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संयुक्त राष्ट्र में भारत को मिला बांग्लादेश का साथ, सुरक्षा परिषद में बदलाव की मांग पर बढ़ी मजबूतीदुनिया
10 सित॰ 2026, 7:18 am (50 दिन पहले)· 4

संयुक्त राष्ट्र में भारत को मिला बांग्लादेश का साथ, सुरक्षा परिषद में बदलाव की मांग पर बढ़ी मजबूती

संयुक्त राष्ट्र महासभा के नए अध्यक्ष खलीलुर रहमान ने संगठन में सार्थक सुधारों की वकालत करते हुए भारत के उस रुख का समर्थन किया है जिसमें सुरक्षा परिषद को आज की वैश्विक वास्तविकताओं के अनुकूल ढालने की बात कही गई है।

अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत के कूटनीतिक प्रयासों को एक और सहयोगी देश का साथ मिल गया है। संयुक्त राष्ट्र में व्यवस्थागत बदलावों को लेकर भारत लंबे समय से अपनी आवाज बुलंद करता रहा है और अब इस दिशा में बांग्लादेश ने भी भारत के सुर में सुर मिलाया है। संयुक्त राष्ट्र महासभा के नवनिर्वाचित अध्यक्ष ने स्पष्ट रूप से यह माना है कि वैश्विक संगठन में केवल सतही या दिखावटी बदलाव से काम नहीं चलेगा बल्कि इसमें गहरे और सार्थक सुधारों की आवश्यकता है। उनका यह बयान सीधे तौर पर भारत की उस पुरानी मांग का समर्थन करता है जिसके तहत सुरक्षा परिषद के ढांचे में स्थायी बदलाव और विकासशील देशों को उचित प्रतिनिधित्व देने की बात कही जाती रही है।

संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र के अध्यक्ष का पद संभालने वाले खलीलुर रहमान ने वैश्विक मीडिया के साथ बातचीत के दौरान यह बात कही। उन्होंने मंगलवार यानी 9 सितंबर 2026 को इस पद की जिम्मेदारी संभाली है। इस दौरान जब उनसे यह सवाल किया गया कि क्या उनकी अध्यक्षता लंबे समय से लंबित पड़े संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के सुधारों को आगे बढ़ाने में मददगार साबित होगी, तो उन्होंने इन बदलावों की अनिवार्यता पर जोर दिया। उनका मानना है कि वर्तमान वैश्विक व्यवस्था के सामने जो अविश्वास की स्थिति बनी हुई है, उसे दूर करने के लिए ठोस और प्रभावी कदम उठाने की जरूरत है ताकि आम लोगों का इस संगठन पर भरोसा फिर से कायम हो सके।

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सार्थक सुधारों की वकालत

खलीलुर रहमान ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि सुधार केवल नाम के वास्ते नहीं होने चाहिए। उनके अनुसार यदि बदलाव केवल दिखावे के लिए किए जाते हैं तो उनका कोई वास्तविक महत्व नहीं रह जाएगा और दुनिया इसे मामूली बदलाव ही मानेगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे इस पूरी सुधार प्रक्रिया को बहुत गंभीरता से लेते हैं। भारत भी यही दलील देता आया है कि द्वितीय विश्व युद्ध के दौर की पुरानी वैश्विक व्यवस्था आज की 21वीं सदी की वास्तविकताओं को पूरी तरह से प्रतिबिंबित नहीं करती है और सुरक्षा परिषद में व्यापक फेरबदल की सख्त दरकार है।

भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयारी

बांग्लादेश के विदेश मंत्री रह चुके खलीलुर रहमान ने संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस की यूएन80 पहल का समर्थन करने की बात भी दोहराई है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य संयुक्त राष्ट्र की पूरी कार्यप्रणाली को अधिक सरल, प्रभावी और परिणाममूलक बनाना है। उन्होंने स्वीकार किया कि वर्तमान समय में संयुक्त राष्ट्र को सबसे बड़ी चुनौती जिस मोर्चे पर मिल रही है, वह भरोसे की कमी है। संगठन को अपनी कार्यशैली में ऐसे गहरे बदलाव करने होंगे जिससे वह केवल आज की तारीख में ही नहीं बल्कि भविष्य की तमाम अनिश्चितताओं और चुनौतियों से निपटने के लिए पूरी तरह सक्षम बन सके।

बदलते दौर में पुरानी व्यवस्था

अपने संबोधन में उन्होंने ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए याद दिलाया कि अब साल 1945 का दौर नहीं है और न ही दुनिया सैन फ्रांसिस्को सम्मेलन की परिस्थितियों में जी रही है। उनका सीधा इशारा उस महत्वपूर्ण ऐतिहासिक सम्मेलन की ओर था जहां संयुक्त राष्ट्र के चार्टर को आधिकारिक मंजूरी दी गई थी। उन्होंने रेखांकित किया कि अब दुनिया 21वीं सदी में प्रवेश कर चुकी है और इस संगठन को अस्तित्व में आए हुए 80 साल से ज्यादा का समय बीत चुका है। इन आठ दशकों में वैश्विक परिदृश्य पूरी तरह बदल चुका है, इसलिए संयुक्त राष्ट्र को भी समय की चाल के साथ कदम मिलाकर चलना होगा।

सहयोग और संवाद को प्राथमिकता

संयुक्त राष्ट्र महासभा के अध्यक्ष ने यह भी कहा कि वैश्विक स्तर पर मौजूद गंभीर चुनौतियों से पार पाने और नए अवसरों का पूरा लाभ उठाने के लिए वे आपसी सहयोग और निरंतर संवाद को सबसे ऊपर रखेंगे। उन्होंने यह भी माना कि कूटनीति के मोर्चे पर हर समस्या का समाधान तुरंत और सर्वसम्मति से निकाल पाना हमेशा संभव नहीं होता है। कई बार जटिल मुद्दे लंबे समय तक अनसुलझे रह सकते हैं और उनके हल तक पहुंचने में लंबा वक्त लग सकता है। इसके बावजूद उनका मानना है कि सदस्य देशों को अपनी कोशिशें जारी रखनी चाहिए और जहां भी संभव हो, एक साझा रास्ता निकालकर आपसी सहमति बनाने का प्रयास करना चाहिए। उल्लेखनीय है कि खलीलुर रहमान को जून महीने में संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र के लिए चुना गया था। यह सत्र 8 सितंबर को संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में शुरू हुआ है जिसमें उन्होंने जर्मनी की पूर्व विदेश मंत्री एनालेना बेयरबॉक का स्थान लिया है।

सवाल-जवाब

संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र के अध्यक्ष के रूप में किसने कार्यभार संभाला है?
खलीलुर रहमान ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र के अध्यक्ष का पद संभाला है।
खलीलुर रहमान ने किस तारीख को महासभा के अध्यक्ष का पद संभाला?
उन्होंने मंगलवार, 9 सितंबर 2026 को इस पद की जिम्मेदारी संभाली है।
खलीलुर रहमान ने किससे पहले यह पद ग्रहण किया है?
उन्होंने जर्मनी की पूर्व विदेश मंत्री एनालेना बेयरबॉक की जगह ली है।
संयुक्त राष्ट्र महासभा का 81वां सत्र कहाँ और कब शुरू हुआ?
यह सत्र 8 सितंबर को संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में शुरू हुआ है।
खलीलुर रहमान किस देश से संबंधित हैं और उनका पिछला प्रमुख पद क्या था?
वह बांग्लादेश से हैं और इससे पहले देश के विदेश मंत्री के रूप में कार्य कर चुके हैं।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 4

Rohan Verma@rohan-verma·49 दिन पहले

बांग्लादेश के इस कूटनीतिक रुख से भारत की वैश्विक दावेदारी को क्षेत्रीय स्तर पर मजबूत आधार मिला है। सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता और प्रतिनिधित्व सुधारों की यह मांग अब दक्षिण एशिया के भू-राजनीतिक समीकरणों को एक नया आयाम दे रही है, जिससे विकासशील देशों की आवाज में और अधिक वजन बढ़ेगा।

Arjun Mehta@arjun-mehta·49 दिन पहले

बांग्लादेश के इस कूटनीतिक समर्थन से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधारों की मांग को एक नई गति मिली है। दक्षिण एशिया के इस पड़ोसी देश का रुख स्पष्ट करता है कि वैश्विक बहुपक्षीय मंचों पर विकासशील राष्ट्रों की भूमिका अब केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि व्यवस्थागत बदलाव की अनिवार्यता बन चुकी है। संयुक्त राष्ट्र महासभा के मौजूदा नेतृत्व के इस दृष्टिकोण से यह स्पष्ट है कि द्वितीय विश्व युद्ध के दौर की वैश्विक वास्तुकला को आज की भू-राजनीतिक वास्तविकताओं के अनुकूल ढालना अब टाला नहीं जा सकता।

Li Wei@li-wei·49 दिन पहले

संयुक्त राष्ट्र महासभा के नवनिर्वाचित अध्यक्ष खलीलुर रहमान द्वारा सुरक्षा परिषद में गहरे सुधारों की वकालत और भारत के रुख का समर्थन वैश्विक दक्षिण के बढ़ते कूटनीतिक प्रभाव को रेखांकित करता है। यह भू-राजनीतिक विकास ऐसे समय में आया है जब वैश्विक बहुपक्षीय संस्थानों में विश्वास की कमी गहरी हो रही है। विकासशील अर्थव्यवस्थाओं के बढ़ते दबाव के बीच, इस तरह के क्षेत्रीय समर्थन से बहुपक्षीय मंचों पर ढांचागत बदलाव की मांग को दीर्घकालिक गति मिलने की संभावना बढ़ गई है, जिससे वैश्विक शासन प्रणाली में बड़े बदलावों पर गंभीर चर्चा तेज हो सकती है।

Yuki Tanaka@yuki-tanaka·49 दिन पहले

खलीलुर रहमान का यह रुख और बांग्लादेश का समर्थन ऐसे वक्त में आया है जब वैश्विक दक्षिण (ग्लोबल साउथ) बहुपक्षीय मंचों पर अपने लिए बड़ी हिस्सेदारी मांग रहा है। सुरक्षा परिषद की मौजूदा संरचना द्वितीय विश्व युद्ध के दौर की है, जो आज की आर्थिक और सामरिक वास्तविकताओं को नहीं दर्शाती। संयुक्त राष्ट्र महासभा के इस सत्र में यदि सुधारों की यह गूंज नीतिगत प्रस्तावों में बदली, तो यह कूटनीतिक गतिरोध को तोड़ने में मील का पत्थर साबित हो सकता है।

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