हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सुरक्षा समीकरणों को नया आकार देते हुए भारत और जापान ने अपने रक्षा संबंधों को और प्रगाढ़ करने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं। फिलीपींस के सेबू शहर में आयोजित एडीएफएम-प्लस बैठक के दौरान रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की मुलाकात जापान के रक्षा मंत्री शिंजिरो कोइज़ुमी से हुई। इस उच्चस्तरीय संवाद में दोनों एशियाई दिग्गजों ने इंडो-पैसिफिक रीजन में शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए अपनी साझा प्रतिबद्धता दोहराई और कई अहम रणनीतिक मुद्दों पर सहमति बनाई।
समुद्री सुरक्षा और तकनीकी साझेदारी पर जोर
बैठक का मुख्य केंद्र बिंदु समुद्री सुरक्षा और तकनीकी सहयोग को बढ़ाना रहा। दोनों देशों के बीच नौसैनिक जहाजों के डिजाइन तैयार करने और उनके निर्माण में संयुक्त सहयोग की संभावनाओं पर विस्तार से विचार विमर्श किया गया। इसके अलावा, समुद्र के भीतर बिछाई जाने वाली बारूदी सुरंगों का प्रभावी ढंग से मुकाबला करने की क्षमताओं को उन्नत करने पर भी विशेष जोर दिया गया। रणनीतिक जानकारों का मानना है कि इस तरह का सहयोग दोनों देशों की सामरिक आवश्यकताओं को पूरा करने में मददगार साबित होगा, जिसमें भारतीय नौसेना के उप प्रमुख की हालिया जापान यात्रा ने भी अहम भूमिका निभाई है।
वायु सेनाओं के बीच बढ़ता सामंजस्य
समुद्र के साथ-साथ आसमान में भी भारत और जापान के बीच रक्षा सहयोग लगातार गहरा हो रहा है। दोनों नेताओं ने अपनी वायु सेनाओं के बीच चल रहे तालमेल की प्रगति पर संतोष व्यक्त किया। हाल ही में संपन्न हुए 'वीर गार्जियन 26' युद्धाभ्यास का विशेष रूप से उल्लेख किया गया, जिसमें पहली बार जापानी लड़ाकू विमानों ने भारत की धरती पर अपनी ताकत का प्रदर्शन किया था। इस अभ्यास के दौरान जापान की वायु आत्मरक्षा सेना के प्रमुख का भारत दौरा भी हुआ था, जिसे दोनों देशों के द्विपक्षीय सैन्य संबंधों में एक मील का पत्थर माना जा रहा है।
वायु सेनाओं के इस बढ़ते जुड़ाव से दोनों देशों के बीच रक्षा मामलों में आपसी समझ और रणनीतिक समन्वय और अधिक मजबूत हुआ है। रक्षा क्षेत्र के अधिकारियों का मानना है कि भविष्य में इस तरह के संयुक्त अभ्यास क्षेत्रीय सुरक्षा को स्थिरता प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
रक्षा उद्योगों की साझेदारी और आगामी कूटनीतिक बैठकें
सैन्य साजो-सामान के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता और आपसी सहयोग को बढ़ावा देने के लिए टोक्यो में हाल ही में भारत-जापान डिफेंस इंडस्ट्री फोरम का आयोजन किया गया था। इस मंच पर दोनों देशों की लगभग 40 प्रमुख कंपनियों ने हिस्सा लिया था और रक्षा उपकरणों के सह-उत्पादन तथा साझेदारी की संभावनाओं को तलाशा गया था।
इस गतिशीलता को आगे बढ़ाते हुए, राजनाथ सिंह और शिंजिरो कोइज़ुमी ने इस साल के अंत में टोक्यो में होने वाली बैठकों की तैयारियों को तेज करने पर सहमति जताई है। इसके तहत भारत-जापान विदेश और रक्षा मंत्रियों की चौथी '2 प्लस 2' वार्ता के साथ-साथ दोनों देशों के रक्षा मंत्रियों की द्विपक्षीय बैठक भी टोक्यो में आयोजित की जाएगी। इस उच्चस्तरीय कूटनीतिक तंत्र के माध्यम से दोनों देश अपने सामरिक रिश्तों को एक नए स्तर पर ले जाने की योजना बना रहे हैं।






















