अमेरिकी नौसेना के एक युद्धपोत पर ऐसा संकट आन पड़ा जिसके बारे में कोई आसानी से यकीन नहीं कर पाएगा। इस जहाज पर तैनात सैनिकों को लगातार चार दिनों तक न तो ढंग से प्रसाधन की सुविधा मिल पाई, न ही एयर कंडीशनिंग चालू रही और न ही जहाज की रसोई किसी तरह का काम कर सकी। यह परेशान करने वाली घटना साउथ चाइना सी के अत्यधिक गर्म मौसम के बीच घटी। अमेरिकी नौसेना की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार यूएसएस बेनफोल्ड नामक गाइडेड-मिसाइल डिस्ट्रॉयर में अचानक ही बिजली से जुड़ी एक बड़ी तकनीकी बाधा खड़ी हो गई, जिसके कारण पोत की तमाम बुनियादी और जरूरी व्यवस्थाएं पूरी तरह ठप हो गईं।
यह पूरा वाकया 24 जुलाई का है जब यूएसएस बेनफोल्ड हिंद-प्रशांत क्षेत्र में अपने तयशुदा मिशन और अभियान पर निकला हुआ था। इसी सफर के दौरान अचानक उसके जनरेटर में भारी तकनीकी खराबी आ गई। बिजली गुल हो जाने के बाद जहाज ने अपनी गतिशीलता भी खो दी और वह अपने बूते आगे बढ़ने में असमर्थ हो गया। इस तकनीकी गड़बड़ी के कारण पोत पर भोजन पकाने की व्यवस्था, शौचालय, एयर कंडीशनिंग यूनिट और पीने के पानी की आपूर्ति में भी भारी व्यवधान उत्पन्न हो गया, जिससे हालात बद से बदतर हो गए।
इस पूरी स्थिति को और अधिक विकट बनाने वाला कारक साउथ चाइना सी का बेहद उमस भरा और गर्म मौसम था। जुलाई महीने के अंतिम दौर में इस इलाके का सामान्य दिन का तापमान करीब 32 से 37 डिग्री सेल्सियस के बीच दर्ज किया जा रहा था, जिससे बिना एसी के रह रहे सैनिकों की मुश्किलें कई गुना बढ़ गईं।
चार दिन तक कैसे काटा सैनिकों ने वक्त
अमेरिकी नौसेना के अधिकारियों के मुताबिक इस पूरी घटना में किसी भी सैनिक को शारीरिक चोट नहीं आई है। नौसेना ने इस संकट के दौरान चालक दल के साहस और विपरीत परिस्थितियों में उनके संयम की खुलकर सराहना की है। हालांकि एक पूर्व अमेरिकी नौसेना अधिकारी ने इस बात पर प्रकाश डाला कि इस तरह के हालात किसी भी सैन्यकर्मी के लिए भयंकर मानसिक तनाव और दबाव पैदा करने वाले होते हैं।
ऐसी आपात स्थिति में जहाज के भीतर इंजीनियर लगातार बिजली की बहाली के काम में जुटे रहते हैं, जबकि ऑपरेशन अधिकारी सैनिकों के मनोबल और चल रहे अभियान को लेकर खासे चिंतित रहते हैं। वहीं दूसरी ओर पोत के कमांडर को मौसम की मार, भोजन की उपलब्धता, सुरक्षा प्रबंधों और जब तक कोई बाहरी मदद न पहुंच जाए तब तक की तमाम व्यवस्थाओं का जिम्मा संभालना पड़ता है।
सीएनएन के साथ बातचीत के दौरान पूर्व नौसेना कैप्टन कार्ल शुस्टर ने साझा किया कि उन्होंने अपने कार्यकाल में एक बार लगभग चार घंटे तक बिना बिजली वाले युद्धपोत पर समय बिताया था, लेकिन साउथ चाइना सी में चार दिन तक इस तरह के नारकीय हालातों का सामना करना उससे कहीं ज्यादा मानसिक तनाव देने वाला अनुभव साबित होगा।
दूसरे युद्धपोत से भेजी गई भोजन सामग्री
इस विकट दौर के बीच राहत की एक बात यह रही कि दूसरे अमेरिकी युद्धपोत यूएसएस रॉबर्ट स्मॉल्स ने आगे आकर बेनफोल्ड के सैनिकों के लिए पका हुआ भोजन पहुंचाया। इसके साथ ही जॉर्ज वॉशिंगटन कैरियर स्ट्राइक ग्रुप के बेड़े में शामिल अन्य जहाजों ने भी संकट में फंसे बेनफोल्ड की हरसंभव सहायता की। आखिरकार बिजली की आपूर्ति और तकनीकी समस्याओं से जूझ रहे इस युद्धपोत को खींचकर फिलीपींस के सुबिक बे बंदरगाह तक पहुंचाया गया। वहां पहुंचने के बाद उसकी व्यापक मरम्मत की गई और तमाम सुधार कार्यों के पश्चात 8 अगस्त को यह युद्धपोत एक बार फिर से अपनी सेवा में लौट आया।
अमेरिका के रणनीतिक गलियारों में क्यों चिंता बढ़ी
यूएसएस बेनफोल्ड के साथ हुई यह घटना ऐसे समय पर सामने आई है जब अमेरिकी नौसेना पहले से ही भारी दबाव और चुनौतियों का सामना कर रही है। ईरान के विरुद्ध लंबे वक्त से चलाए जा रहे अमेरिकी सैन्य अभियानों की वजह से दुनिया भर में तैनात अमेरिकी युद्धपोतों और उनके सैनिकों पर अतिरिक्त और भारी बोझ आ पड़ा है। इसके साथ ही अमेरिका को वैश्विक स्तर पर अपने प्रभाव और सैन्य मौजूदगी को बरकरार रखने की भी लगातार मजबूरी बनी हुई है।
इससे पहले यूएसएस अब्राहम लिंकन को भी लंबे समय तक समुद्र के भीतर ही बिताने के लिए मजबूर होना पड़ा था, जिसको लेकर कई रिपोर्टों में सैनिकों के गिरते मनोबल और उनके मानसिक स्वास्थ्य को लेकर गंभीर चिंताएं भी जताई जा चुकी हैं।
प्रशांत क्षेत्र में युद्धपोत की बिजली जाने की दूसरी बड़ी घटना
बेनफोल्ड के साथ पेश आई यह दुर्घटना प्रशांत महासागर क्षेत्र में किसी अमेरिकी युद्धपोत की बिजली गुल होने का दूसरा हालिया मामला है। इससे पहले बीते मई के महीने में यूएसएस हिगिंस की बिजली और इंजन प्रणाली भी कई घंटों के लिए पूरी तरह से बंद पड़ गई थी। अमेरिकी नौसेना ने उस वक्त भी इस घटना को इंजीनियरिंग से जुड़ी एक गंभीर और बड़ी खराबी करार दिया था।
आपको बता दें कि बेनफोल्ड और हिगिंस दोनों ही आर्ले बर्क क्लास के उन्नत गाइडेड-मिसाइल डिस्ट्रॉयर श्रेणी के पोत हैं। इस किस्म के 70 से अधिक युद्धपोत वर्तमान में अमेरिकी नौसेना के बेड़े का हिस्सा बने हुए हैं और इन्हें अमेरिकी सतही नौसेना की रीढ़ माना जाता है। लगभग 500 फीट लंबे और करीब 10 हजार टन वजन वाले इन ताकतवर युद्धपोतों पर सामान्य परिस्थितियों में 329 से 359 सैनिक तैनात रहते हैं।



















