उत्तर 24 परगना जिले की निवासी और दिवंगत पूर्व रेल मंत्री मुकुल रॉय की बहू शर्मिष्ठा भौमिक रॉय नेपाल में आए भयानक सैलाब के बाद से लापता हो गई हैं। वह 21 अगस्त को एक ट्रैवल एजेंसी के साथ नेपाल की यात्रा पर गई थीं। बीते बुधवार को पड़ोसी देश में अचानक आए जलप्रलय के बाद से शर्मिष्ठा का कोई सुराग नहीं मिला है। उनसे संपर्क न हो पाने के कारण उनके परिजन काफी चिंतित हैं और लगातार प्रशासनिक मदद की गुहार लगा रहे हैं।
परिजनों की बढ़ती चिंताएं और सरकारी तंत्र से संपर्क
शर्मिष्ठा के पति शुवरांग्शु रॉय ने इस विकट स्थिति के बीच अपनी बात रखी। उन्होंने बताया कि उनकी पत्नी अकेले ही नेपाल दौरे पर गई थीं और आपदा आने के बाद से उनसे संपर्क के सभी रास्ते बंद हो चुके हैं। वह लगातार नेपाल और भारत के प्रशासनिक अधिकारियों के संपर्क में हैं ताकि अपनी पत्नी के बारे में कोई ठोस जानकारी प्राप्त कर सकें।
अपनी पत्नी की स्थिति का विवरण देते हुए शुवरांग्शु रॉय ने आधिकारिक रिकॉर्ड्स का हवाला दिया। उन्होंने कहा, "मेरी पत्नी मिसिंग लिस्ट में हैं।" उन्होंने आगे बताया कि अभी तक प्रशासन की ओर से कोई नया अपडेट नहीं मिला है। राहत की बात यह है कि उनके दोनों बच्चे, जिनमें एक बेटा और एक बेटी शामिल हैं, इस समय भारत में अपने पिता के साथ सुरक्षित हैं।
नेपाल में तबाही के आंकड़े और लापता भारतीय नागरिक
तिब्बत की ओर से आए विशाल सैलाब ने नेपाल के सीमावर्ती क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर तबाही मचाई है। तिब्बत से सटे नेपाल के कई ग्रामीण और शहरी इलाके पूरी तरह से जलमग्न हो चुके हैं। इस आपदा के कारण जान-माल का कितना नुकसान हुआ है, इसकी सटीक तस्वीर अभी साफ नहीं हो सकी है क्योंकि राहत कार्य लगातार जारी हैं और हर घंटे नए आंकड़े सामने आ रहे हैं।
ताजा स्थिति के अनुसार, नेपाल सरकार ने अब तक 270 लोगों की जान जाने की आधिकारिक पुष्टि की है। इसके अलावा 1,000 से ज्यादा लोग अब भी लापता हैं, जिनकी तलाश में राहत और बचाव दल जुटे हुए हैं। भारत के विदेश मंत्रालय ने भी इस संबंध में आंकड़ा जारी किया है, जिसके अनुसार नेपाल में इस समय 288 भारतीय नागरिक लापता बताए जा रहे हैं।
चीन पर जानकारी छिपाने के आरोप और अमेरिकी एजेंसी का खुलासा
इस आपदा के दौरान चीन की कार्यशैली पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, तिब्बत में आए भारी संकट और मलबे के साथ तेजी से नेपाल की ओर बढ़ रहे जलप्रवाह की जानकारी देने में चीन ने काफी देरी की। सैलाब अपने साथ चट्टानों और विशाल बोल्डरों को बहाकर ले आया, जिससे नेपाल के निचले इलाकों में रहने वाले सैकड़ों लोग इसकी चपेट में आ गए।
हालांकि, नेपाल स्थित चीनी दूतावास ने इन आरोपों का पूरी तरह खंडन किया है। दूतावास का तर्क है कि यह आपदा नेपाल की तरफ हुए ग्लेशियर टूटने या स्थानीय भूकंप के कारण उत्पन्न हुई है। लेकिन अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण ने एक अलग खुलासा किया है। अमेरिकी संस्थान के अनुसार, तिब्बत क्षेत्र में ग्लेशियर टूटने के कारण 5.2 की तीव्रता का भूकंप आया था, जिसने इस प्रलयंकारी सैलाब को जन्म दिया।




















