पाकिस्तान के अशांत बलूचिस्तान प्रांत में बलोच विद्रोहियों ने सुरक्षा बलों की मुश्किलें काफी बढ़ा दी हैं। ताजा घटनाओं के तहत बलूचिस्तान के कई अलग-अलग जिलों में सुरक्षा बलों के काफिले, रेलवे ट्रैक और पुलिसकर्मियों को निशाना बनाकर कई बड़े हमले किए गए हैं। इन ताबड़तोड़ वारदातों से पूरे क्षेत्र में हड़कंप मच गया है और प्रशासन ने विभिन्न स्थानों पर बड़े स्तर पर सर्च ऑपरेशन छेड़ दिया है।
मस्तुंग जिले के भीतर एक सनसनीखेज घटना सामने आई है, जहां अज्ञात बंदूकधारियों ने एक निजी लाइब्रेरी के करीब पुलिस कांस्टेबल एहसानुल्लाह को गोली का शिकार बनाया। गंभीर रूप से घायल अवस्था में उन्हें तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन डॉक्टरों की तमाम कोशिशों के बावजूद उनकी जान नहीं बचाई जा सकी। इस वारदात के बाद स्थानीय पुलिस ने मामला दर्ज करते हुए हमलावरों की धरपकड़ के लिए तलाश अभियान तेज कर दिया है।
एन-40 हाईवे पर सुरक्षा काफिले पर तीन बार हमले
चागई जिले से गुजरने वाले एन-40 हाईवे पर सुरक्षा बलों के काफिले को बेहद सुनियोजित तरीके से निशाना बनाया गया। इस हाईवे पर एक ही दिन में तीन अलग-अलग हमलों को अंजाम दिया गया, जिससे सुरक्षा एजेंसियों में खलबली मच गई।
श्रृंखलाबद्ध इन हमलों के पहले चरण में काफिले से आगे चल रहे एक ट्रक को आग के हवाले कर दिया गया। हालांकि यह ट्रक आधिकारिक तौर पर उस सुरक्षा काफिले का हिस्सा नहीं था, लेकिन इससे माहौल तनावपूर्ण हो गया।
इसके ठीक बाद हुए दूसरे हमले में अंधाधुंध फायरिंग की गई, जिससे काफिले में शामिल एक वाहन का टायर फट गया और वाहन को नुकसान पहुंचा।
तीसरे और अंतिम चरण में जब हमलावरों ने फिर से फायरिंग की, तो सुरक्षा बलों ने भी मोर्चा संभालते हुए जवाबी कार्रवाई की। सुरक्षा बलों की जवाबी फायरिंग के बाद हमलावर मौके से फरार होने में कामयाब हो गए।
एक महीने के भीतर 97 सैनिकों के मारे जाने का दावा
बलूचिस्तान में सक्रिय प्रमुख उग्रवादी संगठन बलूचिस्तान लिबरेशन फ्रंट ने एक चौंकाने वाला दावा पेश किया है। संगठन का कहना है कि उसने अकेले जुलाई महीने के दौरान पूरे प्रांत में कुल 48 सैन्य अभियान चलाए।
इस संगठन के मुताबिक, इन तमाम हमलों में कुल 97 पाकिस्तानी सैनिक मारे जा चुके हैं। इसके अलावा 15 अन्य जवान गंभीर रूप से घायल हुए हैं, जबकि पांच ऐसे लोगों को भी मौत के घाट उतारा गया है जिन्हें संगठन ने अपना मुखबिर करार दिया है।
यह सारा विवरण द बलूचिस्तान पोस्ट की एक रिपोर्ट के माध्यम से सामने आया है। हालांकि इन आंकड़ों और दावों की किसी भी स्वतंत्र स्रोत से पुष्टि नहीं की जा सकी है। बलूचिस्तान लिबरेशन फ्रंट के प्रवक्ता मेजर ग्वाहराम बलूच ने अपने एक मासिक बयान में स्पष्ट किया कि उनके ये तमाम अभियान पाकिस्तानी सेना, सुरक्षा बलों और सैन्य ढांचे को नेस्तनाबूद करने के लिए चलाए जा रहे हैं। उनका यह भी कहना है कि इन हमलों का मुख्य उद्देश्य क्षेत्र के आर्थिक ढांचे, संचार नेटवर्क और निगरानी प्रणालियों को भी नुकसान पहुंचाना है।
कबायली नेता और पुलिस अधिकारी का अपहरण
हिंसा का दायरा सिर्फ हाईवे तक सीमित नहीं रहा, बल्कि अपहरण की घटनाएं भी सामने आई हैं। खुजदार जिले के अरांजी इलाके में कुछ हथियारबंद लोगों ने एक स्थानीय कबायली नेता मीर अखलाक खिदरानी और उनके भाई जावेद का अपहरण कर लिया। हालांकि गनीमत यह रही कि इस दौरान उनका तीसरा भाई किसी तरह वहां से जान बचाकर निकलने में सफल रहा।
दूसरी ओर, लासबेला जिले में हमलावरों ने एक नामी पुलिस चौकी पर धावा बोल दिया। उन्होंने वहां तैनात पुलिसकर्मियों को हथियार डालने पर मजबूर किया और सब-इंस्पेक्टर गुलाब का अपहरण करके फरार हो गए। इन दोनों ही मामलों में सुरक्षा बल अपहृत लोगों को सुरक्षित छुड़ाने के लिए लगातार कॉम्बिंग ऑपरेशन चला रहे हैं।
जाफर एक्सप्रेस से पहले रेलवे ट्रैक पर धमाका
सड़क और अपहरण के मामलों के अलावा रेलवे तंत्र को भी निशाना बनाया गया। क्वेटा के सरियाब इलाके में पेशावर की ओर जाने वाली जाफर एक्सप्रेस के गुजरने से ठीक पहले रेलवे ट्रैक के पास एक शक्तिशाली विस्फोटक उपकरण में जोरदार धमाका हुआ।
इस बम विस्फोट के कारण रेलवे ट्रैक को मामूली क्षति पहुंची, जिसे रेलवे के तकनीकी अमले ने जल्द ही दुरुस्त कर लिया। ट्रैक ठीक होने के बाद संबंधित ट्रेन को पूरी सुरक्षा के साथ क्वेटा पहुंचाया जा सका। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस, बम निरोधक दस्ता और अन्य तमाम सुरक्षा एजेंसियां तुरंत मौके पर पहुंचीं और गहन जांच-पड़ताल शुरू कर दी।
लगातार सामने आ रही इन वारदातों के बाद पूरे बलूचिस्तान में सुरक्षा व्यवस्था को बेहद कड़ा कर दिया गया है और संदिग्धों की तलाश में लगातार दबिश दी जा रही है।



















