरूरी कागजातों की स्थिति भी पूरी तरह से संदिग्ध बनी हुई है। ऐसी स्थिति में यदि कोई अप्रिय हादसा हो जाता है, तो दुर्घटना के लिए जवाबदेही तय करना और पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा दिलाना बेहद मुश्किल साबित हो सकता है। आम जनता का यह तर्क है कि यदि किसी आम नागरिक के वाहन के दस्तावेज थोड़े भी अधूरे मिलते हैं, तो पुलिस विभाग द्वारा भारी चालान और जब्ती जैसी सख्त कार्रवाई की जाती है। इसी तर्ज पर सरकारी महकमों की गाड़ियों की भी नियमित और पारदर्शी जांच होनी चाहिए ताकि सुरक्षा के तय मानकों का शत-प्रतिशत पालन सुनिश्चित किया जा सके।
खुर्शीद हुसैन ने रखी अपनी बात
नैनीताल के स्थानीय निवासी खुर्शीद हुसैन ने इस पूरे मामले पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए नगर पालिका के इन वाहनों की दशा पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि वह शहर की साफ-सफाई संभालने वाले सभी कर्मियों के कार्य का पूरा सम्मान करते हैं, लेकिन प्रशासन को उन गाड़ियों की स्थिति पर भी संजीदा होना चाहिए जिनका उपयोग कचरा ढोने के लिए किया जाता है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि बिना उचित फिटनेस वाले ऐसे जर्जर वाहन से कोई दुर्घटना होती है, तो बीमा क्लेम या मुआवजे को लेकर पीड़ित को अनगिनत परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।
उन्होंने आगे कहा कि कचरा उठाने वाली ये गाड़ियां कई बार काफी तेज रफ्तार में दौड़ती हुई नजर आती हैं, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। खुर्शीद हुसैन ने अतीत में जल संस्थान के एक टैंकर से हुई दुर्घटना का हवाला देते हुए कहा कि ऐसी पुरानी घटनाओं से सबक लेना बेहद जरूरी है ताकि भविष्य में कोई बड़ी अनहोनी न हो। उनके अनुसार, सड़कों पर दौड़ते ये जर्जर वाहन पूरे शहर की छवि पर भी एक नकारात्मक प्रभाव डालते हैं।
व्यापार मंडल अध्यक्ष की अपील
मां नयना मैया व्यापार मंडल के अध्यक्ष और स्थानीय कारोबारी पुनीत टंडन ने भी नगर पालिका के इन पुराने वाहनों के संचालन को लेकर कड़ा ऐतराज जताया है। उन्होंने कहा कि इन गाड़ियों को सड़कों पर चलते हुए देखना ही किसी खतरे से कम नहीं लगता है और इनसे हर समय हादसे की आशंका बनी रहती है। उनके अनुसार, कई गाड़ियां अपनी मियाद पूरी कर चुकी हैं और उनकी नंबर प्लेट तथा फिटनेस को लेकर भी गंभीर संशय की स्थिति बनी हुई है।
पुनीत टंडन ने अपनी बात रखते हुए कहा कि यातायात के नियम शहर के हर एक नागरिक और विभाग के लिए एक समान होने चाहिए। यदि किसी सरकारी वाहन की चपेट में आने से कोई दुर्घटना घटती है, तो उसके बीमा, कानूनी जिम्मेदारी और पीड़ित को मिलने वाले मुआवजे जैसे पहलुओं को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। उन्होंने यह भी बताया कि सरकारी विभागों के सभी वाहनों की फिटनेस समय पर सुनिश्चित करवाने के लिए वह पहले ही नैनीताल के जिलाधिकारी को एक लिखित पत्र भी सौंप चुके हैं। हालांकि, उनके मुताबिक इस दिशा में अब तक कोई ठोस और अपेक्षित कार्रवाई देखने को नहीं मिली है, जिसके कारण उन्होंने प्रशासन से जल्द से जल्द गहन जांच कराकर उचित कदम उठाने का आग्रह किया है।
नगर पालिका के अधिशासी अभियंता रोहिताश शर्मा ने इस पूरे मामले पर सफाई देते हुए बताया कि वर्ष 2006 और 2007 के दौरान ए टू जेड कंपनी के जरिए इन वाहनों की खरीद की गई थी। उनके अनुसार, ये सभी वाहन मूल रूप से उसी कंपनी के नाम पर पंजीकृत थे और उन पर व्यावसायिक नंबर प्लेटें लगाई गई थीं। उन्होंने खुलकर यह स्वीकार किया कि पूरे पर्यटन सीजन के दौरान नगर पालिका को इन्हीं पुराने और खस्ताहाल वाहनों के भरोसे ही अपना कामकाज चलाना पड़ा था।
अधिशासी अभियंता ने आगे जानकारी दी कि नए वाहनों की खरीद के लिए एक विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार कर शासन को भेजी गई थी, जिसे अब स्वीकृति प्राप्त हो चुकी है। इस योजना के तहत पहली किस्त भी विभाग को मिल चुकी है। उनके अनुसार, अब बहुत जल्द 12 नए वाहनों की खरीद के लिए टेंडर प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का काम शुरू किया जाएगा। उन्होंने उम्मीद जताई है कि आगामी पर्यटन सीजन की शुरुआत होने से पहले ही यह टेंडर प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी और सड़कों पर नए वाहन दौड़ने लगेंगे।



















