अपने आशियाने को आकर्षक और आरामदायक रूप देने के लिए लोग फर्नीचर के डिजाइन और गुणवत्ता का चुनाव तो बड़े जतन से करते हैं, मगर अक्सर उसे सही स्थान और उचित दिशा में स्थापित करने पर पर्याप्त ध्यान नहीं दे पाते। वास्तु शास्त्र के सिद्धांतों के अनुसार घर में रखी प्रत्येक वस्तु और फर्नीचर की दिशा का अपना खास महत्व होता है। खासतौर पर रोजाना इस्तेमाल में आने वाली ड्रेसिंग टेबल और डाइनिंग टेबल की स्थिति को लेकर कई महत्वपूर्ण नियम बताए गए हैं। इन्हें गलत स्थान पर रखने से घर के माहौल और व्यवस्था पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है, इसलिए यह जानना जरूरी है कि घर के भीतर इनकी सही जगह कौन सी होनी चाहिए और किन जगहों से परहेज करना चाहिए।
ड्रेसिंग टेबल स्थापित करने के लिए सही दिशा
ड्रेसिंग टेबल के लिए वास्तु नियमों के अनुसार उत्तर या पूर्व दिशा को सबसे उपयुक्त और अनुकूल माना जाता है। ड्रेसिंग टेबल के साथ शीशा यानी आईना जुड़ा होता है, जो कमरे में प्राकृतिक रोशनी और ऊर्जा को प्रतिबिंबित करने का काम करता है, इसी वजह से इसकी बनावट और स्थिति पर विशेष ध्यान देने की जरूरत होती है। ड्रेसिंग टेबल को कमरे के मुख्य दरवाजे के ठीक सामने बिल्कुल नहीं रखना चाहिए। यदि आप इसे अपने बेडरूम में लगा रहे हैं, तो कमरे के ऐसे कोने या दीवार का चयन करें जिससे कमरे में आने-जाने वाले रास्ते में कोई रुकावट न आए और आवाजाही पूरी तरह सुगम बनी रहे।
डाइनिंग टेबल के लिए कौन सी दिशा है अनुकूल
भोजन करने की मेज यानी डाइनिंग टेबल के लिए वास्तु नियमों में पश्चिम दिशा को सबसे बेहतर और उपयुक्त स्थान माना गया है। यदि पश्चिम दिशा में पर्याप्त जगह उपलब्ध न हो, तो उत्तर-पश्चिम दिशा में भी डाइनिंग एरिया तैयार किया जा सकता है। डाइनिंग टेबल वह केंद्रीय जगह होती है जहां परिवार के सभी सदस्य एक साथ बैठकर भोजन करते हैं और आपस में बातचीत करते हैं। इसलिए इस स्थान का पूरी तरह से आरामदायक, खुला और हवादार होना बेहद आवश्यक माना जाता है ताकि भोजन करते समय सभी को सुखद माहौल मिल सके।
प्रवेश द्वार और पूजा स्थल के सामने रखने से करें परहेज
डाइनिंग टेबल को घर के मुख्य प्रवेश द्वार के ठीक सामने स्थापित करने से बचने की स्पष्ट सलाह दी जाती है। इसके साथ ही घर के पूजा स्थल या मंदिर के बिल्कुल सामने भी भोजन की मेज लगाना उचित नहीं माना गया है। व्यावहारिक दृष्टि से भी मुख्य दरवाजे के रास्ते से टेबल को थोड़ा अलग रखना ही श्रेयस्कर होता है, ताकि घर के भीतर आने-जाने वाले लोगों के लिए पर्याप्त जगह बनी रहे और परिवार की निजता में किसी तरह का खलल न पड़े।
कमरे के अनुपात में टेबल का सही आकार
डाइनिंग टेबल का चयन करते समय केवल डिजाइन ही नहीं, बल्कि कमरे के कुल क्षेत्रफल और आकार का भी पूरा ध्यान रखना चाहिए। किसी छोटे कमरे के भीतर अत्यधिक बड़ी डाइनिंग टेबल लगा देने से जगह का अभाव हो जाता है और कुर्सियों पर बैठने व उठने में निरंतर परेशानी का सामना करना पड़ता है। मेज को हमेशा करीने से व्यवस्थित रखना चाहिए और उस पर बेकार या गैर-जरूरी सामान का ढेर जमा नहीं होने देना चाहिए। भोजन समाप्त होते ही मेज को तुरंत पूरी तरह साफ कर देना चाहिए।
स्वच्छता और नियमित रखरखाव के नियम
वास्तु से जुड़ी सभी प्राचीन व लोक मान्यताओं में घर की साफ-सफाई को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। ड्रेसिंग टेबल के शीशे को हमेशा धूल-धक्कड़ से मुक्त और चमकदार रखना चाहिए, साथ ही उसके आसपास सौंदर्य प्रसाधनों और अन्य वस्तुओं को बेतरतीब ढंग से बिखरा नहीं छोड़ना चाहिए। इसी तरह डाइनिंग टेबल पर भोजन के बाद जूठे बर्तन या बचा हुआ बासी खाना लंबे समय तक पड़ा नहीं रहने देना चाहिए। मेज की नियमित सफाई करने से न केवल वास्तु के नियमों का पालन होता है, बल्कि पूरे घर को स्वच्छ, व्यवस्थित और स्वास्थ्यप्रद बनाए रखने में भी मदद मिलती है।



















