पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ा प्रशासनिक घटनाक्रम सामने आया है, जहां राज्य के पूर्व मंत्री इंद्रनील सेन को कोलकाता पुलिस ने अपनी हिरासत में ले लिया। यह गिरफ्तारी साल्टलेक स्थित सीजीओ कॉम्प्लेक्स में बने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के दफ्तर के ठीक बाहर हुई। पूर्व मंत्री वहां जांच एजेंसी के सवालों का जवाब देने पहुंचे थे और जैसे ही वे पूछताछ समाप्त कर इमारत से बाहर निकले, पुलिस की जासूसी शाखा ने उन्हें दबोच लिया।
जांच एजेंसी के दफ्तर के बाहर नाटकीय कार्रवाई
बुधवार शाम करीब 5.10 बजे जब इंद्रनील सेन केंद्रीय एजेंसी के दफ्तर से बाहर आ रहे थे, तभी पहले से मुस्तैद कोलकाता पुलिस के अधिकारियों ने उन्हें हिरासत में ले लिया। पूर्व मंत्री इस मामले में तीसरी बार केंद्रीय जांच एजेंसी के समक्ष पेश होने पहुंचे थे। इस नाटकीय गिरफ्तारी के बाद राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज हो गई है, क्योंकि दोनों जांच एजेंसियां अलग-अलग स्तरों पर इस प्रकरण की पड़ताल में जुटी हैं।
यूनेस्को के नाम के दुरुपयोग और टिकट बिक्री का आरोप
इस पूरे मामले की जड़ें दुर्गा पूजा उत्सव के प्रीव्यू शो और विशेष पास की बिक्री से जुड़ी हैं। जांच के केंद्र में पूर्व मंत्री और उनकी पत्नी से जुड़ी संस्था 'मास-आर्टे' है। संस्था पर आरोप है कि उसने विश्व धरोहर संस्था यूनेस्को (UNESCO) के नाम और आधिकारिक लोगो का कथित रूप से बिना किसी वैध अनुमति के इस्तेमाल किया। प्रचार सामग्री में संस्था को यूनेस्को से संबंधित अथवा उसकी आधिकारिक साझेदार के रूप में प्रस्तुत किया गया, जिसके आधार पर पास और टिकट बेचे गए।
50 से 60 करोड़ रुपये की कथित वित्तीय अनियमितता
जांच अधिकारियों के अनुसार, यूनेस्को की साख का अनधिकृत इस्तेमाल कर दुर्गा पूजा के पास और प्रीव्यू शो के टिकट आम जनता और श्रद्धालुओं को बेचे गए। प्राथमिक आकलन के मुताबिक यह घोटाला करीब 50 से 60 करोड़ रुपये के वित्तीय गबन और हेराफेरी का माना जा रहा है। कोलकाता के बहूबाजार थाने में दर्ज कराई गई एक नागरिक की औपचारिक शिकायत के बाद इस पूरे नेटवर्क की परतें खुलनी शुरू हुईं, जिसके बाद पुलिस और वित्तीय जांच एजेंसी दोनों सक्रिय हो गईं।
छापेमारी और कई दौर की सघन पूछताछ
इस वित्तीय अनियमितता के खुलासे के बाद 29 सितंबर को जांच एजेंसी ने व्यापक कार्रवाई की थी। उस दिन इंद्रनील सेन के हुगली स्थित बागानबाड़ी और अन्य आवासीय परिसरों पर पूरे दिन सघन तलाशी अभियान चलाया गया था। इसके अगले ही दिन यानी 30 सितंबर को पूर्व मंत्री को तलब किया गया, जहां उनसे 8 घंटे से भी अधिक समय तक लगातार सवाल-जवाब किए गए। इसके बाद मामले की कड़ियों को जोड़ने के लिए उन्हें 7 अक्टूबर को दूसरी बार पूछताछ के लिए बुलाया गया था, जहां कई घंटों तक जांच का सामना करने के बाद बुधवार को तीसरी पेशी के दौरान यह गिरफ्तारी हुई।



















