जीएसटी काउंसिल का बड़ा कदम: टैक्स अधिकारियों के सीधे गिरफ्तारी अधिकार पर रोक और 5 करोड़ रुपये तक की छूट पर मंथनहिमाचल प्रवास पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु, सुरक्षा में 600 जवान मुस्तैद और मनाली में व्यापक रूट डायवर्जनबीते कल की घटनाओं पर सट्टा: विवादित सच तय करने के लिए खुला नया प्रेडिक्शन मार्केटअमेरिकी बॉन्ड यील्ड और डॉलर की मजबूती के बीच सोने की रफ्तार थमी, जानिए अहम सपोर्ट और रेजिस्टेंस स्तरयूरोपीय सेंट्रल बैंक के लेन ने दी धीमी आर्थिक वृद्धि की चेतावनी, वैश्विक मुद्रा और कमोडिटी बाजारों में दिखा दबावयूरोपीय सेंट्रल बैंक के नागेल ने मुद्रास्फीति के बढ़ते जोखिमों पर दी चेतावनी, वैश्विक मुद्राओं और जिंस बाजार में तेज हलचलमल्लिका फतेहपुरिया ने घटाया 35 किलो वजन, साझा किए फिटनेस से जुड़े 35 व्यावहारिक सबकघर में बेकार पड़े डिब्बों और बाल्टियों से बनाएं खूबसूरत प्लांटर, पेंट और जूट से मिलेगा नया रूपअमेरिकी सर्विस पीएमआई से मजबूत अर्थव्यवस्था के संकेत, सोने और डॉलर में हलचलविंटेज किस-लॉक बैग्स की धमाकेदार वापसी, रनवे से रेड कार्पेट तक छाया दादी के बटुए वाला अंदाज
कनाडा की शीर्ष अदालत तय करेगी सिख वकील की धार्मिक स्वतंत्रता और राजशाही के प्रति वफादारी की कानूनी सीमादुनिया
5 अक्तू॰ 2026, 3:22 pm (35 मिनट पहले)· 0

कनाडा की शीर्ष अदालत तय करेगी सिख वकील की धार्मिक स्वतंत्रता और राजशाही के प्रति वफादारी की कानूनी सीमा

अल्बर्टा में वकालत शुरू करने के लिए ब्रिटिश राजशाही के प्रति निष्ठा की अनिवार्य शपथ के खिलाफ अमृतधारी सिख वकील प्रभजोत सिंह विरिंग की याचिका पर अब कनाडा का सुप्रीम कोर्ट अंतिम फैसला सुनाएगा।

कनाडा के अल्बर्टा प्रांत में धार्मिक विश्वास और पेशेवर दायित्व के बीच का टकराव अब देश की सबसे बड़ी न्यायिक चौखट तक पहुंच चुका है। एडमॉन्टन शहर के निवासी और अमृतधारी सिख प्रभजोत सिंह विरिंग ने वकालत का लाइसेंस हासिल करने के लिए ब्रिटिश राजा के प्रति सच्ची निष्ठा की अनिवार्य शपथ लेने से साफ इनकार कर दिया था। उनका स्पष्ट रुख है कि उनके धार्मिक मूल्य किसी सांसारिक शासक के प्रति पूर्ण समर्पण की गवाही देने की इजाजत नहीं देते। इस रुख के कारण शुरू हुआ कानूनी विवाद अब सुप्रीम कोर्ट ऑफ कनाडा के समक्ष विचारणीय है, जहां देश की सर्वोच्च पीठ तय करेगी कि क्या संवैधानिक धार्मिक स्वतंत्रता किसी पेशेवर अनिवार्यता से ऊपर है।

अमृतधारी परंपरा और सांसारिक निष्ठा का टकराव

प्रभजोत सिंह विरिंग एक अमृतधारी सिख हैं, जिन्होंने पवित्र गुरु ग्रंथ साहिब की उपस्थिति में केवल सर्वशक्तिमान अकाल पुरख के प्रति अपनी अटूट वफादारी का संकल्प लिया है। सिख धर्म की इस मर्यादा के अनुसार, एक अमृतधारी व्यक्ति किसी भी भौतिक सम्राट, राजा या रानी के समक्ष वैसी ही निष्ठा की शपथ नहीं दोहरा सकता। विरिंग का कहना है कि वकालत के पेशे में प्रवेश करने के लिए जब उनसे ब्रिटिश राजशाही के प्रति वफादार रहने की मांग की गई, तो यह सीधे तौर पर उनकी आंतरिक आस्था पर आघात जैसा था।

ये भी पढ़ें

अल्बर्टा प्रांत के मौजूदा नियमों के मुताबिक, किसी भी व्यक्ति को बार में दाखिला लेने और वकील के तौर पर अभ्यास करने से पहले राजा (पूर्व में महारानी) के प्रति सच्ची निष्ठा व्यक्त करना अनिवार्य है। इस कानूनी प्रावधान ने विरिंग को एक विकट दोराहे पर ला खड़ा किया, जहां उन्हें या तो अपनी धार्मिक आस्था से समझौता करना पड़ता या फिर वर्षों की मेहनत से तैयार किए गए वकालत के करियर को छोड़ना पड़ता। दोनों विकल्पों को नकारते हुए उन्होंने कानून की स्थापित व्यवस्था को अदालत में चुनौती देने का साहसिक मार्ग चुना।

अदालती संघर्ष का घटनाक्रम और कानूनी मोड़

विरिंग ने अपने अधिकारों की रक्षा के लिए जून 2022 में अल्बर्टा सरकार तथा अल्बर्टा लॉ सोसाइटी के विरुद्ध औपचारिक मुकदमा दायर किया। अपनी याचिका में उन्होंने तर्क दिया कि ब्रिटिश क्राउन के प्रति ली जाने वाली यह अनिवार्य शपथ उनके मौलिक और संवैधानिक अधिकारों का सीधा हनन करती है, विशेष रूप से धार्मिक स्वतंत्रता की उस गारंटी का जो कनाडाई संविधान प्रत्येक नागरिक को देता है।

न्यायिक प्रक्रिया के शुरुआती चरण में विरिंग को विफलता का सामना करना पड़ा। अक्टूबर 2023 में कोर्ट ऑफ किंग्स बेंच ने उनके इस दावे को खारिज कर दिया था। उस समय अदालत का विचार था कि यह शपथ केवल एक प्रतीकात्मक औपचारिकता है और इससे याचिकाकर्ता की धार्मिक स्वतंत्रता का कोई वास्तविक या प्रत्यक्ष नुकसान नहीं होता। हालांकि, विरिंग इस व्याख्या से संतुष्ट नहीं हुए और उन्होंने इस आदेश के विरुद्ध उच्च पीठ में अपील दायर कर दी।

अपील अदालत का ऐतिहासिक रुख और कानून में बदलाव का निर्देश

लंबी कानूनी बहस के बाद 16 दिसंबर 2025 को अल्बर्टा की अपील अदालत ने एक अत्यंत महत्वपूर्ण फैसला सुनाया। तीन न्यायाधीशों की विशेष पीठ ने सर्वसम्मति से प्रभजोत सिंह विरिंग के पक्ष में फैसला देते हुए निचली अदालत का निष्कर्ष पलट दिया। अपील अदालत ने स्पष्ट किया कि वकीलों पर राजा के प्रति निष्ठा की शपथ लेने का दबाव बनाना अनुचित और असंवैधानिक है क्योंकि यह उनकी धार्मिक स्वतंत्रता का गंभीर उल्लंघन करता है।

अपील अदालत ने इस आधार पर प्रांतीय कानून में आवश्यक संशोधन करने या संबंधित प्रावधान को निरस्त करने का निर्देश जारी किया, ताकि वास्तविक धार्मिक आधार पर इस शपथ से छूट का कानूनी प्रावधान किया जा सके। अदालत के इस फैसले से विरिंग की लंबी कानूनी कोशिशों को बड़ी मान्यता मिली।

अन्य कनाडाई प्रांतों की स्थिति और अल्बर्टा सरकार की चुनौती

कनाडा के कई अन्य प्रांतों में इस तरह की औपनिवेशिक शपथ को लेकर पहले ही प्रगतिशील बदलाव किए जा चुके हैं। ब्रिटिश कोलंबिया, सस्केचवान और ओन्टारियो जैसे क्षेत्रों में वकीलों के लिए राजा के प्रति शपथ लेने की अनिवार्यता को समाप्त कर दिया गया है अथवा इसके स्थान पर वैकल्पिक व्यवस्था उपलब्ध कराई गई है। इन प्रांतों में धार्मिक या नैतिक मान्यताओं के आधार पर छूट की स्पष्ट व्यवस्था मौजूद है। अल्बर्टा की अपील अदालत का निर्देश भी प्रांत को इसी आधुनिक दिशा में ले जाने वाला कदम था।

इसके विपरीत, अल्बर्टा सरकार ने अपील अदालत के इस आदेश को स्वीकार नहीं किया। सरकार का मानना था कि इस कानूनी बिंदु पर अंतिम स्पष्टता आवश्यक है, जिसके चलते फरवरी 2026 में प्रांतीय प्रशासन ने सुप्रीम कोर्ट ऑफ कनाडा में विशेष अपील दाखिल कर दी। देश की सर्वोच्च अदालत ने अगस्त 2026 में इस मामले को औपचारिक सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करते हुए अपनी स्वीकृति दे दी।

सुप्रीम कोर्ट में अंतिम सुनवाई और इस मामले का व्यापक प्रभाव

अब इस समूचे विवाद का अंतिम निपटारा कनाडा की सर्वोच्च अदालत द्वारा किया जाना है। शीर्ष अदालत की आगामी सुनवाई से यह तय होगा कि क्या अल्बर्टा प्रांत वकीलों से क्राउन के प्रति निष्ठा की मांग करने का संवैधानिक अधिकार रखता है अथवा धार्मिक आस्था के आधार पर छूट पाना प्रत्येक नागरिक का अभिन्न अधिकार है। यह निर्णय पूरे देश के विधिक और संवैधानिक ढांचे के लिए एक अहम नजीर साबित हो सकता है।

वर्ष 2022 से आरंभ हुआ यह कानूनी संघर्ष कनाडा के व्यापक सिख समुदाय और अन्य अल्पसंख्यक वर्गों के लिए गहरी रुचि का विषय बना हुआ है। यह प्रकरण इस बात की मिसाल बनकर उभरा है कि कैसे एक व्यक्ति ने अपने आस्थावान अस्तित्व की रक्षा के लिए संस्थागत परंपराओं को संवैधानिक कसौटी पर कसने का दृढ़ निश्चय किया।

सवाल-जवाब

प्रभजोत सिंह विरिंग कौन हैं और उनका मुख्य विवाद क्या है?
प्रभजोत सिंह विरिंग एडमॉन्टन के एक अमृतधारी सिख हैं, जिन्होंने अल्बर्टा में वकील बनने के लिए ब्रिटिश राजा के प्रति अनिवार्य निष्ठा की शपथ लेने से अपनी धार्मिक आस्था के आधार पर इनकार कर दिया है।
अमृतधारी सिख के लिए राजा की शपथ लेना क्यों आपत्तिजनक था?
अमृतधारी परंपरा के तहत व्यक्ति गुरु ग्रंथ साहिब के समक्ष केवल अकाल पुरख के प्रति निष्ठा का संकल्प लेता है, जो किसी सांसारिक शासक के प्रति वैसी निष्ठा जताने की अनुमति नहीं देता।
अल्बर्टा की अपील अदालत ने इस मामले में क्या फैसला दिया था?
16 दिसंबर 2025 को अपील अदालत की तीन जजों की पीठ ने सर्वसम्मति से इस शपथ की अनिवार्यता को असंवैधानिक करार दिया और धार्मिक आधार पर छूट देने का निर्देश दिया।
क्या कनाडा के अन्य प्रांतों में भी राजा के प्रति शपथ अनिवार्य है?
नहीं, ब्रिटिश कोलंबिया, सस्केचवान और ओन्टारियो जैसे प्रांतों में राजा के प्रति शपथ की अनिवार्यता को पहले ही समाप्त कर दिया गया है या वैकल्पिक प्रावधान उपलब्ध कराए गए हैं।
अल्बर्टा सरकार ने इस मामले में आगे क्या कदम उठाया?
अल्बर्टा सरकार ने अपील अदालत के फैसले के खिलाफ फरवरी 2026 में सुप्रीम कोर्ट ऑफ कनाडा में अपील की, जिसे अदालत ने अगस्त 2026 में सुनवाई के लिए स्वीकार कर लिया।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Karan Malhotra@karan-malhotra·15 मिनट पहले

शपथ सिर्फ एक रस्म है या सच में आस्था पर असर डालती है, सुप्रीम कोर्ट का फैसला इस पर क्या रुख लेगा देखना दिलचस्प होगा।

Li Wei@li-wei·15 मिनट पहले

करन, सही कहा आपने! किंग्ज़ बेंच ने तो इसे सिर्फ़ एक 'प्रतीकात्मक औपचारिकता' मानकर खारिज कर दिया था, अब देखते हैं सुप्रीम कोर्ट क्या कहता है।

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp