प्रसिद्ध पार्श्व गायक सोनू निगम ने वर्ष 2025 में बेंगलुरु के एक कॉलेज कार्यक्रम के दौरान उपजे विवाद पर अपना विस्तृत पक्ष रखा है। उन्होंने सोशल मीडिया मंच इंस्टाग्राम पर कर्नाटक के निवासी मंजूनाथ राव और उनकी पत्नी पल्लवी का एक वीडियो साझा किया। यह युगल पहलगाम में हुए आतंकी हमले का शिकार होने से कुछ ही देर पहले डल झील में शिकारा की सवारी का आनंद ले रहा था। गायक ने इस वीडियो के जरिए स्पष्ट किया कि उस समय मंच से दिया गया उनका वक्तव्य असल में किस पृष्ठभूमि और मानसिक वेदना से जुड़ा हुआ था।
कॉलेज कॉन्सर्ट के दौरान अपशब्दों का सामना
बेंगलुरु के उस कॉलेज कार्यक्रम के माहौल का उल्लेख करते हुए सोनू निगम ने बताया कि प्रस्तुति शुरू होते ही दर्शकों के एक हिस्से की ओर से अभद्र टिप्पणियां की जाने लगी थीं। उन्होंने कहा कि सामान्य जीवन में कोई भी व्यक्ति अपने परिवार को लेकर बोले गए अपशब्द सहन नहीं करेगा। उन्होंने बताया कि यह कोई टिकट आधारित व्यावसायिक संगीत कार्यक्रम नहीं था, बल्कि एक कॉलेज स्तर का शो था। गायक के मुताबिक, सामान्य तौर पर कम बजट के कारण वे ऐसे कॉलेज कार्यक्रमों में जाने से बचते हैं, लेकिन कर्नाटक के प्रति अपने विशेष लगाव की वजह से उन्होंने कभी वहां आने से इनकार नहीं किया।
गायक ने विस्तार से बताया कि वे जब भी कर्नाटक में प्रस्तुति देने जाते हैं, तो लगभग डेढ़ घंटे तक सिर्फ कन्नड़ गीतों को गाने की पूरी तैयारी करके मंच पर उतरते हैं। ये कन्नड़ गीत अमूमन तब प्रस्तुत किए जाते हैं जब उनका कार्यक्रम अपने चरम पर होता है। लेकिन उस दिन परिस्थितियां अलग थीं और शुरुआती क्षणों में ही अशोभनीय व्यवहार के चलते तनावपूर्ण माहौल पैदा हो गया था।
पहलगाम आतंकी हमले के संदर्भ की असली वजह
कार्यक्रम के दौरान पहलगाम घटना का उल्लेख करने के पीछे का कारण बताते हुए गायक ने कहा कि कर्नाटक के उस दंपत्ति का वीडियो उनके मन में गहराई से बैठा हुआ था। उस वीडियो में मंजूनाथ राव और उनकी पत्नी गर्व से खुद को कर्नाटक का निवासी बताते हुए कश्मीर यात्रा के अनुभव की प्रशंसा कर रहे थे। कुछ ही पलों के बाद वे आतंकी गोलीबारी का शिकार बन गए। गायक ने इस बात पर जोर दिया कि उस वीडियो ने उन्हें अंदर तक झकझोर दिया था, जहां पहचान के आधार पर निर्दोष लोगों को निशाना बनाया गया था। उनका कहना था कि उस भयावह हिंसा और नफरत की याद दिलाने के लिए ही उन्होंने उस घटना का संदर्भ दिया था।
सोनू निगम ने कन्नड़ श्रोताओं का आभार व्यक्त करते हुए यह भी कहा कि हालिया कॉन्सर्ट को पूरी तरह सफल और हाउसफुल बनाने के लिए वे आभारी हैं। उन्होंने कहा कि वे कभी नहीं चाहते कि जिन लोगों से उन्होंने हमेशा आत्मीय लगाव रखा है, उनके मन में किसी तरह की असहजता या गलतफहमी बनी रहे।
कन्नड़ समर्थक संगठन के विरोध पर स्पष्टीकरण
कन्नड़ समर्थक संगठन कर्नाटक रक्षण वेदिके को संबोधित करते हुए गायक ने उनके भाषा और संस्कृति के प्रति समर्पण का सम्मान किया। हालांकि, उन्होंने रेखांकित किया कि संगठन के सदस्य उस कॉलेज परिसर में मौजूद नहीं थे और उन्होंने वास्तविक घटनाक्रम को अपनी आंखों से नहीं देखा था। गायक के अनुसार, उस वक्त वहां बैठे अन्य सामान्य दर्शक अभद्र भाषा के प्रयोग से बेहद शर्मिंदा महसूस कर रहे थे। इसलिए उन्होंने पूरे सच को सामने रखना जरूरी समझा ताकि किसी तरह का भ्रम न रहे।
गायक ने अपने लंबे कलात्मक सफर का हवाला देते हुए कहा कि तीन दशकों से कन्नड़ संगीत और संस्कृति में उनका निरंतर योगदान रहा है। देश के विभिन्न हिस्सों में होने वाले बड़े कॉन्सर्ट्स में भी, जहां हजारों गैर-कन्नड़ दर्शक होते हैं, यदि कोई एक व्यक्ति भी कन्नड़ गाने की मांग करता है तो वे उसका सम्मान करते हुए गीत गाते हैं। ऐसे में उनकी निष्ठा पर सवाल उठाना उचित नहीं है।
आगामी कार्यक्रमों को लेकर विरोध की पृष्ठभूमि
यह पूरा विवाद अप्रैल 2025 में उस समय उत्पन्न हुआ था जब बेंगलुरु के कॉलेज शो में कन्नड़ गानों की मांग के बीच गायक की एक टिप्पणी को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं आई थीं। कर्नाटक रक्षण वेदिके समेत कई स्थानीय समूहों ने उनके बयान की कड़ी आलोचना की थी। बेंगलुरु में होने वाले उनके आगामी कार्यक्रमों से पहले यह मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया, जहां कुछ समूहों ने कार्यक्रम की अनुमति न देने की मांग करते हुए विरोध प्रदर्शन की चेतावनी दी थी। इसी पृष्ठभूमि में गायक ने सार्वजनिक तौर पर यह स्पष्टीकरण प्रस्तुत किया है।



















