क्लाउड कंप्यूटिंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की दुनिया में भारी भरकम लार्ज लैंग्वेज मॉडल्स की जगह अब छोटे, तेज और किफायती सिस्टम्स की मांग तेजी से बढ़ रही है। इसी दिशा में कदम बढ़ाते हुए अमेज़न वेब सर्विसेज ने अपना नया ओपन सोर्स डिसीजन मॉडल स्ट्रैंड्स डिसाइडर 2B पेश किया है। यह मॉडल खास तौर पर कंप्यूटर ऑटोमेशन और वर्कफ्लो मैनेजमेंट के लिए तैयार किया गया है। टाइपसेफ के लोकप्रिय डिसीजन मॉडल जेव से प्रेरणा लेकर बने इस सिस्टम को इस तरह डिजाइन किया गया है कि यह दिए गए विकल्पों में से सबसे सही फैसला तेजी से चुन सके।
ओपनएआई के कदम के बीच अमेज़न का दांव
स्ट्रैंड्स डिसाइडर 2B को ठीक उसी हफ्ते बाजार में उतारा गया है जब ओपनएआई ने भी इसी तरह की पेशकश का ऐलान किया। अमेज़न का यह नया टूल पूरी तरह से ओपन सोर्स है, तुरंत इस्तेमाल के लिए उपलब्ध है और आकार में इतना कॉम्पैक्ट है कि इसे किसी साधारण लोकल सिस्टम पर भी आसानी से चलाया जा सकता है। यह मॉडल पारंपरिक जनरेटिव टूल्स की तरह लंबा टेक्स्ट तैयार करने के बजाय पहले से तय विकल्पों में से सटीक चुनाव करता है और साथ ही यह भी बताता है कि अपने चयन को लेकर वह कितना आश्वस्त है।
इस प्रोजेक्ट की शुरुआत अमेज़न के डिस्टिंग्विश्ड इंजीनियर मार्क ब्रूकर ने की थी। उन्होंने जेव मॉडल को देखने के बाद व्यक्तिगत तौर पर इसी तरह का एक आर्किटेक्चर तैयार करने का प्रयास किया था। उनका यह प्रयोग इतना कामयाब रहा कि यह अपने साइज सेगमेंट में जेवबेंच रैंकिंग के शीर्ष पायदान पर पहुंच गया। इस शुरुआती सफलता के बाद अमेज़न के इंजीनियरों ने इस मॉडल को और परिष्कृत किया और अपनी रिसर्च यूनिट स्ट्रैंड्स लैब्स के जरिए सार्वजनिक तौर पर रिलीज कर दिया। स्ट्रैंड्स लैब्स मुख्य रूप से एआई एजेंट्स को तैनात करने के नए टूल्स और प्रोटोकॉल विकसित करने पर काम कर रही है।
एजेंटिक वर्कफ्लो की वास्तविक जरूरत
मार्क ब्रूकर के अनुसार इस तरह के मॉडल की जरूरत तब सामने आई जब एडब्ल्यूएस ग्राहकों के साथ चर्चा में यह पाया गया कि हर ऑटोमेशन स्टेप पर महंगे और भारी भरकम एलएलएम की आवश्यकता नहीं होती। कई बार सिस्टम को सिर्फ यह तय करना होता है कि किसी निश्चित स्थिति के बाद अगला कदम क्या उठाया जाए।
ब्रूकर ने इस बारे में बताया कि ऐसे मॉडल्स वर्कफ्लो के किसी चरण में एक आदर्श डिसीजन मेकर की भूमिका निभाते हैं। उनके अनुसार यह सिस्टम ग्राहकों को बेहद कम लेटेंसी और कम खर्च पर भरोसेमंद फैसले लेने की सुविधा देता है, क्योंकि यह सीमित विकल्पों के दायरे में काम करता है और हर फैसले के साथ कॉन्फिडेंस स्कोर भी प्रदान करता है।
जेवन्स सिद्धांत और मॉडल की तकनीक
तकनीकी संरचना के लिहाज से स्ट्रैंड्स डिसाइडर को एक मानक एलएलएम के धड़ पर तैयार किया गया है, जिसके लिए Qen3.5-2B का आधार लिया गया है। हालांकि यह टेक्स्ट लिखने के बजाय कैलिब्रेटेड फैसले देने का काम करता है। डिसीजन मॉडल्स की शुरुआती अवधारणा रखने वाली कंपनी टाइपसेफ ने अपने मॉडल का नाम मशहूर अर्थशास्त्री विलियम स्टेनली जेवन्स के नाम पर जेव रखा था। जेवन्स का प्रसिद्ध आर्थिक सिद्धांत कहता है कि जब किसी संसाधन के इस्तेमाल की लागत घटती है, तो बाजार में उसकी कुल मांग तेजी से बढ़ जाती है। कंप्यूटर इंटेलिजेंस के क्षेत्र में भी यही स्थिति देखी जा रही है।
टाइपसेफ द्वारा यह अवधारणा पेश किए जाने के बाद से दर्जनों शोधकर्ताओं ने ऐसे मॉडल तैयार किए हैं। इस तेज होड़ के बीच सबसे बड़ी चुनौती यह तय करना है कि स्पीड बढ़ाने के चक्कर में मॉडल की बुनियादी समझ कमजोर न पड़े। मार्क ब्रूकर का मानना है कि मॉडल की एक्यूरेसी और फैसले लेने की गति को तेज करते हुए उसकी बहुभाषी समझ और व्यापक ज्ञान को बनाए रखना एक बेहद नाजुक संतुलन का काम है।
बाजार में प्रतिस्पर्धा और भविष्य की राह
ब्रूकर का यह भी मानना है कि छोटे डिसीजन मॉडल्स के इस सेगमेंट में केवल बड़ी फ्रंटियर लैब्स का ही दबदबा रहेगा, ऐसा जरूरी नहीं है। कम आकार वाले मॉडल्स को तैयार करने और प्रयोग करने का खर्च महज कुछ सौ या हजार डॉलर तक सीमित रहता है, जिससे स्वतंत्र डेवलपर्स भी मजबूत विकल्प तैयार कर सकते हैं।
दूसरी तरफ टाइपसेफ के प्रबंधन का मानना है कि वे बिना विचलित हुए अपनी अगली पीढ़ी के मॉडल्स को बेहतर बनाने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। टाइपसेफ के संस्थापक और सीईओ डिओगो अल्मीडा ने कहा कि लोग इसे भले ही होड़ समझ रहे हों, लेकिन मॉडल्स को वास्तव में बुद्धिमान बनाना बेहद कठिन कार्य है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे फिलहाल अपनी कंपनी के लिए कोई वास्तविक चुनौती नहीं देख रहे हैं। अल्मीडा के अनुसार बाजार में मौजूद ज्यादातर नए प्रयोग केवल नए आर्किटेक्चर को लागू करने तक सीमित दिखाई देते हैं, जबकि बुद्धिमत्ता को व्यावहारिक रूप से उपयोगी बनाने के लिए गंभीर समर्पण की जरूरत होती है।



















