उत्तराखंड के पवित्र शहर हरिद्वार में आगामी 14 जनवरी 2027 से भव्य अर्धकुंभ मेले का आयोजन होना है, जिसकी प्रशासनिक तैयारियां अब पूरे जोर-शोर से आगे बढ़ रही हैं। आयोजन के दौरान लाखों की तादाद में जुटने वाले तीर्थयात्रियों की सुगमता को ध्यान में रखकर समूचे क्षेत्र में बुनियादी ढांचे को मजबूत किया जा रहा है। मुख्य मार्गों का चौड़ीकरण करने के साथ-साथ नदी किनारे नए पक्के घाटों और छह नए पुलों का निर्माण प्रगति पर है, ताकि मुख्य स्नान पर्वों के दौरान भारी भीड़ का सुचारू प्रबंधन संभव हो सके।
उत्तराखंड गंग नहर पर अतिरिक्त स्नान घाटों का विकास
दशहरे की रात गंग नहर को गाद निकालने, सफाई अभियान चलाने और पुराने ढांचों के सुधार के उद्देश्य से अस्थायी तौर पर बंद किया गया था। इस बंदी अवधि का लाभ उठाते हुए शंकराचार्य चौक से आगे दोनों किनारों पर घाट निर्माण की रफ्तार बढ़ा दी गई है। नहर के दोनों तरफ कुल मिलाकर 1.75 किलोमीटर लंबे आधुनिक घाट तैयार किए जा रहे हैं। अपर मेलाधिकारी दयानंद सरस्वती के अनुसार, इन नए पक्के घाटों को 15 नवंबर तक हर हाल में पूरा करने का स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
इन नए किनारों के तैयार होने से पर्व स्नान के दौरान गंगा तट पर आने वाले श्रद्धालुओं को पूजा-अर्चना और डुबकी लगाने के लिए काफी खुली जगह मिल पाएगी। इससे पूर्व से स्थापित घाटों पर जमावड़ा घटेगा और भगदड़ जैसी अप्रिय स्थितियों के खतरे को टाला जा सकेगा।
महत्वपूर्ण स्थलों पर छह नए पुल और निर्धारित समयसीमा
घाटों के विस्तार के समानांतर शहर के छह रणनीतिक स्थलों पर नए पुलों का ढांचा भी खड़ा किया जा रहा है। आवागमन को सुगम बनाने वाले इन पुलों को 20 दिसंबर तक तैयार करने की समयसीमा तय की गई है। इसके अतिरिक्त, अर्धकुंभ से संबंधित जितने भी स्थायी किस्म के बुनियादी निर्माण कार्य चल रहे हैं, उन्हें 10 से 15 दिसंबर के मध्य समेट लेने की पूरी योजना बनाई गई है। नहर का बहाव सामान्य होने से पूर्व जल क्षेत्र से जुड़े सभी मुख्य ढांचों को मुकम्मल कर लिया जाएगा।
आईआईटी रुड़की द्वारा तकनीकी निगरानी और नियंत्रण केंद्र
समस्त निर्माण कार्यों की मजबूती तथा इंजीनियरिंग मानकों की समीक्षा के लिए विशेष तकनीकी निरीक्षण भी कराया जा रहा है। नए मेला नियंत्रण भवन-2 और निर्माणाधीन छह पुलों की मजबूती की तकनीकी जांच आईआईटी रुड़की के विशेषज्ञ दल से कराई जा रही है। अपर मेलाधिकारी दयानंद सरस्वती ने जानकारी दी कि तय समयसीमा के भीतर उच्च गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए प्रत्येक निर्माण स्थल की प्रगति पर कड़ी प्रशासनिक निगरानी रखी जा रही है।
मौजूदा घाटों पर भीड़ का दबाव बांटने की रणनीति
तीर्थनगरी हरिद्वार में ब्रह्मकुंड घाट, हरकी पौड़ी, कुशावर्त घाट, मालवीय घाट और सुभाष घाट जैसे कई ऐतिहासिक स्नान स्थल पहले से संचालित हैं। इसके बावजूद अमृत स्नान के विशेष दिनों पर यहां पैर रखने की जगह नहीं बचती। इसी भारी जनदबाव को संतुलित करने के लिए प्रशासन ने नए स्नान क्षेत्रों का दायरा बढ़ाने का फैसला किया। दयानंद सरस्वती के अनुसार, अर्धकुंभ में आने वाले प्रत्येक भक्त को सुरक्षित माहौल में स्नान की सुविधा उपलब्ध कराना ही इस व्यापक निर्माण का मूल उद्देश्य है।
























