उत्तराखंड के नैनीताल शहर में विजयादशमी का पर्व बेहद धूमधाम और उल्लास के साथ मनाया गया। दशमी के इस पावन अवसर पर सर्बजनिन दुर्गा पूजा कमेटी की देखरेख में मां दुर्गा की एक भव्य और विशाल शोभायात्रा निकाली गई, जिसने पूरे शहर के धार्मिक माहौल को और अधिक जीवंत बना दिया। मां नयना देवी मंदिर में पूरी विधि-विधान के साथ विशेष पूजा-अर्चना संपन्न होने के बाद, माता का पवित्र डोला नगर भ्रमण के लिए रवाना हुआ। इस दौरान सड़क के दोनों ओर और छतों पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे, जिन्होंने पूरे रास्ते मां के जयकारे लगाकर वातावरण को गुंजायमान कर दिया। पूरे नैनीताल में इस समय गजब का उत्साह और भक्ति का माहौल देखने को मिल रहा था, जहां हर कोई इस धार्मिक अनुष्ठान का हिस्सा बनने के लिए उत्सुक नजर आ रहा था।
फूलों की वर्षा और पारंपरिक संस्कृति का अद्भुत मेल
जब मां दुर्गा की यह शोभायात्रा मां नयना देवी मंदिर परिसर के बाहर पहुंची, तो वहां मौजूद भक्तों ने पुष्प वर्षा करके माता का बेहद भव्य स्वागत किया। श्रद्धालुओं ने अपनी श्रद्धा के अनुसार फूल अर्पित किए और अपने परिवार की सुख-समृद्धि के लिए मां से प्रार्थना की। माता के दर्शन पाने के लिए लोगों का तांता लगा रहा और भारी भीड़ मंदिर व मार्ग के आसपास डटी रही। पारंपरिक रीति-रिवाजों और धार्मिक मान्यताओं के बीच यह दृश्य दशमी के इस पूरे उत्सव का सबसे बड़ा और खास आकर्षण साबित हुआ, जिससे पूरा वातावरण पूरी तरह से भक्तिमय हो गया। इस शोभायात्रा की एक और बड़ी विशेषता बंगाली धार्मिक परंपरा और कुमाऊंनी लोक संस्कृति का अनूठा संगम थी, जो नैनीताल की सांस्कृतिक विविधता को बहुत खूबसूरती से बयां कर रही थी।
छोलिया नृत्य और स्कूली बच्चों की झांकियों ने खींचा ध्यान
इस दुर्गा महोत्सव की शोभायात्रा के दौरान जगह-जगह भजन मंडलियों ने अपनी सुंदर प्रस्तुतियां दीं, लेकिन सबसे ज्यादा ध्यान कुमाऊंनी छोलिया नृत्य ने अपनी ओर खींचा। पारंपरिक और रंग-बिरंगी वेशभूषा में सजे कलाकारों ने अपनी ऊर्जावान प्रस्तुतियों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। भक्ति गीतों की धुनों और गगनभेदी जयकारों के बीच यह शोभायात्रा लगातार आगे बढ़ती रही। इसके साथ ही, शोभायात्रा में शामिल स्कूली बच्चों की मनमोहक झांकियों ने इस उत्सव की रौनक में चार चांद लगा दिए। बच्चों ने अपनी इन कलात्मक प्रस्तुतियों के माध्यम से प्राचीन धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं की जीवंत झलक पेश की। इस अद्भुत नजारे को देखने पहुंचे दर्शकों ने बच्चों का उत्साहवर्धन किया, जहां बच्चों ने मां दुर्गा, भगवान शिव और अन्य पौराणिक रूपों को सजीव किया था। इस प्रकार नवरात्र और दशहरे के इन आयोजनों ने नई पीढ़ी को उनकी जड़ों और संस्कृति से जुड़ने का एक बेहतरीन अवसर प्रदान किया।
मल्लीताल के डीएसए मैदान में राम-रावण युद्ध का मंचन
शाम के समय विजयदशमी के मुख्य आकर्षण के तहत मल्लीताल स्थित डीएसए मैदान में श्रीराम सेवक सभा की ओर से आयोजित रामलीला के मंचन में राम-रावण युद्ध का सजीव चित्रण किया गया। इस महायुद्ध को देखने के लिए शहर और आसपास के इलाकों से भारी संख्या में लोग डीएसए मैदान पहुंचे थे। मंच पर कलाकारों द्वारा बोले गए प्रभावशाली संवादों और युद्ध के रोमांचक दृश्यों ने दर्शकों के उत्साह को सातवें आसमान पर पहुंचा दिया। दर्शकों ने तालियां बजाकर और नारे लगाकर कलाकारों का जमकर हौसला बढ़ाया। इस शानदार मंचन के माध्यम से भगवान श्रीराम की अधर्म पर विजय के प्रसंग को इस तरह जीवंत कर दिया गया कि हर कोई उसमें तल्लीन नजर आया।
रावण दहन और आतिशबाजी से जगमगा उठा आसमान
रामलीला में भगवान श्रीराम की विजय सुनिश्चित होने के बाद डीएसए मैदान में रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के विशाल पुतलों के दहन की प्रक्रिया शुरू हुई। जैसे ही इन पुतलों में आग की लपटें पहुंचीं और वे धू-धू कर जलने लगे, पूरा मैदान जय श्रीराम के गगनभेदी नारों से गूंज उठा। इस ऐतिहासिक क्षण को अपनी आंखों से देखने के लिए मैदान में भारी जनसैलाब उमड़ पड़ा था। विजयदशमी के इस पवित्र आयोजन ने एक बार फिर समाज को बुराई पर अच्छाई और असत्य पर सत्य की हमेशा होने वाली जीत का गहरा संदेश दिया। रावण दहन के इस पल को और अधिक यादगार बनाने के लिए मैदान में भव्य आतिशबाजी का प्रदर्शन किया गया, जिससे नैनीताल का रात का आसमान रंग-बिरंगी रोशनी से पूरी तरह जगमगा उठा। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक हर वर्ग के लोगों में दशहरे को लेकर भारी उत्साह देखा गया, और परिवारों के साथ पहुंचे लोगों ने इस उत्सव का भरपूर आनंद लिया।


















