पश्चिम बंगाल के जलपाईगुड़ी में स्थित ऐतिहासिक जलपाईगुड़ी जिला स्कूल में विशेष दोपहर के भोजन को लेकर हुए गंभीर विवाद और हाथापाई के मामले में राज्य प्रशासन ने सख्त प्रशासनिक कदम उठाया है। लगभग 150 साल पुराने इस प्रतिष्ठित सरकारी संस्थान के हेडमास्टर धर्मचंद बारुई का फौरन प्रभाव से अन्य संस्थान में तबादला कर दिया गया है। शिक्षा विभाग और जिला स्कूल इंस्पेक्टर द्वारा पूरी घटना की सिलसिलेवार जांच पूरी होने के उपरांत यह निर्देश जारी किया गया, जिसकी आधिकारिक पुष्टि शिक्षा मंत्री दीपक बर्मन ने की है।
चावल और चिकन के वितरण पर शुरू हुई थी तीखी नोकझोंक
यह पूरा घटनाक्रम 8 सितंबर का है, जब शिक्षक दिवस के उपलक्ष्य में विद्यार्थियों के लिए एक विशेष दोपहर भोज की व्यवस्था की गई थी। इस आयोजन में परोसे जा रहे भोजन के दौरान कुछ विद्यार्थियों ने यह बात उठाई कि उन्हें उचित और पर्याप्त मात्रा में चावल व चिकन नहीं दिया जा रहा है। भोजन की मात्रा को लेकर शुरू हुई यह असंतुष्टि तेजी से स्कूल प्रबंधन और विद्यार्थियों के बीच तीखी बहस में तब्दील हो गई। देखते ही देखते परिसर का शांत माहौल पूरी तरह तनावपूर्ण बन गया।
कथित मारपीट, जवाबी हमला और विभाग की कार्रवाई
विवाद जब अत्यधिक बढ़ गया, तब यह आरोप सामने आया कि हेडमास्टर धर्मचंद बारुई ने कुछ विद्यार्थियों पर शारीरिक बल प्रयोग करते हुए उनकी पिटाई कर दी। घटना के चश्मदीदों के अनुसार, इस टकराव के बाद उत्तेजित विद्यार्थियों ने हेडमास्टर का पीछा किया, उन्हें जमीन पर गिरा दिया और उनके साथ गंभीर हाथापाई की। जिला स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा कराई गई शुरुआती जांच में इस अप्रिय झड़प के लिए दोनों ही पक्षों की भूमिका को उत्तरदायी माना गया।
शिक्षा मंत्री दीपक बर्मन ने बताया कि स्थिति की गंभीरता को देखते हुए विभाग ने पहले बारुई को 9 सितंबर से 15 दिनों की अनिवार्य छुट्टी पर भेजा था। इसके बाद मामले के अंतिम निपटारे के तहत उनका स्थानांतरण तत्काल प्रभाव से जिले के ही मालबाजार स्थित स्कूल में कर दिया गया। वहीं दूसरी तरफ, शिक्षक पर हमला करने में शामिल कक्षा 10 के चार छात्रों पर भी अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई और 11 सितंबर को उन्हें ट्रांसफर सर्टिफिकेट थमा दिया गया। इन चारों विद्यार्थियों को जलपाईगुड़ी जिला स्कूल में पढ़ाई जारी रखने से वंचित कर दिया गया है, हालांकि उन्हें किसी दूसरे शैक्षणिक संस्थान में दाखिला लेने की छूट दी गई है। शिक्षा मंत्री ने 11 सितंबर को स्वयं इस ऐतिहासिक स्कूल का दौरा कर विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ गहन समीक्षा बैठक की थी।






















