कोरियाई प्रायद्वीप में सैन्य तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है, जहां उत्तर कोरिया ने अपने पूर्वी समुद्री तट की दिशा में कई बैलिस्टिक मिसाइलों का परीक्षण किया है। दक्षिण कोरियाई सेना के ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के अनुसार, इन हथियारों को उत्तर कोरिया की राजधानी प्योंगयांग के करीबी क्षेत्रों से प्रक्षेपित किया गया। हाल के समय में प्योंगयांग की तरफ से उन्नत हथियारों के परीक्षणों में आई तेजी ने पड़ोसी मुल्कों की सुरक्षा चिंताओं को काफी बढ़ा दिया है, जिससे इस पूरे भूभाग में सामरिक अस्थिरता का खतरा पैदा हो गया है।
बीते कुछ वर्षों के सैन्य घटनाक्रम को देखें तो उत्तर कोरिया अपने अलग-अलग हवाई अड्डों और गुप्त ठिकानों का इस्तेमाल मिसाइल प्रक्षेपण के प्रमुख केंद्रों के रूप में करता रहा है। दक्षिण कोरिया की सेना की शुरुआती सूचना में यह स्पष्ट नहीं किया गया कि दागी गई मिसाइलों की कुल संख्या कितनी थी और उन्होंने हवा में कितनी दूरी तय की। इसी दौरान जापान के रक्षा मंत्रालय ने कम से कम दो मिसाइलों के दागे जाने की आधिकारिक पुष्टि की है। जापानी अधिकारियों के प्राथमिक आकलन के अनुसार, ये मिसाइलें जापान के विशेष आर्थिक क्षेत्र की सीमाओं से बाहर खुले समुद्र में जाकर गिरीं।
दक्षिण कोरिया के हाइपरसोनिक परीक्षण के बाद उपजा तनाव
उत्तर कोरिया की तरफ से यह आक्रामक सैन्य कदम दक्षिण कोरिया के हालिया रक्षा परीक्षण के कुछ ही दिनों बाद उठाया गया है। दक्षिण कोरिया ने 9 अक्टूबर को अपनी पहली स्वदेशी हाइपरसोनिक मिसाइल का सफल उड़ान परीक्षण किया था। इस आधुनिक हथियार को ध्वनि की रफ्तार से कम से कम पांच गुना अधिक गति से उड़ान भरने और विरोधी पक्ष के मिसाइल रक्षा तंत्र को मात देने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे म्युंग ने उस सफल परीक्षण को देश की पारंपरिक रक्षात्मक और मारक क्षमताओं को सुदृढ़ करने की दिशा में मील का पत्थर करार दिया था।
शस्त्रागार का आधुनिकीकरण और परमाणु क्षमता
सर्वोच्च नेता किम जोंग उन के दिशानिर्देशों के तहत उत्तर कोरिया अपने घातक हथियारों के जखीरे का निरंतर विस्तार कर रहा है। इस कार्यक्रम के केंद्र में परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम अत्याधुनिक मिसाइल प्रणालियों का विकास शामिल है। इससे पहले 3 अक्टूबर को किए गए एक परीक्षण को लेकर उत्तर कोरिया ने आधिकारिक तौर पर दावा किया था कि उसने मध्यम दूरी की हाइपरसोनिक मिसाइल का सफल परीक्षण पूरा किया है। प्योंगयांग के अनुसार, उस मिसाइल तकनीक का मुख्य उद्देश्य दक्षिण कोरिया और जापान के वायु रक्षा तंत्र को चकमा देना है।
ठप पड़ी कूटनीति और स्थायी दुश्मनी का दौर
हथियारों की इस होड़ के बीच दोनों कोरियाई देशों के बीच राजनयिक संवाद और आपसी सहयोग के तमाम रास्ते पूरी तरह बंद पड़े हैं। अमेरिका के साथ भी परमाणु निरस्त्रीकरण को लेकर होने वाली व्यापक वार्ताएं लंबे समय से गतिरोध का शिकार हैं। किम जोंग उन दक्षिण कोरिया को अपना स्थायी दुश्मन घोषित कर चुके हैं, जिसके चलते सीमा पर सैन्य तनातनी लगातार गंभीर रूप ले रही है। कूटनीतिक वार्ताओं के अभाव और लगातार जारी मिसाइल परीक्षणों के इस माहौल में कोरियाई प्रायद्वीप पर स्थाई शांति स्थापित करने के प्रयास लगातार कमजोर पड़ रहे हैं।

















