कृत्रिम बुद्धिमत्ता के तेजी से होते विस्तार के बीच तकनीकी बुनियादी ढांचे को लेकर आम जनता में असंतोष बढ़ रहा है। भारी बिजली और पानी की खपत के कारण डेटा केंद्रों के निर्माण का व्यापक विरोध देखा जा रहा है। इस नकारात्मक छवि को बदलने के लिए ओपनएआई एक बड़े जनसंपर्क अभियान की तैयारी में जुटा है। मंगलवार को होने वाले मध्यावधि चुनावों के बाद कंपनी अपनी इस रणनीति को आगे बढ़ाने की योजना बना रही है, जहां प्रतिनिधि सभा और संभावित रूप से सीनेट में भी डेमोक्रेट्स की वापसी के आसार नजर आ रहे हैं।
2028 के चुनावी दंगल का ट्रेलर साबित होंगे मध्यावधि चुनाव
ओपनएआई के मुख्य वैश्विक मामलों के अधिकारी क्रिस लेहाने ने चुनावी संदर्भ को समझाते हुए कहा कि यह मध्यावधि चुनाव उस राजनीतिक परिदृश्य का केवल एक ट्रेलर साबित होंगे जो 2028 में देखने को मिलेगा। उनके मुताबिक वर्ष 2028 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में कृत्रिम बुद्धिमत्ता सबसे अहम और केंद्रीय मुद्दा होगा। इसी वजह से तकनीकी कंपनियां अभी से नीतिगत बहसों और राजनीतिक विमर्श को अपने अनुकूल दिशा देने की कोशिश में जुट गई हैं।
नई शब्दावली और सुरक्षा सीमाओं पर प्रस्ताव
भविष्य की नीतिगत दिशा को आकार देने के लिए क्रिस लेहाने ने कई ठोस प्रस्तावों का जिक्र किया है। इनमें सबसे चर्चित विचार पारंपरिक डेटा केंद्रों का नाम बदलकर उन्हें 'एआई कंप्यूट कैंपस' के रूप में पेश करना शामिल है। इसके अलावा कंपनी एआई के विकास की रफ्तार तय करने के लिए गति सीमाएं निर्धारित करने के विचार पर भी विमर्श कर रही है। ओपनएआई का यह भी प्रयास रहेगा कि आम लोग कृत्रिम बुद्धिमत्ता को अपने दैनिक जीवन को सशक्त बनाने वाले साधन के तौर पर देखें। साथ ही कंपनी चाहती है कि वैश्विक मानकों को तय करने में अमेरिका सबसे आगे रहकर नेतृत्वकारी भूमिका निभाए।
पारदर्शिता और स्थानीय समुदायों की भागीदारी
डेटा केंद्रों को लेकर पैदा हुए सार्वजनिक विरोध ने पहले ही कई बड़ी तकनीकी कंपनियों की कार्यप्रणाली में बदलाव ला दिया है। अमेज़न और माइक्रोसॉफ्ट जैसी कंपनियां स्थानीय सरकारों के साथ बातचीत में गैर-प्रकटीकरण समझौतों यानी एनडीए के इस्तेमाल को बंद करने की घोषणा कर चुकी हैं। क्रिस लेहाने ने डेटा केंद्रों के इर्द-गिर्द चल रही इस समूची बहस को पूरी तरह सकारात्मक और स्वस्थ करार दिया। उन्होंने जोर देकर कहा कि स्थानीय समुदायों को तकनीकी कंपनियों को जवाबदेह ठहराना चाहिए, ताकि इन परियोजनाओं का वास्तविक और परिवर्तनकारी लाभ जमीनी स्तर पर मिल सके।

















