मुद्रा बाजार में गुरुवार को एक बड़ा उलटफेर देखने को मिला, जब जापानी येन के समर्थन में टोक्यो के संभावित नीतिगत हस्तक्षेप की आशंकाओं ने अमेरिकी डॉलर के बढ़ते दबाव पर लगाम लगा दी। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले जापानी मुद्रा गिरकर 158.44 के स्तर तक पहुंच गई थी, लेकिन जापानी अधिकारियों की सख्त टिप्पणियों के बाद मुद्रा व्यापारियों ने डॉलर को और ऊपर ले जाने से परहेज किया। इस हिचकिचाहट के चलते जापानी येन ने कुछ जमीन वापस हासिल की और यह जोड़ी गिरकर 157.95 के दायरे में आ गई। हालांकि, अमेरिकी डॉलर इंडेक्स (DXY) 102.13 के आसपास मजबूत बना हुआ है और प्रमुख 10-वर्षीय अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड 5.25 प्रतिशत के आसपास टिकी है, जो पहले 5.34 प्रतिशत तक पहुंच गई थी, जो साल 2002 के बाद का सबसे ऊंचा स्तर है।
जापानी नेतृत्व की सख्त टिप्पणी और हस्तक्षेप का डर
जापानी अधिकारियों ने येन के लगातार गिरते मूल्य पर गंभीर रुख अपनाया है। जापानी प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची ने गुरुवार को स्पष्ट किया कि येन का जरूरत से ज्यादा अवमूल्यन देश की अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ी समस्या बन गया है। इस बयान से वैश्विक वित्तीय बाजारों में यह धारणा बेहद मजबूत हो गई कि यदि विनिमय दरों में तेज और अव्यवस्थित गिरावट जारी रही, तो जापानी वित्तीय अधिकारी बाजार में सीधा दखल दे सकते हैं। यही वजह रही कि 158.00 के पार जा पहुंची विनिमय दर पर मुनाफावसूली और सावधानी का माहौल बन गया।
बैंक ऑफ जापान की धीमी चाल और नीतियों की सीमाएं
भले ही सरकारी स्तर पर मुद्रा को संभालने की बातें चल रही हों, लेकिन बैंक ऑफ जापान की अपनी मौद्रिक नीतियों की सीमाएं येन की बड़ी रिकवरी को सीमित कर रही हैं। ब्राउन ब्रदर्स हैरिमन के विश्लेषक इलियास हद्दाद के मुताबिक, जापान के हालिया आर्थिक आंकड़े और नीतिगत संकेत यह दर्शाते हैं कि केंद्रीय बैंक बहुत तेजी से अपनी ब्याज दरें बढ़ाने की स्थिति में नहीं है। जापान के तीसरी तिमाही के तानकान सर्वेक्षण और बैंक ऑफ जापान की सितंबर बैठक के विचारों के सारांश ने स्पष्ट किया है कि दरों में आक्रामक बढ़ोतरी के लिए पैमाना अभी काफी ऊंचा है।
तानकान सभी उद्योगों का व्यापारिक स्थिति सूचकांक दूसरी तिमाही के 18 से सुधरकर 35 साल के रिकॉर्ड उच्च स्तर 21 पर पहुंच गया। लेकिन हद्दाद ने ध्यान दिलाया कि व्यवसायों को चौथी तिमाही में इसके घटकर 15 पर आने की आशंका है, जबकि मुद्रास्फीति की उम्मीदें काफी हद तक स्थिर बनी हुई हैं। इससे आक्रामक मौद्रिक सख्ती का आधार कमजोर पड़ता है। इसके अलावा, केंद्रीय बैंक के विचारों का सारांश दिशा के मामले में तो सख्त दिखा, लेकिन गति को लेकर काफी सतर्क रहा। कैबिनेट कार्यालय ने भी नीति निर्माताओं से पिछली ब्याज दर बढ़ोतरी के संचयी प्रभावों की सावधानीपूर्वक जांच करने का आग्रह किया है, जिससे दरों में त्वरित बढ़ोतरी की राह में रुकावट आ रही है।
अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और फेडरल रिजर्व की मौद्रिक स्थिति
अमेरिकी मुद्रा को अमेरिकी ट्रेजरी की ऊंची यील्ड और स्थिर आर्थिक आंकड़ों से लगातार समर्थन मिल रहा है। हालांकि अमेरिका में हालिया आर्थिक वृद्धि के आंकड़ों को ऊपर की ओर संशोधित किया गया था और मुद्रास्फीति के आंकड़ों में गिरावट आई थी, जिससे व्यक्तिगत उपभोग व्यय (PCE) के कमजोर आंकड़ों ने 27-28 अक्टूबर की बैठक में ब्याज दर बढ़ोतरी की उम्मीदों को कम कर दिया था। बाजार का मिजाज केवल एक हफ्ते के भीतर तेजी से बदला है, जहां पहले अक्टूबर में दर वृद्धि की संभावना सबसे अधिक मानी जा रही थी, वहीं अब केंद्रीय बैंक द्वारा ब्याज दरों को स्थिर रखने की संभावना प्रबल हो गई है। फिर भी, मुद्रास्फीति फेडरल रिजर्व के 2 प्रतिशत के लक्ष्य से ऊपर बनी हुई है और कच्चे तेल से जुड़ी महंगाई की चिंताओं ने बॉन्ड यील्ड को बहु-वर्षीय ऊंचाइयों पर बनाए रखा है, जिससे इस साल के अंत में एक और दर वृद्धि की संभावना पूरी तरह खत्म नहीं हुई है।
भू-राजनीतिक तनाव और अन्य वैश्विक मुद्राओं की स्थिति
मुद्रा बाजार में अमेरिकी डॉलर की व्यापक मजबूती को अमेरिका और ईरान के बीच जारी गतिरोध से भी बल मिल रहा है, जिससे सुरक्षित निवेश के रूप में डॉलर की मांग बनी हुई है। इस वैश्विक उथल-पुथल का असर अन्य प्रमुख मुद्राओं पर भी देखा गया। एशियाई कारोबारी सत्र में ऑस्ट्रेलियाई डॉलर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले दो महीने के निचले स्तर यानी 0.6900 के मध्य स्तर के करीब स्थिर रहा। अगस्त में ऑस्ट्रेलिया का व्यापार अधिशेष घटकर 49.5 करोड़ ऑस्ट्रेलियाई डॉलर रह गया, जिसका मुद्रा पर सीमित प्रभाव पड़ा। प्रमुख मुद्राओं के साप्ताहिक प्रदर्शन पर नजर डालें तो इस हफ्ते जापानी येन अमेरिकी डॉलर के मुकाबले सबसे कमजोर मुद्रा साबित हुआ है।
सोना और क्रिप्टोकरेंसी बाजार का ताजा हाल
मजबूत डॉलर और बढ़ती अमेरिकी बॉन्ड यील्ड के दबाव में कीमती धातुओं और डिजिटल संपत्तियों में भी सीमित हलचल दर्ज की गई। सोने की कीमतों में गुरुवार को कोई खास तेजी नहीं देखी जा सकी और XAU/USD लगभग 0.26 प्रतिशत की मामूली बढ़त के साथ 4,167 डॉलर प्रति औंस के आसपास कारोबार करता दिखा।
क्रिप्टोकरेंसी बाजार में बिटकॉइन 82,500 डॉलर के समर्थन स्तर और 85,000 डॉलर के प्रतिरोध स्तर के बीच अटका हुआ है। इसी तरह एथेरियम भी दबाव में रहा और 2,700 डॉलर के नीचे कारोबार करता दिखा, जहां 2,600 डॉलर का स्तर इसके लिए तात्कालिक सहारा बना हुआ है। वहीं रिपल भी 1.50 डॉलर के महत्वपूर्ण मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे फिसल चुका है। वैश्विक स्तर पर निवेशक अब केंद्रीय बैंकों के अगले कदमों और तेल कीमतों के मुद्रास्फीति पर असर पर पैनी नजर बनाए हुए हैं।



















