जोधपुर स्थित रेलवे के भगत की कोठी लोको शेड में सुरक्षा व्यवस्था और तकनीकी क्षमताओं को उन्नत बनाने के लिए कई बड़े कदम उठाए जा रहे हैं। पिछले पांच महीनों के दौरान इस शेड में निर्धारित लक्ष्य के तहत आधे इलेक्ट्रिक इंजनों में आधुनिक सुरक्षा प्रणाली को सफलतापूर्वक स्थापित कर दिया गया है। इसके साथ ही विभिन्न तकनीकी सुधारों के कारण इंजनों के खराब होने के मामलों में भी उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है। शेड के भीतर स्वदेशी नवाचारों को बढ़ावा देते हुए जांच प्रक्रियाओं को बेहतर बनाया गया है और करोड़ों रुपये के उपयोगी उपकरणों का दोबारा इस्तेमाल करने के साथ पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी ठोस कदम उठाए जा रहे हैं।
कवच प्रणाली की स्थापना और विश्वसनीयता में सुधार
इस शेड के तहत आने वाले कुल 132 इलेक्ट्रिक इंजनों में से 66 यानी ठीक आधे इंजनों में कवच सुरक्षा प्रणाली को फिट किया जा चुका है। बाकी बचे हुए इंजनों में भी इस प्रणाली को चरणबद्ध तरीके से लगाने का काम तेजी से चल रहा है, जबकि भविष्य में तैयार होने वाले नए इलेक्ट्रिक इंजनों में यह सुविधा पहले से ही मौजूद होगी। इन तकनीकी बदलावों का सकारात्मक प्रभाव इंजनों की कार्यक्षमता और उनकी विश्वसनीयता पर साफ देखा जा सकता है। पिछले साल की समान अवधि के आंकड़ों से तुलना करें तो एचएचपी डीजल लोको के फेल होने के मामलों में 40 प्रतिशत की भारी गिरावट आई है, जबकि इलेक्ट्रिक लोको के फेलियर में 21 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। इसके अलावा रेलवे बोर्ड द्वारा तय किए गए लक्ष्यों की तुलना में डीजल लोको आउटेज में 21 प्रतिशत और इलेक्ट्रिक लोको आउटेज में 6 प्रतिशत का सुधार हुआ है।
स्वदेशी तकनीक से उपकरणों की जांच और संसाधनों का पुनरुपयोग
भगत की कोठी लोको शेड ने स्वदेशी तकनीक के आधार पर एक खास पी पाइप फ्लो टेस्ट बेंच तैयार की है जो तकनीकी नवाचार का एक बेहतरीन उदाहरण है। इस उपकरण की मदद से पिस्टन कूलिंग पाइपों को इंजन के अंदर फिट करने से पहले ही उनके ऑयल फ्लो और स्प्रे क्षमता की सटीक जांच कर ली जाती है। इससे किसी भी खराब या दोषपूर्ण पाइप का पता समय रहते चल जाता है और इंजन को होने वाले संभावित बड़े नुकसान से बचाया जा सकता है। इसके साथ ही शेड ने संसाधनों के सही इस्तेमाल पर जोर देते हुए करीब 4.73 करोड़ रुपये की कुल कीमत वाले 84 उपयोगी लोको उपकरणों को देश भर के अलग-अलग रेलवे शेडों, कार्यशालाओं और उत्पादन इकाइयों को भेजा है। इसके अलावा पिछले तीन महीनों की अवधि में 10 इलेक्ट्रिक लोको के टीओएच और 11 एचएचपी डीजल लोको के महत्वपूर्ण अनुरक्षण शेड्यूल को भी सफलतापूर्वक पूरा किया गया है।
पर्यावरण संरक्षण और जल की बचत के प्रयास
सुरक्षा और तकनीकी कार्यों के अलावा यह शेड पर्यावरण के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए लगातार नए प्रयास कर रहा है। यहाँ मौजूद कुल 181 इलेक्ट्रिक लोको में से 77 इंजनों में जलरहित यूरिनल स्थापित किए जा चुके हैं, जिससे पानी की भारी बचत हो रही है और रखरखाव के काम को अधिक सुगम बनाने में सहायता मिल रही है। मंडल रेल प्रबंधक अनुराग त्रिपाठी का कहना है कि आधुनिक तकनीक, उच्च स्तर के रखरखाव और स्वदेशी नवाचारों के जरिए यह शेड रेलवे के सुरक्षा पहले के मूल संकल्प को पूरी मजबूती प्रदान कर रहा है। इन सभी बदलावों का मुख्य उद्देश्य पटरियों पर दौड़ने वाली ट्रेनों के संचालन को अधिक सुरक्षित, भरोसेमंद और तकनीकी रूप से उन्नत बनाना है ताकि यात्रियों की यात्रा को और अधिक सुरक्षित किया जा सके।




















