पश्चिम एशिया में वाशिंगटन और तेहरान के मध्य कूटनीतिक कड़वाहट लगातार गहराती जा रही है, लेकिन इस बार विरोध दर्ज कराने का अंदाज बेहद अनूठा देखने को मिला है। जिम्बाब्वे की राजधानी में स्थित ईरानी दूतावास ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से मिलने वाली चेतावनियों पर पलटवार करने के लिए भारतीय सिनेमा की एक लोकप्रिय क्लिप का सहारा लिया है। सोशल मीडिया मंच पर साझा किए गए इस वीडियो में तेलुगू सुपरस्टार नंदमुरी बालकृष्ण गोलियों की तेज बौछार के बीच बेखौफ खड़े दिखाई देते हैं। इस दृश्य के जरिए ईरानी राजनयिक मिशन ने यह संदेश देने का प्रयास किया कि उनका देश किसी भी आक्रामक बयानबाजी के सामने लाचार नहीं है।
हॉलीवुड छोड़कर बॉलीवुड देख रहे हैं ट्रंप
जिम्बाब्वे स्थित ईरानी दूतावास ने इंटरनेट मीम्स के माध्यम से अमेरिकी नेतृत्व पर कटाक्ष करने की अपनी रणनीति को आगे बढ़ाते हुए लिखा कि ऐसा प्रतीत होता है मानो डोनाल्ड ट्रंप अब पश्चिमी फिल्मों के बजाय भारतीय फिल्में देखने लगे हैं। दूतावास ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल पर व्यंग्यात्मक लहजे में लिखा कि अमेरिकी राष्ट्रपति ईरान को नेस्तनाबूद करने के लंबे-चौड़े दावे तो करते हैं, लेकिन वास्तविकता यह है कि वे ईरान की मजबूती और आत्मरक्षा की ताकत से भली-भांति वाकिफ हैं। पोस्ट में आगे चुटकी लेते हुए कहा गया कि जब से सच्चाई सामने आई है, तब से वे हॉलीवुड के स्थान पर बॉलीवुड सिनेमा का रुख कर रहे हैं।
भगवंत केसरी के दृश्य में दिखा एक्शन
इस राजनयिक पोस्ट के साथ तेलुगू एक्शन फिल्म भगवंत केसरी का 58 सेकंड का एक नाटकीय वीडियो जोड़ा गया है। इस दृश्य में मुख्य किरदार निभा रहे अभिनेता नंदमुरी बालकृष्ण चारों ओर से भारी हथियारों से लैस दो विरोधी गुटों के बीच फंसे नजर आते हैं। दोनों तरफ से अत्याधुनिक बंदूकों से अंधाधुंध फायरिंग की जाती है और कई तरह की घातक चीजों से हमले किए जाते हैं। इसके बावजूद पर्दे पर नायक बिना किसी खरोंच के सुरक्षित खड़ा रहता है। ईरानी दूतावास ने इसी अतिशयोक्तिपूर्ण एक्शन दृश्य को प्रतीकात्मक रूप से पेश करते हुए यह दर्शाने की कोशिश की कि भारी दबाव और हमलों की धमकियों के बावजूद तेहरान अडिग बना हुआ है।
सोशल मीडिया पर यूजर्स ने लिए मजे
कूटनीति के मंच पर टॉलीवुड के इस अनोखे प्रवेश के बाद इंटरनेट यूजर्स ने भी जमकर प्रतिक्रियाएं दीं। कई यूजर्स ने इसे अंतरराष्ट्रीय संबंधों के इतिहास का सबसे अकल्पनीय मीम करार दिया। एक यूजर ने चुटकी लेते हुए टिप्पणी की कि यह वीडियो देखने के बाद ताऊ काफी नाराज हो जाएंगे। वहीं एक अन्य टिप्पणीकार ने लिखा कि ईरानी दूतावास ने नंदमुरी बालकृष्ण की फिल्म का एक जबरदस्त फाइट सीन पोस्ट करके उसे सीधे अपनी विदेश नीति के तौर पर प्रस्तुत कर दिया है। यूजर ने आगे व्यंग्य किया कि इस दृश्य को देखकर हॉलीवुड चिंता में पड़ गया होगा, जबकि टॉलीवुड संयुक्त राष्ट्र में अपने अगले भाषण का समय बुक कर रहा है।
कूटनीतिक बयानों में फिल्मी संवादों की चर्चा
सोशल मीडिया पर चल रही चर्चा में कई लोगों ने इस बात पर हैरानी जताई कि तेहरान के राजनयिक भी दक्षिण भारतीय सिनेमा से परिचित हैं। एक टिप्पणी में कहा गया कि यह मीम भारत से निकला है और ऐसा लगता है कि ईरान भी नंदमुरी बालकृष्ण का मुरीद हो गया है। एक अन्य यूजर ने दोनों देशों के बीच भविष्य के संवाद की कल्पना करते हुए लिखा कि यदि राजनयिक भाषा का यही रुख रहा, तो अगला आधिकारिक बयान कुछ इस अंदाज में जारी होगा कि मेरे पास मिसाइल है, तुम्हारे पास क्या है।
अमेरिकी विदेश नीति और क्षेत्रीय रणनीति पर सवाल
दूसरी ओर, इसी भू-राजनीतिक तनाव के संदर्भ में अमेरिका के पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जॉन बोल्टन ने डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन के तौर-तरीकों की तीखी आलोचना की है। उन्होंने विशेष रूप से भारत, मध्य पूर्व और यूरोप को जोड़ने वाले आर्थिक गलियारे (आईएमईसी) के संदर्भ में सरकारी नीतियों पर गंभीर आपत्तियां दर्ज कराई हैं। बोल्टन ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि प्रशासन के पास इस संवेदनशील क्षेत्र के लिए किसी सुसंगत और दीर्घकालिक क्षेत्रीय रणनीति का अभाव है। उन्होंने यह आरोप भी लगाया कि वैश्विक स्तर के जटिल भू-राजनीतिक घटनाक्रमों को समग्रता में देखने के बजाय प्रशासन उन्हें अलग-थलग टुकड़ों में देखता है, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उसकी पकड़ कमजोर पड़ती है।


















