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बर्नी सैंडर्स ने एलन मस्क को घेरा, अमेरिकी राजनीति में पैसे के इस्तेमाल पर उठे गंभीर सवालअमेरिका
13 अक्तू॰ 2026, 12:49 pm (17 दिन पहले)· 1

बर्नी सैंडर्स ने एलन मस्क को घेरा, अमेरिकी राजनीति में पैसे के इस्तेमाल पर उठे गंभीर सवाल

अमेरिका में सीनेटर बर्नी सैंडर्स ने एलन मस्क पर राजनीतिक प्रभाव खरीदने का गंभीर आरोप लगाया है। दूसरी ओर, भारत में स्टारलिंक के लाइसेंस को लेकर भी मस्क की टिप्पणियां और अमेरिकी मध्यावधि चुनावों में उनके भारी चंदे की चर्चा जोरों पर है।

अमेरिकी राजनीतिक गलियारों में उद्योगपति एलन मस्क के भारी-भरकम चुनावी चंदे और राजनीतिक प्रभाव को लेकर बहस छिड़ गई है। सीनेटर बर्नी सैंडर्स ने एलन मस्क पर खुला हमला बोलते हुए कहा है कि वह अपनी अकूत दौलत के दम पर अमेरिकी शासन और चुनावों को प्रभावित करने की कोशिश कर रहे हैं। सैंडर्स के अनुसार, मस्क ने राष्ट्रपति चुनाव के दौरान डोनाल्ड ट्रंप के प्रचार अभियान में पानी की तरह पैसा बहाया था और इसके बदले उन्हें भारी व्यावसायिक लाभ भी मिले हैं। इस पूरे विवाद के बीच एलन मस्क का नाम भारत में स्टारलिंक की एंट्री को लेकर भी चर्चा में बना हुआ है, जहां वह अपनी सैटेलाइट इंटरनेट सेवाओं को स्थापित करने के प्रयास कर रहे हैं।

चुनावी फंडिंग और संपत्ति में भारी इजाफा

बर्नी सैंडर्स ने सार्वजनिक रूप से आंकड़े रखते हुए बताया कि एलन मस्क ने डोनाल्ड ट्रंप के चुनाव अभियान में कुल 290 मिलियन डॉलर खर्च किए थे। उनका दावा है कि चुनाव परिणाम आने के बाद मस्क की कुल संपत्ति में 696 अरब डॉलर की अभूतपूर्व बढ़ोतरी दर्ज की गई और वह दुनिया के पहले खरबपति बनने में कामयाब रहे। इसके अलावा, सरकारी अनुबंधों के मोर्चे पर भी उन्हें बड़े फायदे मिले हैं। अंतरिक्ष अनुसंधान के क्षेत्र में उनकी कंपनी स्पेसएक्स को नासा की ओर से 1.6 अरब डॉलर का ऐतिहासिक अनुबंध हासिल हुआ था। इसके साथ ही, अमेरिकी अंतरिक्ष बल की तरफ से भी स्पेसएक्स को 18 फाल्कन 9 रॉकेट लॉन्च करने के लिए 1.6 बिलियन डॉलर का एक विशाल अनुबंध सौंपा गया है।

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मध्यावधि चुनावों में रिपब्लिकन पार्टी को समर्थन

राजनीतिक प्रभाव का दायरा बढ़ाते हुए एलन मस्क अब आगामी चुनावों और कांग्रेस में रिपब्लिकन पार्टी का दबदबा बनाए रखने के लिए करोड़ों रुपये झोंक रहे हैं। बर्नी सैंडर्स ने इस बात पर कड़ी आपत्ति जताई है कि मस्क इस बार रिपब्लिकन पार्टी का नियंत्रण सुरक्षित रखने के लिए 366 मिलियन डॉलर खर्च कर रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, जुलाई महीने से लेकर अब तक मस्क ने दक्षिणपंथी उम्मीदवारों का समर्थन करने वाले संगठनों को 276 मिलियन डॉलर यानी लगभग 2,760 लाख डॉलर की भारी रकम दान में दी है। इनमें से 158 मिलियन डॉलर अकेले सीनेट लीडरशिप फंड के माध्यम से रिपब्लिकन प्रत्याशियों की जीत सुनिश्चित करने के वास्ते खर्च किए गए हैं। इन भारी-भरकम भुगतानों के दम पर वह 3 नवंबर को होने वाले मिड टर्म चुनाव के सबसे बड़े व्यक्तिगत दाता बन चुके हैं।

अमेरिका पीएसी का पक्ष और चुनावी चुनौतियां

एलन मस्क के राजनीतिक संगठन अमेरिका पीएसी के प्रवक्ता एंड्रयू रोमियो ने इन दानों का पुरजोर बचाव किया है। उनका तर्क है कि डेमोक्रेटिक पार्टी को अमेरिकी कांग्रेस पर पूर्ण नियंत्रण हासिल करने से रोकने के लिए यह वित्तीय निवेश बेहद जरूरी कदम है। वर्तमान में मिड टर्म इलेक्शन के दौरान रिपब्लिकन उम्मीदवारों के सामने कई बड़ी जमीनी मुश्किलें हैं, जिनमें मतदाताओं के बीच बढ़ती महंगाई को लेकर नाराजगी और ट्रंप की घटती लोकप्रियता शामिल है। इन सभी राजनीतिक कमियों और अंतरालों को पाटने के लिए ही एलन मस्क अपनी तरफ से भारी वित्तीय संसाधन झोंक रहे हैं। इस पूरी प्रक्रिया ने एक बार फिर देश में यह बहस छेड़ दी है कि क्या उद्योगपतियों का बेहिसाब पैसा लोकतांत्रिक नीतियों को अपनी दिशा मोड़ने के लिए मजबूर कर रहा है।

भारत में स्टारलिंक की एंट्री और मस्क की बयानबाजी

अमेरिका के घरेलू राजनीतिक घटनाक्रमों के अलावा एलन मस्क भारत के टेलीकॉम बाजार में अपनी सैटेलाइट इंटरनेट सेवा स्टारलिंक को उतारने को लेकर भी सुर्खियों में रहे हैं। चीन और रूस के बाजारों में अपेक्षित सफलता न मिलने के बाद अब वह भारतीय उपभोक्ताओं तक पहुंच बनाने के लिए बेताब हैं। कुछ समय पहले मस्क ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर यह दावा किया था कि भारत में स्टारलिंक के आने से इंटरनेट उपभोक्ताओं को बेहतर विकल्प मिलेंगे और बाजार में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी। इतना ही नहीं, उन्होंने भारतीय कारोबारियों पर यह आरोप भी मढ़ा था कि वे स्टारलिंक के रास्ते में रोड़े अटका रहे हैं और उसकी एंट्री रोकने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि, भारतीय सरकार ने इन तमाम आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए स्पष्ट किया है कि लाइसेंस प्रक्रिया में जो भी देरी हो रही है, वह पूरी तरह से आवश्यक नियामकीय औपचारिकताओं और कड़े सुरक्षा मानकों की वजह से है।

सवाल-जवाब

बर्नी सैंडर्स ने एलन मस्क पर क्या आरोप लगाया है?
बर्नी सैंडर्स ने आरोप लगाया है कि एलन मस्क ने अपनी अकूत दौलत का इस्तेमाल करके अमेरिकी राजनीति और चुनाव परिणामों को प्रभावित करने की कोशिश की है।
एलन मस्क ने डोनाल्ड ट्रंप के चुनाव अभियान में कितना खर्च किया था?
एलन मस्क ने डोनाल्ड ट्रंप के चुनाव अभियान में कुल 290 मिलियन डॉलर खर्च किए थे।
स्पेसएक्स को कौन से बड़े सरकारी अनुबंध मिले हैं?
स्पेसएक्स को नासा से 1.6 अरब डॉलर का अनुबंध और अमेरिकी अंतरिक्ष बल से 18 फाल्कन 9 रॉकेट लॉन्च करने के लिए 1.6 बिलियन डॉलर का अनुबंध मिला है।
मस्क मध्यावधि चुनावों में रिपब्लिकन पार्टी के लिए कितना दान दे रहे हैं?
मस्क ने जुलाई से अब तक रिपब्लिकन समर्थक संगठनों को 276 मिलियन डॉलर दान दिए हैं और कुल खर्च 366 मिलियन डॉलर तक पहुंच गया है।
भारत में स्टारलिंक के आने में देरी क्यों हो रही है?
भारत सरकार ने स्पष्ट किया है कि स्टारलिंक के लाइसेंस में देरी कड़े नियामकीय मानकों और सुरक्षा संबंधी शर्तों के कारण हो रही है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Yuki Tanaka@yuki-tanaka·16 दिन पहले

पैसे के दम पर राजनीति चलाना अमेरिका में पुराना खेल है, पर इस पैमाने पर दखल चिंता तो बढ़ाता ही है।

Sophie Laurent@sophie-laurent·16 दिन पहले

बर्नी सैंडर्स की ये बातें सुनकर मुझे ब्रुसेल्स में साल भर पहले हुई उस लॉबीइंग बैठक की याद आ गई, जहाँ कुछ ऐसे ही अरबपतियों ने यूरोपियन आयोग के फैसलों को रातों-रात बदल दिया था। पैसा जब इस हद तक चुनाव और नीतियों को चलाने लगे, तो आम आदमी की वोट की कीमत सचमुच बहुत कम लगने लगती है।

Li Wei@li-wei·16 दिन पहले

सोफी, बिल्कुल सही कहा आपने। पिछले साल जब मैंने वाशिंगटन में चुनाव कवर किए थे, तब भी यही साफ़ दिख रहा था कि कैसे चंद अमीर लोग पूरा खेल बदल देते हैं।

Ayesha Siddiqui@ayesha-siddiqui·16 दिन पहले

पैसे के दम पर चुनाव जीतना और नीतियां बदलवाना लोकतंत्र के लिए खतरनाक है।

Omar AL Mansoori@omar-mansoori·16 दिन पहले

आयशा जी, बिल्कुल सही कहा आपने। वाशिंगटन में रहते हुए मैंने कई बार देखा है कि कैसे ये बड़े उद्योगपति अपने पैसे से सीधे नेताओं की नीतियां बदलवा देते हैं।

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