जोधपुर जिले के शेरगढ़ क्षेत्र में इन दिनों खरीफ सीजन की फसलों पर कातरा कीट का भारी संकट मंडरा रहा है। कड़ी मेहनत और उम्मीद के साथ उगाई गई फसलें इस खतरनाक कीट के हमले से तबाह होने की कगार पर पहुंच चुकी हैं। सोईन्तरा और उसके आसपास के ग्रामीण इलाकों में हजारों बीघा जमीन पर फैली फसलें इस कीट के प्रकोप की चपेट में आ गई हैं, जिससे अन्नदाताओं की मुश्किलें काफी बढ़ गई हैं।
फसलों को तेजी से चट कर रहे नारंगी कीट
प्रभावित खेतों में इस समय बड़ी संख्या में नारंगी रंग के कीट घूमते हुए साफ नजर आ रहे हैं। ये कीट मूंग, मोठ, ग्वार, तिल और बाजरा जैसी प्रमुख फसलों की हरी पत्तियों और उनके बेहद कोमल हिस्सों को बहुत तेजी से कुतर कर खा रहे हैं। इस लगातार नुकसान के चलते पौधे अंदर से कमजोर होकर सूखने लगे हैं, जिसके कारण किसानों के सामने भारी आर्थिक संकट खड़ा हो गया है और उन्हें लाखों रुपये के नुकसान का डर सता रहा है।
चिंताजनक स्थिति और किसानों की लागत
क्षेत्र में कातरा कीट का हमला इतनी तेजी से फैल रहा है कि कई खेतों में फसल की हालत बेहद दयनीय हो चुकी है। ये कीट झुंड बनाकर खेतों में धावा बोल रहे हैं और पत्तियों को चट कर रहे हैं, जिससे पौधों की सामान्य वृद्धि पूरी तरह रुक गई है। किसानों का मानना है कि यदि इस प्रकोप को जल्द से जल्द नियंत्रित नहीं किया गया, तो खेतों में जो थोड़ी-बहुत फसल बची है, वह भी पूरी तरह नष्ट हो जाएगी। इस फसल को तैयार करने के लिए किसानों ने पहले ही महंगे बीज, उर्वरक, सिंचाई और कीटनाशकों पर अपनी गाढ़ी कमाई का एक बड़ा हिस्सा खर्च कर दिया है, ऐसे में फसल बर्बाद होने से उनका बजट पूरी तरह बिगड़ गया है।
प्रशासन से मुआवजे और सर्वे की मांग
इस संकट के बीच किसानों ने नुकसान की भरपाई के लिए तुरंत सर्वे कराने की पुरजोर मांग उठाई है। स्थानीय किसान बाबूसिंह गोड़ ने इस स्थिति पर चिंता जताते हुए बताया कि सोईन्तरा और समीपवर्ती गांवों में हजारों बीघा फसल इस कीट के कारण बुरी तरह प्रभावित हुई है। उन्होंने कहा कि किसानों ने अपनी तरफ से कोई कसर नहीं छोड़ी थी और पूरी लागत व मेहनत से फसल उगाई थी, लेकिन अब यह सब बर्बाद होने के कगार पर है।
किसानों ने सरकार और जिला प्रशासन से मांग की है कि तुरंत प्रभाव से प्रभावित गांवों में कृषि विभाग के अधिकारियों और फसल बीमा कंपनियों की संयुक्त टीमों को भेजा जाए ताकि जमीनी स्तर पर सर्वे कराया जा सके। उनकी मांग है कि हुए नुकसान का सटीक आकलन करते हुए फसल बीमा योजना के तहत उचित मुआवजा प्रदान किया जाए। इसके साथ ही, किसानों ने कृषि विभाग से यह भी आग्रह किया है कि उन्हें कीट पर नियंत्रण पाने के लिए सही और प्रभावी दवाओं की जानकारी दी जाए।
फसलों की सुरक्षा के लिए जरूरी कदम
कृषि जानकारों और स्थिति को देखते हुए किसानों को सलाह दी गई है कि वे अपने खेतों की लगातार और नियमित रूप से निगरानी करते रहें। पौधों और पत्तियों की विशेष जांच करते रहना चाहिए ताकि कीट की मौजूदगी का समय रहते पता चल सके। यदि शुरुआती दौर में ही कीट का हमला नजर आ जाए, तो तुरंत कृषि विभाग के जानकारों या विशेषज्ञों से संपर्क करके उचित कीटनाशक का ही इस्तेमाल करना चाहिए।
किसानों को यह भी हिदायत दी गई है कि वे अपनी तरफ से बिना पूरी जानकारी के अत्यधिक मात्रा में किसी भी दवा का छिड़काव करने से बचें, क्योंकि इससे फसल को और अधिक नुकसान हो सकता है। इसके अलावा, अपने खेतों में हुए नुकसान की सूचना तुरंत संबंधित विभाग को देनी चाहिए ताकि समय पर सर्वे हो सके और फसल को बचाने के साथ-साथ सही राहत पहुंचाई जा सके।


















