थार के तपते और सूखे रेगिस्तान में जहां पेड़-पौधों को उगाना और उनकी देखभाल करना बेहद कठिन माना जाता है, वहीं राजस्थान के बाड़मेर की महिला दस्तकारों ने अपनी अनोखी कला से सूती कपड़ों पर ही पूरी हरियाली बिखेर दी है। अपनी सुई और रंग-बिरंगे धागों की मदद से ये महिलाएं सादे कपड़ों पर इस तरह पेड़ और वनस्पतियों को जीवित कर रही हैं कि देखने वाले दंग रह जाते हैं। बाड़मेर की इन महिला कारीगरों के हाथों से बनी इस अनूठी कढ़ाई की गूंज अब भारतीय सीमाओं को पार कर सुदूर पूर्व के देश जापान तक जा पहुंची है, जहां इन उत्पादों की अत्यधिक सराहना की जा रही है।
सूई और धागों से सजीव होती थार की प्रकृति
ये महिला दस्तकार साधारण कपड़े के टुकड़े को एक जीवंत कैनवास में तब्दील कर देती हैं। इस हस्तशिल्प की प्रक्रिया अत्यंत आकर्षक है, जिसमें सुई की नोक और रंग-बिरंगे धागों के जरिए कलाकृतियों को आकार दिया जाता है। इस कढ़ाई की शुरुआत कपड़े पर जड़ों को उकेरने से होती है। इसके बाद धीरे-धीरे तने का निर्माण किया जाता है, जो ऊपर की ओर बढ़ता है। तने से निकलती हुई शाखाएं, छोटी-छोटी हरी पत्तियां और फिर उन पर खिलते हुए रंगीन फूल इस कलाकृति को पूरा करते हैं। कला को और अधिक सुंदर बनाने के लिए टहनियों पर चहकते हुए पक्षियों की आकृतियां भी बनाई जाती हैं। थार के सूखे परिदृश्य के बीच कपड़ों पर उकेरी गई यह हरी-भरी दुनिया देखने वालों को ऐसा अहसास कराती है मानो रेत के टीलों के बीच अचानक कोई सुंदर वनस्पति खिल उठी हो।
सविना हस्तकला संस्थान ने दिलाई अंतरराष्ट्रीय पहचान
बाड़मेर के स्थानीय हुनर को अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने में सविना हस्तकला संस्थान ने बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इस संस्थान से जुड़ी महिला कारीगरों की कला का दायरा अब केवल बाड़मेर या राजस्थान तक ही सीमित नहीं रह गया है। सविना हस्तकला संस्थान के निदेशक केवलाराम मेघवाल ने इस संबंध में जानकारी साझा की है। उन्होंने बताया कि इन महिला दस्तकारों द्वारा हाथ से तैयार किए गए उत्पादों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी मजबूत पहचान बनाई है। विशेष रूप से जापान में इन हस्तनिर्मित कलाकृतियों की मांग बहुत तेजी से बढ़ी है। इन महिलाओं द्वारा तैयार की जाने वाली बेडशीट, बेड कवर, साड़ियां, दुपट्टे और तकियों के कवर पर पेड़-पौधों और प्राकृतिक दृश्यों की पूरी दुनिया को धागों से उकेरा जाता है, जहां हर एक पत्ती और फूल को अलग से हस्तनिर्मित डिजाइन दी जाती है।
महीनों की कड़ी मेहनत और उत्पादों की कीमत
इस बेहद बारीक और उत्कृष्ट हस्तशिल्प को तैयार करने में समय और मेहनत दोनों ही बहुत अधिक लगते हैं। संस्थान की एक प्रमुख महिला दस्तकार अनिता ने इस कला के निर्माण की प्रक्रिया और इसमें लगने वाले समय के बारे में विस्तार से बताया है। अनिता के अनुसार, केवल एक सिंगल बेडशीट को पूरी तरह तैयार करने में लगभग एक महीने का समय लग जाता है। चूंकि सुई और रंग-बिरंगे धागों के सहारे बेडशीट के हर एक कोने पर बारीक कढ़ाई की जाती है और प्राकृतिक आकृतियों को हाथों से उकेरा जाता है, इसलिए इसमें अत्यधिक ध्यान और धैर्य की आवश्यकता होती है। इस कठिन और लंबे समय तक चलने वाले काम के कारण ही इन उत्पादों की कीमत भी काफी अच्छी मिलती है। बाजार में इन हाथ से कढ़ाई की गई बेडशीट्स की कीमत लगभग 5,000 रुपये से लेकर 10,000 रुपये तक होती है। थार की बंजर भूमि पर भले ही प्राकृतिक हरियाली का अभाव हो, लेकिन यहां की महिलाओं की उंगलियां कपड़ों पर रंगीन धागों के माध्यम से ऐसी सजीव प्रकृति का निर्माण कर रही हैं, जिसकी गूंज विदेशों तक सुनाई दे रही है।



















