सिंगापुर के प्रधानमंत्री लॉरेंस वोंग ने हाल ही में सामने आए ऑनलाइन विवादों पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए कहा है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर चल रही बहसों के दौरान समाज का एक बेहद नकारात्मक और बदसूरत रूप देखने को मिला है। नेपाल में हाल ही में आई भीषण बाढ़ के दौरान सिंगापुर के नागरिकों की दुखद मौतों से लेकर सिंगापुर एयरलाइंस द्वारा एयर इंडिया में संभावित निवेश जैसे तमाम विषयों पर बातचीत के दौरान खुलेआम नस्लीय और अपमानजनक टिप्पणियां की गईं। प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि कुछ ऑनलाइन उपयोगकर्ताओं ने भारतीय समुदाय को निशाना बनाते हुए सांप, करी, काला जादू और पराठे जैसे बेहद आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल किया है, जो किसी भी सभ्य समाज में स्वीकार्य नहीं है।
अपनी बात को स्पष्ट करते हुए लॉरेंस वोंग ने कहा कि देश के नागरिकों को किसी भी नीति या मुद्दे पर अपनी राय रखने और खुलकर बहस करने का पूरा अधिकार है, लेकिन इस स्वतंत्रता की आड़ में किसी खास समुदाय के खिलाफ दुर्भावना या नफरत फैलाना कतई जायज नहीं ठहराया जा सकता। उन्होंने कड़ी चेतावनी देते हुए साफ किया कि इंटरनेट की दुनिया में नजर आने वाली इस नस्लवादी मानसिकता को महज कुछेक लोगों की मामूली हरकत मानकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। यदि इस तरह की बेहूदगी और जहर उगलने वाली हरकतों पर समय रहते सख्त रोक नहीं लगाई गई, तो समाज में यह नफरत धीरे-धीरे सामान्य और स्वीकार्य लगने लगेगी, जो देश की सामाजिक सद्भावना के लिए खतरनाक साबित हो सकता है।
गृह मंत्री के. षणमुगम की चेतावनी और पुलिस जांच
प्रधानमंत्री लॉरेंस वोंग का यह कड़ा बयान देश के वरिष्ठ मंत्री और गृह मंत्री के. षणमुगम के उस हालिया बयान के ठीक बाद आया है, जिसमें उन्होंने नस्लवादी मामलों पर सरकार का रुख स्पष्ट किया था। के. षणमुगम ने शनिवार को मीडिया को जानकारी दी थी कि पुलिस प्रशासन को इन तमाम ऑनलाइन मामलों की गहराई से जांच करने के आदेश दे दिए गए हैं। इसके साथ ही उन्होंने यह भी निर्देश दिए हैं कि स्थानीय नियमों और कानूनों का उल्लंघन करने वाली सभी आपत्तिजनक सोशल मीडिया टिप्पणियों को तुरंत हटाने के लिए संबंधित सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को आधिकारिक तौर पर निर्देशित किया जाएगा, ताकि इस प्रकार की सामग्री का प्रसार रोका जा सके।
गृह मंत्री के. षणमुगम ने इस बात पर भी प्रकाश डाला कि पिछले कुछ समय में सिंगापुर के भीतर भारतीय समुदाय के खिलाफ नस्लीय टिप्पणियों और बयानों की घटनाओं में चिंताजनक बढ़ोतरी दर्ज की गई है। स्थिति यहाँ तक पहुँच गई है कि देश की प्रमुख निवेश कंपनी टेमासेक होल्डिंग्स के वरिष्ठ अधिकारियों को भी उनकी विशिष्ट जातीय पहचान की वजह से सोशल मीडिया पर निशाना बनाया गया है। इससे पहले बीते जून महीने में भी सरकारी अधिकारियों ने सख्त कदम उठाते हुए विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को भारतीय समुदाय को विशेष रूप से लक्षित करने वाली 14 ऑनलाइन पोस्ट की पहुँच को रोकने का आधिकारिक आदेश जारी किया था।
एयर इंडिया के निवेश और आर्थिक मदद पर छिड़ी बहस
इस पूरे नस्लीय और ऑनलाइन विवाद के समानांतर, सिंगापुर एयरलाइंस द्वारा एयर इंडिया में संभावित निवेश के मुद्दे को लेकर भी डिजिटल मंचों पर तीखी बहस छिड़ी हुई है। इस पर टिप्पणी करते हुए के. षणमुगम ने स्पष्ट किया कि एयर इंडिया में किसी प्रकार का निवेश किया जाना चाहिए या नहीं, इस बात का निर्णय सरकार द्वारा नहीं लिया जाएगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस तरह के व्यावसायिक और रणनीतिक फैसले पूरी तरह से केवल कारोबारी आधार पर ही तय किए जाने चाहिए, न कि किसी अन्य दबाव के तहत।
दूसरी ओर, उद्योग जगत के सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, एयर इंडिया को अपने मुख्य मालिकों यानी टाटा संस और सिंगापुर एयरलाइंस से लगभग 100 अरब रुपये यानी करीब 1.06 अरब अमेरिकी डॉलर की भारी-भरकम आर्थिक मदद मिलने की संभावना है। वर्तमान में यह एयरलाइन पिछले एक साल के दौरान आए वित्तीय संकट और मुश्किलों के असर से पूरी तरह उबरने और बाहर निकलने के लिए लगातार संघर्ष कर रही है। मौजूदा समय में एयर इंडिया में टाटा संस की हिस्सेदारी लगभग 74.9 प्रतिशत है, जबकि शेष हिस्सेदारी सिंगापुर एयरलाइंस के पास सुरक्षित है। इसी मौजूदा हिस्सेदारी के अनुपात के आधार पर ही इस वित्तीय सहायता और आर्थिक मदद को दिए जाने की बात कही जा रही है।
सिंगापुर की सरकार ने इस संपूर्ण घटनाक्रम के जरिए अपनी नीति बिल्कुल साफ कर दी है कि देश के भीतर किसी भी सार्वजनिक मुद्दे पर खुली और स्वतंत्र बहस का स्वागत है, लेकिन इस बहस की आड़ में किसी भी समुदाय विशेष के खिलाफ नस्लीय नफरत फैलाने की कोई गुंजाइश नहीं दी जाएगी। प्रधानमंत्री लॉरेंस वोंग ने अपने संबोधन में यह भी दोहराया कि इंटरनेट पर की जाने वाली ये नस्लीय बातें पूरे सिंगापुर की जनता का प्रतिनिधित्व कतई नहीं करतीं, लेकिन इसके बावजूद इन्हें अनदेखा करना देश के भविष्य के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकता है।



















