हिमालय की दुर्गम चोटियों के बीच बसे केदारताल मार्ग पर अचानक मौसम बिगड़ने से बड़ा संकट खड़ा हो गया है। गंगोत्री से अपनी यात्रा शुरू करने वाले एक अभियान दल के आठ सदस्य भारी बर्फबारी और बर्फीले तूफान की चपेट में आकर रास्ता भटक गए। लापता लोगों में पश्चिम बंगाल के बांकुरा के पांच पर्वतारोही, उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के दो युवक और उत्तराखंड के उत्तरकाशी का एक स्थानीय सदस्य शामिल है। चार हजार मीटर की ऊंचाई पर स्थित इस बीहड़ पर्वतीय इलाके में बचाव एजेंसियां लगातार खोजबीन में जुटी हुई हैं।
लापता पर्वतारोहियों की पहचान और पृष्ठभूमि
बांकुरा जिले से ताल्लुक रखने वाले पांचों युवकों की शिनाख्त मनोज खवास, रिंटू मंडल, रतन घोष, तापस बाउरी और उदय घोष के तौर पर की गई है। इनमें से मनोज केशरा गांव के निवासी हैं, जबकि बाकी चार युवक सालबानी इलाके के रहने वाले हैं। यह समूह 24 अक्टूबर को बंगाल से रवाना हुआ था और इनकी योजना नवंबर के शुरुआती दिनों में सुरक्षित घर लौटने की थी। पहाड़ों में प्रवेश के शुरुआती दिनों तक परिजनों से इनकी लगातार फोन पर बात हो रही थी, मगर विगत दो-तीन दिनों से सभी के मोबाइल बंद आने से परिजन भारी दहशत और चिंता में हैं।
12 सदस्यों का दल और हादसे का घटनाक्रम
इस पूरे पर्वतारोहण दल में कुल 12 लोग शामिल थे, जिनमें चार शेरपा और एक सहायक भी मौजूद थे। दल ने अपने तय कार्यक्रम के अनुसार बेस कैंप से चढ़ाई की शुरुआत की थी। लगभग 4,000 मीटर की ऊंचाई पार करते ही मौसम ने अप्रत्याशित करवट ली और भीषण हिमपात शुरू हो गया। दल के ज्यादातर सदस्य इस बर्फीले घेरे में फंस गए। हालांकि, समूह के चार लोग, जिनमें एक शेरपा और सहायक भी शामिल थे, किसी तरह बचते हुए 30 अक्टूबर को अपने गंतव्य तक पहुंचने में कामयाब रहे। इन्हीं बचे हुए सदस्यों ने स्थानीय प्रशासन को दल के बाकी आठ साथियों के बर्फ में गुम हो जाने की सूचना दी।
हेलीकॉप्टर और एसडीआरएफ की मदद से खोज अभियान
सूचना प्राप्त होते ही राज्य प्रशासन हरकत में आया और तुरंत व्यापक बचाव कार्य शुरू किया गया। उत्तराखंड राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (एसडीआरएफ) के जांबाज जवान उत्तराखंड नागरिक उड्डयन विकास प्राधिकरण के हेलीकॉप्टर की मदद से पर्वतीय चोटियों और खाइयों की खाक छान रहे हैं। पिछले दो दिनों से दुर्गम ढलानों पर तलाश जारी है, लेकिन लगातार गिरते तापमान, घने बादलों और प्रतिकूल मौसमी परिस्थितियों के कारण अब तक किसी का सुराग नहीं लग सका है। अधिकारियों का स्पष्ट कहना है कि अत्यधिक ऊंचाई और बर्फबारी बचाव दल के मार्ग में गंभीर रुकावट पैदा कर रही है।
प्रशासनिक समन्वय और परिजनों को ढांढस
घटना की गंभीरता को देखते हुए पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने सोशल मीडिया मंच फेसबुक पर चिंता जाहिर की। उन्होंने स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया कि नई दिल्ली स्थित रेजिडेंट कमिश्नर कार्यालय और आपदा प्रबंधन प्रकोष्ठ उत्तराखंड के साथ लगातार संपर्क साधे हुए हैं। सुवेंदु अधिकारी ने कहा, “हम परिवारों के साथ मजबूती से खड़े हैं और अपने युवाओं की सुरक्षित और शीघ्र वापसी सुनिश्चित करने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ी जा रही है.”
बांकुरा जिले के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (कानून व्यवस्था) और पुलिस अधीक्षक को मौके पर मौजूद उत्तराखंड एसडीआरएफ और जिला प्रशासन से हर पल समन्वय बनाए रखने का निर्देश दिया गया है। बांकुरा के जिला मजिस्ट्रेट अनीश दासगुप्ता ने 3 नवंबर को जानकारी दी कि सूचना मिलते ही प्रशासनिक अधिकारियों ने पीड़ित परिवारों से भेंट कर उन्हें हर मुमकिन प्रशासनिक, रसद और ढांढस भरी सहायता उपलब्ध कराई है। लखनऊ और उत्तरकाशी के लापता युवकों के संदर्भ में भी स्थानीय स्तर पर लगातार जानकारी जुटाई जा रही है।






















