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बेंजामिन नेतन्याहू के विदेशी दखल वाले आरोप खारिज, इजरायल में प्रत्यक्ष पीएम चुनाव पर विचारदुनिया
31 अक्तू॰ 2026, 3:32 pm (1 घंटे पहले)· 0

बेंजामिन नेतन्याहू के विदेशी दखल वाले आरोप खारिज, इजरायल में प्रत्यक्ष पीएम चुनाव पर विचार

इजरायली चुनाव अधिकारियों ने वोट चोरी और विदेशी हस्तक्षेप के दावों को नकार दिया है, जबकि अनिर्णायक नतीजों के बाद विपक्षी दल प्रधानमंत्री के प्रत्यक्ष चुनाव का नया कानून लाने की तैयारी कर रहे हैं।

इजरायल में हाल ही में संपन्न हुए संसदीय चुनावों के बाद गहराते राजनीतिक संकट के बीच चुनाव अधिकारियों ने प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के उन आरोपों को सिरे से नकार दिया है, जिनमें मतदान प्रक्रिया के दौरान विदेशी दखलअंदाजी का दावा किया गया था। चुनाव प्राधिकरण ने स्पष्ट तौर पर रेखांकित किया है कि वर्तमान में चल रही किसी भी प्रशासनिक समीक्षा अथवा जांच का अंतिम नतीजों पर कोई विपरीत प्रभाव नहीं पड़ेगा। इसके साथ ही अधिकारियों ने यह भी साफ कर दिया है कि किसी भी खास वर्ग या समुदाय के मतदाताओं द्वारा डाले गए मतों को अमान्य या अवैध घोषित नहीं किया जाएगा। मंगलवार को हुए मतदान में किसी भी गठबंधन को स्पष्ट जनादेश न मिलने से संसद में गतिरोध बना हुआ है, जिसे दूर करने के लिए नए संवैधानिक विकल्पों की तलाश तेज हो गई है।

विपक्षी खेमे की नई रणनीति और सीधे चुनाव का विकल्प

संसद में बने कड़े गतिरोध को खत्म करने के लिए नेतन्याहू-विरोधी गठबंधन के घटक दल एक नए वैधानिक फॉर्मूले पर मंथन कर रहे हैं। इस योजना के केंद्र में देश के भीतर प्रधानमंत्री पद के लिए सीधे यानी प्रत्यक्ष चुनाव कराने से जुड़ा एक नया मसौदा कानून पेश करने की तैयारी है। इस व्यवस्था के अमल में आने से मतदाताओं को समूची सरकार से अलग सीधे प्रधानमंत्री चुनने का संवैधानिक अधिकार मिल सकेगा। विपक्षी खेमे का मानना है कि इस कदम से उन्हें संसद में अरब दलों के प्रत्यक्ष समर्थन पर निर्भर हुए बगैर ही एक कार्यकारी अल्पसंख्यक सरकार गठित करने और देश को शासन देने का मौका हासिल हो सकता है।

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संसदीय अंकगणित और 61 सांसदों के समर्थन की अनिवार्यता

मंगलवार को संपन्न हुए चुनावों के जो नतीजे सामने आए हैं, उनमें न तो प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के दक्षिणपंथी गठबंधन को स्पष्ट बहुमत हासिल हुआ है और न ही उनके राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों का खेमा जादुई आंकड़े तक पहुंच सका है। देश के संवैधानिक ढांचे 'बेसिक लॉ: द गवर्नमेंट' के तहत किसी भी नए मंत्रिमंडल के अस्तित्व में आने के लिए 120 सदस्यों वाली संसद यानी नेसेट के पटल पर विश्वास मत हासिल करना कानूनी रूप से अनिवार्य है। यदि सीधे प्रधानमंत्री चुनाव की नई प्रणाली को कानूनी रूप देना है, तो मौजूदा बुनियादी कानून में संशोधन करना होगा। इस तरह के संशोधन को पारित कराने के लिए नेसेट के कम से कम 61 सांसदों का संख्याबल जुटाना जरूरी होगा। उल्लेखनीय है कि इससे पहले मार्च 2021 के अनिर्णायक आम चुनावों के उपरांत भी नेतन्याहू ने राजनीतिक संकट टालने के लिए इसी तरह के सीधे चुनाव का सुझाव सामने रखा था।

लिकुड पार्टी के दावों का खंडन और अंतिम घोषणा की प्रतीक्षा

इजरायल की केंद्रीय चुनाव समिति द्वारा बुधवार तक नेसेट के आधिकारिक और प्रमाणित चुनाव परिणामों की घोषणा किए जाने की संभावना है। औपचारिक प्रमाणीकरण से पूर्व शुरुआती आंकड़ों में कुछ मामूली फेरबदल हो सकते हैं, जबकि विभिन्न राजनीतिक दल संभावित गठबंधन की संभावनाओं को टटोलने के लिए बातचीत के दौर जारी रखे हुए हैं। इस बीच, नेतन्याहू की लिकुड पार्टी ने अपनी बयानबाजी तेज करते हुए आरोप लगाया है कि अरब-नेतृत्व वाली पार्टियों ने चुनावों को प्रभावित कर जनादेश चुरा लिया है और इस पूरे प्रकरण में संभावित रूप से विदेशी ताकतों का हाथ रहा है। हालांकि, इन दावों के समर्थन में कोई पुख्ता प्रमाण प्रस्तुत नहीं किए गए हैं और चुनाव तंत्र ने इन्हें पूरी तरह बेबुनियाद मानते हुए खारिज कर दिया है।

सवाल-जवाब

क्या चुनाव अधिकारियों ने बेंजामिन नेतन्याहू के आरोपों को स्वीकार किया है?
नहीं, चुनाव अधिकारियों ने विदेशी दखल और वोट चोरी के दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया है।
क्या चल रही जांच से किसी खास समुदाय के वोटों पर असर पड़ेगा?
अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि जांच से अंतिम परिणाम नहीं बदलेंगे और न ही किसी विशेष समुदाय के वोट अमान्य होंगे।
विपक्षी गुट किस नए कानून पर विचार कर रहा है?
विपक्ष प्रधानमंत्री पद के लिए प्रत्यक्ष यानी सीधे चुनाव कराने से जुड़ा कानून लाने पर विचार कर रहा है।
प्रत्यक्ष चुनाव कानून पारित कराने के लिए कितने सांसदों के समर्थन की आवश्यकता है?
बेसिक लॉ में संशोधन करने के लिए 120 सदस्यीय संसद में कम से कम 61 सांसदों का समर्थन जरूरी है।
संसद चुनाव के अंतिम परिणामों की आधिकारिक घोषणा कब तक होने की उम्मीद है?
केंद्रीय चुनाव समिति द्वारा बुधवार तक नेसेट चुनाव के अंतिम नतीजे प्रमाणित और घोषित किए जाने की संभावना है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 4

Omar AL Mansoori@omar-mansoori·38 मिनट पहले

तेल अवीव में साल 2021 के चुनावों के दौरान ऐसा ही हंगामा मैंने खुद अपनी आँखों से देखा था। हर बार नतीजे ऐसे ही लटक जाते हैं और फिर वही पुरानी माथापच्ची शुरू हो जाती है।

Arjun Mehta@arjun-mehta·37 मिनट पहले

ओमर भाई, बिल्कुल सही कहा आपने। पिछली बार जब मैं ये सब कवर करने वहाँ गया था, तब भी नेतन्याहू का यही ड्रामा चल रहा था, हर बार का वही पुराना रोना है।

Ayesha Siddiqui@ayesha-siddiqui·1 घंटे पहले

इजरायल में चुनावों के बाद का यह नाटक खत्म होने का नाम ही नहीं ले रहा। नेतन्याहू हार मानने को तैयार नहीं हैं और विपक्ष नया कानून लाने की जुगत में है। जनता फिर से इस सियासी उठापटक से परेशान होगी।

Karan Malhotra@karan-malhotra·1 घंटे पहले

आयशा जी, आपकी बात बिल्कुल सही है। पर क्या सचमुच विपक्ष इस नए कानून के जरिए 61 सांसदों का जादुई आंकड़ा जुटा पाएगा?

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