24 सितंबर से पुष्य नक्षत्र में मंगल का गोचर: 17 अक्टूबर तक इन 4 राशियों का चमकेगा भाग्य, शनि और मंगल की युति से होंगे बड़े लाभराजस्थान के चूरू में दर्दनाक हादसा: सालासर बालाजी दर्शन को निकले 3 पदयात्रियों की सड़क दुर्घटना में मौतशनि का रेवती नक्षत्र में गोचर: 27 दिनों तक 5 राशियों को मिलेगा बंपर लाभ, चमकेगा भाग्यवेनिस अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव के 83वें संस्करण में असम की फिल्म निर्माता डॉ. बॉबी शर्मा बरुआ को मिली नेटपैक जूरी में जगहभीलवाड़ा की दुर्गा देवी से सीखें पर्युषण पर्व के लिए कच्चे केले की स्वादिष्ट पाव भाजी बनाने की आसान विधिमहाभारत काल से जुड़ा है फरीदाबाद का तिलपत गांव, पांडवों की पांच गांवों की मांग और सूरदास मंदिर का गहरा इतिहासगमले और बगीचे में इस तरह उगाएं औषधीय पौधा शतावरी, किसानों और प्रकृति प्रेमियों के लिए कमाई का भी अवसरवायदा बाजार में एक्सपायरी वाले दिन अचानक उतार-चढ़ाव पर लगाम कसने के लिए सेबी ने तैयार किया नया प्रस्तावसीकर में रबी सीजन से ठीक पहले 7 नए सोलर प्लांट चालू, रोजाना 12 लाख यूनिट सौर ऊर्जा से चमकेगी कृषि बिजली आपूर्तिबाड़मेर जिला अस्पताल में शुरू हुई डिजिटल ई-प्रिस्क्रिप्शन व्यवस्था, QR कोड स्कैन करते ही मिलेगी मरीज की ओपीडी हिस्ट्री
रूस चीन और भारत के प्रमुख नेताओं की एकजुटता ने खींचा वैश्विक ध्यान, ब्रिक्स सम्मेलन से सामने आई ऐतिहासिक तस्वीरदुनिया
12 सित॰ 2026, 4:39 pm (48 मिनट पहले)· 0

रूस चीन और भारत के प्रमुख नेताओं की एकजुटता ने खींचा वैश्विक ध्यान, ब्रिक्स सम्मेलन से सामने आई ऐतिहासिक तस्वीर

ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की एक साथ मुस्कुराते और हाथ थामे तस्वीर ने अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में नई चर्चा छेड़ दी है। यह दृश्य भारत की स्वतंत्र विदेश नीति और ग्लोबल साउथ के बढ़ते प्रभाव को मजबूती से रेखांकित करता है।

ब्रिक्स सम्मेलन के अंतरराष्ट्रीय मंच पर चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के आगमन के साथ ही एक बेहद महत्वपूर्ण कूटनीतिक दृश्य सामने आया है। बहुपक्षीय बैठक के पहले ही दिन भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया पर एक ऐसी तस्वीर साझा की, जिसने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। इस तस्वीर में रूस, भारत और चीन यानी आरआईसी समूह की सामूहिक ताकत झलक रही है। तस्वीर के केंद्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खड़े हैं, जिनके एक तरफ रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और दूसरी तरफ चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग नजर आ रहे हैं। तीनों शीर्ष नेता एक-दूसरे का हाथ थामकर हंसते और बातचीत करते दिखाई दे रहे हैं। इस तस्वीर के सामने आते ही वैश्विक कूटनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई है।

नेताओं के बीच दिखी गर्मजोशी और व्यक्तिगत केमिस्ट्री

अंतरराष्ट्रीय कूटनीति की दुनिया में अक्सर लंबे-चौड़े भाषणों और आधिकारिक बयानों से कहीं अधिक प्रभाव कैमरे में कैद हुए अनौपचारिक पलों का होता है। ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान सामने आई यह तस्वीर भी इसी बात का प्रत्यक्ष प्रमाण है, जो दुनिया के सबसे प्रभावशाली नेताओं के बीच आपसी तालमेल का बड़ा संदेश दे रही है।

ये भी पढ़ें

इस तस्वीर में स्पष्ट तौर पर देखा जा सकता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और राष्ट्रपति शी जिनपिंग बेहद गर्मजोशी के साथ एक-दूसरे का हाथ थामे हुए हैं। औपचारिक सम्मेलनों से इतर नेताओं का यह दोस्ताना अंदाज अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उनकी गहरी व्यक्तिगत केमिस्ट्री को उजागर करता है। इसके अलावा सम्मेलन स्थल पर लाल कालीन पर प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति पुतिन का एक साथ मुस्कुराते हुए टहलना तथा ईरान के राष्ट्रपति पेजेश्कियान के साथ गहन बातचीत करना यह दर्शाता है कि इन राष्ट्राध्यक्षों के बीच संबंध केवल औपचारिक कूटनीति तक सीमित नहीं हैं।

वैश्विक मीडिया में इस तस्वीर के प्रसारित होते ही विभिन्न देशों के कूटनीतिक विशेषज्ञ इसे इस साल की सबसे ताकतवर तस्वीरों में से एक बता रहे हैं। इसका मुख्य कारण यह है कि ये तीनों नेता उन देशों का प्रतिनिधित्व करते हैं, जो मिलकर दुनिया की एक विशाल आबादी और वैश्विक अर्थव्यवस्था के बड़े हिस्से का संचालन करते हैं।

पश्चिमी देशों और अमेरिका की चिंता के कारण

जब भी भारत, रूस और चीन के शीर्ष नेता किसी साझा मंच पर इस प्रकार की आत्मीयता और एकजुटता प्रदर्शित करते हैं, तो वॉशिंगटन से लेकर यूरोपीय देशों की राजधानियों तक हलचल बढ़ना स्वाभाविक माना जाता है।

  • महासत्ता ब्लॉक के समक्ष चुनौती: अमेरिका और उसके सहयोगी पश्चिमी देश हमेशा से ब्रिक्स जैसे बहुपक्षीय संगठनों की गतिविधियों को काफी सतर्कता से देखते आए हैं। उन्हें इस बात की आशंका बनी रहती है कि रूस और चीन का बढ़ता तालमेल एक ऐसा आर्थिक गुट तैयार कर सकता है, जो अमेरिकी डॉलर के वर्चस्व और पश्चिमी देशों के वित्तीय दबदबे को सीधी चुनौती दे।
  • अमरीकी नीतियों पर असर: अमेरिका के राजनीतिक और नीतिगत गलियारों में इस तरह के कूटनीतिक दृश्यों पर हमेशा गंभीर मंथन होता है। वॉशिंगटन में यह चिंता प्रमुखता से देखी जाती है कि यदि भारत, रूस और चीन मिलकर अपनी आर्थिक और रणनीतिक प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाते हैं, तो वैश्विक फैसले लेने की शक्ति पश्चिमी ताकतों के हाथ से निकल सकती है।
  • ग्लोबल साउथ की मजबूत होती आवाज: इस ऐतिहासिक तस्वीर ने यह स्पष्ट संदेश भी दिया है कि अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था अब केवल कुछ पश्चिमी विकसित देशों के दिशानिर्देशों पर निर्भर नहीं रहेगी। उभरती हुई अर्थव्यवस्थाएं और विकासशील देश अब अपने आर्थिक एवं रणनीतिक फैसले स्वयं लेने में पूरी तरह सक्षम हैं।

भारत की स्वतंत्र विदेश नीति और संतुलन की रणनीति

इस पावरफुल फ्रेम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की केंद्रीय मौजूदगी भारत की उस सशक्त विदेश नीति का प्रत्यक्ष प्रमाण है, जिसे वैश्विक स्तर पर स्ट्रैटेजिक ऑटोनॉमी यानी स्वतंत्र विदेश नीति कहा जाता है। भारत किसी भी एक गुट या ब्लॉक के प्रभाव में आने के बजाय हमेशा अपने राष्ट्रीय हितों, आर्थिक प्राथमिकताओं और वैश्विक शांति को सर्वोपरि रखता है।

भारत की यह संतुलन साधने की क्षमता अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में विशिष्ट स्थान रखती है। एक तरफ जहां भारत अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के साथ क्वाड जैसे मंचों पर सक्रिय रूप से सहयोग करता है, वहीं दूसरी तरफ वह ब्रिक्स और एससीओ जैसे संगठनों में रूस और चीन के साथ बैठकर वैश्विक आर्थिक और वित्तीय मुद्दों पर विचार-विमर्श करता है। प्रधानमंत्री मोदी का यह रुख साबित करता है कि भारत किसी भी महाशक्ति के दबाव में आए बिना अपने अंतरराष्ट्रीय संबंधों को संतुलित रखना अच्छी तरह जानता है।

सवाल-जवाब

ब्रिक्स सम्मेलन में कौन-कौन से प्रमुख नेता एक साथ नजर आए?
सम्मेलन में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग एक साथ एक फ्रेम में नजर आए।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस मुलाकात की तस्वीर कहां साझा की?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सम्मेलन के पहले दिन अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल पर तीनों नेताओं के एक साथ की तस्वीर साझा की।
इस तस्वीर को अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में क्यों महत्वपूर्ण माना जा रहा है?
यह तस्वीर रूस, भारत और चीन (आरआईसी) की सामूहिक ताकत, गहरी व्यक्तिगत केमिस्ट्री और ग्लोबल साउथ के बढ़ते प्रभाव को प्रदर्शित करती है।
भारत की विदेश नीति के संदर्भ में इस मुलाकात का क्या अर्थ है?
यह मुलाकात भारत की स्ट्रैटेजिक ऑटोनॉमी यानी स्वतंत्र विदेश नीति को दर्शाती है, जिसके तहत भारत किसी एक गुट का हिस्सा बने बिना अपने राष्ट्रीय हितों के अनुसार सभी प्रमुख शक्तियों के साथ संबंध संतुलित रखता है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR