पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की के बीच इसी महीने की 7 तारीख को एक अहम रक्षा समझौता हुआ था, जिसे मक्का संयुक्त रक्षा समझौते के नाम से जाना जाता है। इस त्रिपक्षीय समझौते के नियमों के मुताबिक, अगर इन तीनों में से किसी भी एक राष्ट्र पर कोई सशस्त्र हमला होता है, तो उसे तीनों देशों पर हुआ हमला माना जाएगा। इस रणनीतिक घटनाक्रम के सामने आने के बाद अब बांग्लादेश की तरफ से भी इस पैक्ट को लेकर बड़ा बयान सामने आया है। बांग्लादेश ने आधिकारिक तौर पर स्पष्ट किया है कि उसे सऊदी अरब, तुर्की और पाकिस्तान के साथ इस रक्षा समझौते का हिस्सा बनने में किसी भी तरह के खतरे या जोखिम का अंदेशा नहीं है। इसके साथ ही सरकार की तरफ से इस बात पर भी जोर दिया गया है कि इस कदम से ढाका के अन्य वैश्विक साझेदारों के साथ उसके कूटनीतिक रिश्तों पर किसी प्रकार की पाबंदी या रोक नहीं लगेगी।
मुस्लिम परिवार का आंतरिक मामला
इस पूरे घटनाक्रम पर मीडिया के सामने अपनी बात रखते हुए विदेश मामलों के राज्य मंत्री हुमायूं कबीर ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान अहम टिप्पणियां कीं। इससे पहले देश के विदेश मंत्री खलीलुर रहमान ने भी संसद के भीतर स्पष्ट किया था कि अगर इस समझौते के लिए कोई औपचारिक निमंत्रण मिलता है, तो बांग्लादेश इस दिशा में सकारात्मक तरीके से विचार करेगा। उन्होंने इस रक्षा व्यवस्था को एक मुस्लिम परिवार का अंदरूनी मामला करार दिया था। उनका कहना था कि इस विषय पर बाहरी ताकतों या अन्य देशों के चिंतित होने की कोई ठोस वजह या गुंजाइश नहीं बनती है।
विचार-विमर्श और कूटनीतिक संतुलन
विदेश मामलों के राज्य मंत्री हुमायूं कबीर ने जानकारी दी है कि बांग्लादेश फिलहाल इस पूरे मामले पर गहराई से विचार-विमर्श कर रहा है। उन्होंने बताया कि हमारे सभी द्विपक्षीय साझेदारों के साथ इस विषय पर बातचीत बेहद सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रही है। उनका यह भी मानना था कि वर्तमान दौर की अंतरराष्ट्रीय राजनीति की बदलती हुई गतिशीलता को ध्यान में रखते हुए, बांग्लादेश जैसे विकासशील देशों को अपनी विदेश नीति और सुरक्षा सहयोग के मामलों में अत्यधिक लचीला और दूरदर्शी दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता है। कबीर के अनुसार, इसी व्यावहारिक नीति के तहत देश अपने अंतरराष्ट्रीय संबंधों में पूरा संतुलन कायम रखेगा। उन्होंने कहा कि आज के इस अनिश्चित और संकट से घिरे वैश्विक राजनीतिक माहौल में किसी एक विशिष्ट क्षेत्र या गुट के साथ जुड़ने का अर्थ यह कदापि नहीं है कि आप अन्य क्षेत्रों या गठबंधनों के लिए अपने दरवाजे बंद कर रहे हैं और न ही यह आपके कूटनीतिक दायरे को सीमित करता है।
सऊदी अरब के साथ उच्चस्तरीय चर्चा
हुमायूं कबीर ने अपने हालिया दौरों का जिक्र करते हुए बताया कि पिछले सप्ताह जेद्दा की यात्रा के दौरान उन्होंने सऊदी विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान अल सऊद के साथ कई अहम द्विपक्षीय बैठकों में हिस्सा लिया था। इन बैठकों के दौरान इस रक्षा समझौते पर भी विस्तार से चर्चा की गई, जहां उनके वार्ताकारों की तरफ से बेहद सकारात्मक प्रतिक्रिया देखने को मिली थी। इससे पहले गुरुवार को भी संसद सत्र के दौरान एक निर्दलीय सांसद की तरफ से मक्का समझौते पर देश के रुख को लेकर सवाल उठाया गया था, जिसके जवाब में विदेश मंत्री रहमान ने दोहराया था कि हम इस समझौते की पूरी प्रक्रिया को बहुत सकारात्मक नजरिए से देख रहे हैं।



















