पेरेंट्स की ये 5 गलतियां घर में बढ़ाती हैं भाई-बहनों के बीच मनमुटाव, ताउम्र रिश्तों में आ जाती है कड़वाहटरिवाइव हुआ समझौता: वोक्सवैगन ग्रुप के साथ एआई असिस्टेंट साझा करेगी रिवियनराशिद खान ने टी20 इंटरनेशनल क्रिकेट में रचा नया इतिहास, बने 200 विकेट लेने वाले दुनिया के पहले गेंदबाजट्रेन में मिडिल बर्थ खोलने को लेकर रेलवे के नियम, जानिए सफर के दौरान किन बातों का रखें ध्यानस्पेन ट्रेन हादसा: 69 लोगों की मौत, युवा एथलीट और पूर्व मंत्री भी शामिलबराबरी और साझेदारी का नया दौर, करवा चौथ पर पतियों के उपवास रखने की अनूठी परंपरागुवाहाटी के ओडीआईएन एक्सपीरियंसेज ने जीता पूर्वी भारत के सर्वश्रेष्ठ नाइटक्लब का राष्ट्रीय खिताबडिजिटल अरेस्ट और साइबर ठगी पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, बैंक की लापरवाही पर पीड़ितों को मुआवजा दिलाने की तैयारीपहाड़ी धाम की थाली का गौरव: बिना प्याज़-टमाटर ऐसे तैयार करें क्रीमी और सुगंधित हिमाचली चना मदराकुंभ राशिफल 30 अक्टूबर 2026: कार्यक्षेत्र में जल्दबाजी से बचें और बनाएं ठोस वित्तीय योजना
ईरान के परमाणु ठिकानों पर हमलों के बाद क्या है हालात? आईएईए प्रमुख राफेल ग्रॉसी के खुलासे से मची हलचलदुनिया
29 अक्तू॰ 2026, 3:37 pm (15 घंटे पहले)· 2

ईरान के परमाणु ठिकानों पर हमलों के बाद क्या है हालात? आईएईए प्रमुख राफेल ग्रॉसी के खुलासे से मची हलचल

संयुक्त राष्ट्र परमाणु एजेंसी के प्रमुख राफेल ग्रॉसी ने कहा है कि जून 2025 के बाद से ऐसे कोई सबूत नहीं मिले हैं कि ईरान ने सैन्य हमलों में तबाह हुए अपने परमाणु केंद्रों की मरम्मत की हो। इस बीच संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की बैठक में अमेरिका और ईरान के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली।

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में ईरान के परमाणु कार्यक्रमों को लेकर एक बार फिर से तनाव गहरा गया है। अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान के परमाणु प्रतिष्ठानों को निशाना बनाए जाने के बाद वहां की वास्तविक स्थिति क्या है, इसको लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा तेज हो गई है। संयुक्त राष्ट्र की परमाणु एजेंसी के प्रमुख राफेल ग्रॉसी की ओर से दिए गए एक बयान के बाद इन सवालों ने फिर से तूल पकड़ लिया है। राफेल ग्रॉसी ने स्पष्ट किया है कि जून 2025 से लेकर अब तक उन्हें ऐसा कोई भी संकेत या सबूत नहीं मिला है, जिससे यह साबित हो सके कि ईरान ने 2025 और 2026 के दौरान हुए सैन्य हमलों में क्षतिग्रस्त हुए अपने परमाणु केंद्रों की मरम्मत या पुनर्निर्माण का कोई भी प्रयास किया हो।

अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी के पास यूरेनियम भंडार की सटीक जानकारी का अभाव

अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी यानी IAEA के प्रमुख ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की बैठक के दौरान ईरान के समक्ष एक कड़ा आग्रह रखा है। उन्होंने तेहरान सरकार से अपने सभी परमाणु केंद्रों का निरीक्षण करने की अनुमति देने को कहा है, जिनमें वे ठिकाने भी शामिल हैं जो हालिया सैन्य हमलों में बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए थे। आईएईए के पास मौजूद आंकड़ों के मुताबिक, ईरान के कब्जे में फिलहाल 440.9 किलोग्राम यूरेनियम का एक बड़ा भंडार सुरक्षित है, जिसे 60 प्रतिशत तक संवर्धित किया जा चुका है। परमाणु हथियारों के निर्माण के लिए अमूमन यूरेनियम को लगभग 90 प्रतिशत तक संवर्धित किए जाने की आवश्यकता होती है। हालांकि, पिछले साल जून में हुए अमेरिकी हमलों के बाद से एजेंसी के निरीक्षक इस बात की पुष्टि करने में असमर्थ रहे हैं कि इस खतरनाक भंडार की मौजूदा मैदानी स्थिति आखिर क्या है।

ये भी पढ़ें

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह तबाह करने का दावा

दूसरी तरफ अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लगातार यह दावा करते आ रहे हैं कि 28 फरवरी को ईरान के विभिन्न परमाणु ठिकानों पर सुनियोजित हमले किए गए थे। अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के कारण ईरान का पूरा परमाणु कार्यक्रम जड़ से तबाह हो गया था। डोनाल्ड ट्रंप ने 28 फरवरी को ईरान के खिलाफ सैन्य संघर्ष की शुरुआत करने के पीछे यह मुख्य वजह बताई थी कि तेहरान को किसी भी कीमत पर परमाणु हथियार विकसित करने से रोकना जरूरी था। हालांकि, आईएईए प्रमुख राफेल ग्रॉसी के हालिया बयान से यह बात अभी भी स्पष्ट नहीं हो पाई है कि उन हमलों में वास्तव में परमाणु केंद्रों को कितना भारी नुकसान पहुंचा था या फिर ईरान के परमाणु कार्यक्रम की जमीनी हकीकत इस समय क्या है। इस अनिश्चितता को दूर करने के लिए मौके पर जाकर निरीक्षण करना और परमाणु सामग्री की कड़ी निगरानी करना बेहद अनिवार्य है।

सुरक्षा परिषद की बैठक में आमने-सामने आए अमेरिका और ईरान

परमाणु अप्रसार से जुड़े दायित्वों का लगातार उल्लंघन करने के गंभीर मामलों को देखते हुए आईएईए ने ईरान के खिलाफ यह प्रकरण संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद को सौंप दिया था। इसके बाद बहरीन, डेनमार्क, लातविया, फ्रांस, ब्रिटेन और अमेरिका की तरफ से औपचारिक अनुरोध किया गया, जिसके परिणामस्वरूप मंगलवार को सुरक्षा परिषद की इस उच्चस्तरीय बैठक का आयोजन किया गया। इस बैठक को टालने के लिए ईरान के पारंपरिक सहयोगी माने जाने वाले रूस और चीन ने पूरी कोशिश की थी, लेकिन उनकी यह कोशिश नाकाम साबित हुई। परमाणु अप्रसार संधि के नियमों के तहत ईरान के लिए यह कानूनी रूप से पूरी तरह अनिवार्य है कि वह अपने तमाम परमाणु पदार्थों और गतिविधियों की सही जानकारी दे। साथ ही, उसे आईएईए के निरीक्षकों को इन स्थलों की जांच करने की पूरी छूट देनी होगी ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि परमाणु सामग्री का उपयोग केवल शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए ही हो रहा है या नहीं।

ईरान के उपराजदूत गुलामहुसैन दारजी ने सुरक्षा परिषद की चुप्पी पर उठाए सवाल

संयुक्त राष्ट्र में ईरान के उपराजदूत गुलामहुसैन दारजी ने अमेरिका और इजराइल द्वारा किए गए हमलों के बाद सुरक्षा परिषद की तरफ से साधी गई चुप्पी की कड़ी आलोचना की। उन्होंने इन तमाम हमलों को सीधे तौर पर ईरान के विरुद्ध एक आक्रामक युद्ध करार दिया और अमेरिका पर सीधे तौर पर ईरानी नागरिकों के खिलाफ गंभीर युद्ध अपराध करने का संगीन आरोप लगाया। हालांकि, गुलामहुसैन दारजी ने विदेशी निरीक्षकों को ईरान की धरती पर आने की अनुमति दिए जाने की मांग पर अपने भाषण में कुछ भी नहीं कहा। इसके विपरीत उन्होंने उल्टा सवाल उठाते हुए कहा कि इजरायल के पास तो खुद परमाणु हथियार मौजूद हैं, लेकिन दुनिया भर के देशों को मुख्य चिंता इस बात की सता रही है कि ईरान की सीमा के भीतर इस समय अंतरराष्ट्रीय निरीक्षक मौजूद नहीं हैं।

माइक वाल्ट्ज ने ईरान को करार दिया क्रूर तानाशाही वाला देश

दूसरी तरफ इजरायल ने अपने आधिकारिक रुख में कभी भी इस बात की खुलकर पुष्टि नहीं की है कि उसके पास परमाणु हथियार हैं या नहीं। संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका के राजदूत माइक वाल्ट्ज ने ईरान की मौजूदा सरकार को एक क्रूर तानाशाही वाला देश करार दिया। उन्होंने खुली सभा में सवाल उठाया कि क्या ईरानी राजदूत बहरीन पर हमला करने के संदर्भ में वहां के राजदूत से सार्वजनिक रूप से माफी मांगना पसंद करेंगे। माइक वाल्ट्ज ने कहा कि उन्होंने अमेरिकी प्रशासन के खिलाफ लगातार झूठे आरोप सुने हैं, लेकिन आज की इस बैठक में उन्हें इस बात का कोई भी संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं मिला कि ईरान परमाणु सामग्री की निगरानी और उसकी जांच से जुड़े अपने अंतरराष्ट्रीय दायित्वों को पूरा करने में बार-बार क्यों विफल हो रहा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि आईएईए ने ईरान से कुछ बेहद बुनियादी सवाल पूछे हैं और तेहरान के प्रतिनिधियों के लिए यही बेहतर होगा कि वे उन सभी सवालों के सीधे जवाब देना शुरू करें। वाल्ट्ज ने दो टूक शब्दों में कहा कि यहां पर उनके किसी भी तरह के झूठ नहीं चलने वाले हैं।

डोनाल्ड ट्रंप की नई सैन्य कार्रवाई की चेतावनी और क्षेत्र में बढ़ता तनाव

इस बीच भू-राजनीतिक मोर्चे पर तनाव तब और अधिक बढ़ गया जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ नए सिरे से मिलिट्री एक्शन शुरू करने का स्पष्ट संकेत दे दिया। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि यदि तेहरान किसी भी समझदारी भरे समझौते के लिए तैयार नहीं होता है, तो वॉशिंगटन प्रशासन एक और बड़े सैन्य ऑपरेशन को अंजाम दे सकता है। इस बड़ी चेतावनी से कुछ ही घंटे पहले अमेरिका के एक कूटनीतिक दूत ने यह बयान दिया था कि इसी सप्ताहांत तक ईरान की सरजमीं पर फिर से बड़े पैमाने पर हमले देखने को मिल सकते हैं।

सवाल-जवाब

आईएईए प्रमुख राफेल ग्रॉसी ने क्या बयान दिया है?
राफेल ग्रॉसी ने कहा है कि जून 2025 से ऐसे कोई संकेत नहीं मिले हैं कि ईरान ने सैन्य हमलों में क्षतिग्रस्त हुए परमाणु केंद्रों की मरम्मत की हो।
ईरान के पास कितना संवर्धित यूरेनियम है?
आईएईए के मुताबिक ईरान के पास 440.9 किलोग्राम यूरेनियम का भंडार है जिसे 60 प्रतिशत तक संवर्धित किया गया है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने क्या दावा किया है?
डोनाल्ड ट्रंप का दावा है कि 28 फरवरी को किए गए अमेरिकी हमलों ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह तबाह कर दिया था।
सुरक्षा परिषद की बैठक किसने बुलाई थी?
बहरीन, डेनमार्क, लातविया, फ्रांस, ब्रिटेन और अमेरिका के अनुरोध पर सुरक्षा परिषद की बैठक बुलाई गई थी।
संयुक्त राष्ट्र में ईरान के उपराजदूत कौन हैं?
संयुक्त राष्ट्र में ईरान के उपराजदूत गुलामहुसैन दारजी हैं।
संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका के राजदूत कौन हैं?
संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका के राजदूत माइक वाल्ट्ज हैं।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Ayesha Siddiqui@ayesha-siddiqui·13 घंटे पहले

अमेरिका के हमलों के बाद भी ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर धुंध छाई हुई है। जब तक यूएन के लोग खुद जाकर वहां हालात नहीं देख लेते, तब तक कुछ साफ नहीं कहा जा सकता।

Omar AL Mansoori@omar-mansoori·14 घंटे पहले

जब मैं तेهرान में था, तब भी हर कोई यही सोचता था कि इन हमलों के बाद असल में बचा क्या है। ग्रॉसी की यह बात सच लगती है कि जब तक टीम खुद अंदर जाकर न देखे, तब तक अंदाज़ा लगाना मुश्किल है कि यूरेनियम का वह बड़ा जखीरा अब किस हालत में है।

Carlos Mendoza@carlos-mendoza·14 घंटे पहले

ओमर, तुम्हारी बात ठीक है कि जब तक टीम अंदर न जाए कुछ साफ़ नहीं होगा, पर क्या ईरान सच में इतनी आसानी से आईएईए के निरीक्षकों को अंदर जाने देगा?

Arjun Mehta@arjun-mehta·14 घंटे पहले

जब मैं कुछ साल पहले वियना में आईएईए के मुख्यालय के पास एक कॉन्फ्रेंस कवर कर रहा था, तब अधिकारियों के चेहरों पर यही तनाव साफ दिखता था कि निरीक्षण न होने पर क्या छुपाया जा सकता है। अब जब ग्रॉसी खुद कह रहे हैं कि मरम्मत के सबूत नहीं मिले हैं, तो सुरक्षा परिषद में इस तकरार का रुकना मुश्किल लगता है।

Li Wei@li-wei·14 घंटे पहले

अर्जुन, वियना में मेरे एक सूत्र ने भी कुछ समय पहले यही कहा था कि बिना ऑन-साइट निरीक्षण के हालात का अंदाज़ा लगाना असंभव है।

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp