ईरान के साथ जारी गंभीर सैन्य तनाव के बीच अमेरिकी रक्षा प्रणाली और उसके मिसाइल जखीरे को लेकर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। वॉशिंगटन में सत्ता के शीर्ष गलियारों से संकेत मिल रहे हैं कि हवाई सुरक्षा प्रदान करने वाले अति-महत्वपूर्ण इंटरसेप्टर मिसाइलों की उपलब्धता बेहद नाजुक स्तर पर पहुंच चुकी है। इसी घटनाक्रम के साथ-साथ प्रशासनिक स्तर पर रणनीतिक प्राथमिकताओं और सैन्य तैयारियों को लेकर उच्च अधिकारियों के बीच गंभीर मंथन चल रहा है। हालांकि प्रशासनिक स्तर पर किसी भी तरह की अंदरूनी खींचतान या हथियारों की कमी के दावों को सिरे से खारिज किया जा रहा है, लेकिन पश्चिमी एशिया में संभावित सैन्य अभियानों के बीच यह मुद्दा अमेरिकी प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती बनकर उभरा है।
मिसाइल जखीरे में गिरावट और कैंप डेविड बैठक की स्थिति
हाल ही में कैंप डेविड में आयोजित एक उच्चस्तरीय कैबिनेट बैठक के दौरान रक्षा तैयारियों की समीक्षा की गई थी। इस बैठक में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ से लंबी दूरी की मिसाइलों और इंटरसेप्टर प्रणालियों की आपूर्ति स्थिति पर प्रत्यक्ष रूप से चर्चा की। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का यह मानना था कि मिसाइल भंडार में कमी से जुड़ी समस्याओं को पहले ही सुलझा लिया गया है। जब बैठक के दौरान आपूर्ति में आई रुकावटों और भंडार के आंकड़ों पर स्पष्टीकरण मांगा गया, तब रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने इस पूरे विषय का उत्तरदायित्व अपने डिप्टी स्टीफन फीनबर्ग पर डाल दिया।
सैन्य आंकड़ों के विश्लेषण से यह स्पष्ट होता है कि अमेरिकी वायु रक्षा प्रणाली की रीढ़ माने जाने वाले THAAD बैलिस्टिक मिसाइल इंटरसेप्टर का लगभग 80 प्रतिशत स्टॉक इस्तेमाल किया जा चुका है। इसके साथ ही पैट्रियट मिसाइल इंटरसेप्टर का भी लगभग 50 प्रतिशत जखीरा पहले ही समाप्त हो चुका है। रणनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार, चालू मिसाइल भंडार अब खतरनाक रूप से निचले स्तर तक घट गया है। ईरान की ओर से संभावित मिसाइल और ड्रोन हमलों के फिर से शुरू होने की आशंकाओं को देखते हुए इंटरसेप्टरों की इस भारी कमी ने अमेरिकी सैन्य कमांड की चिंताओं को काफी बढ़ा दिया है।
व्हाइट हाउस, पेंटागन और राष्ट्रपति का आधिकारिक पक्ष
मिसाइल आपूर्ति में कमी और आंतरिक मतभेदों की खबरें सामने आते ही प्रशासनिक तंत्र तुरंत बचाव में उतर आया। व्हाइट हाउस और पेंटागन दोनों ही संस्थानों ने अंदरूनी विवाद और मिसाइलों की कमी से जुड़ी बातों को पूरी तरह से असत्य करार दिया है। व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने कहा, "यह 100 प्रतिशत फेक न्यूज है। ऐसा कुछ हुआ ही नहीं। राष्ट्रपति ट्रंप को रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ पर पूरा भरोसा है।"
इसी क्रम में पेंटागन के प्रवक्ता सीन पार्नेल ने भी अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए स्पष्ट किया कि रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने किसी को भ्रमित करने का प्रयास नहीं किया है और न ही उन्होंने अपने डिप्टी स्टीफन फीनबर्ग पर कोई आरोप मढ़ा है। प्रवक्ता ने जोर देकर कहा कि मिसाइल भंडार के खत्म होने, रक्षा मंत्रालय के भीतर असंतोष और ईरान नीति पर रक्षा मंत्री के रुख को लेकर किए जा रहे सभी दावे केवल काल्पनिक हैं।
स्वयं राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी इस पूरे विषय पर अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर एक संदेश जारी किया। डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अमेरिका के पास अत्यधिक मात्रा में हथियार और गोला-बारूद उपलब्ध हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि रक्षा आवश्यकताओं के अनुसार लगातार नई मिसाइलें और सैन्य उपकरण तैयार करके अग्रिम मोर्चों पर भेजे जा रहे हैं। राष्ट्रपति ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि देश के पास पर्याप्त सैन्य संसाधन हैं और जो लोग इसके विपरीत भ्रामक तथ्य फैला रहे हैं, उनके विरुद्ध सख्त कदम उठाए जाने चाहिए।
ईरान नीति पर अस्पष्टता और रणनीतिक लक्ष्य का प्रश्न
मिसाइल भंडार के मुद्दे के अलावा, ईरान के खिलाफ अपनाई जाने वाली अंतिम रणनीति को लेकर भी अमेरिकी प्रशासन के भीतर एकराय बनती नजर नहीं आ रही है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सलाहकारों के बीच इस बात को लेकर वैचारिक मतभेद उभरकर सामने आए हैं कि इस पूरे संघर्ष का अंतिम ध्येय क्या होना चाहिए। प्रशासन के भीतर एक वर्ग का मानना है कि प्राथमिकता केवल ईरान को परमाणु हथियार विकसित करने से रोकना होनी चाहिए, जबकि दूसरा वर्ग अंतर्राष्ट्रीय व्यापार के लिए बेहद महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा और उसे खुला रखने पर बल दे रहा है। इसके अतिरिक्त एक तीसरा धड़ा ईरान के संपूर्ण मिसाइल और ड्रोन कार्यक्रम को पूरी तरह नष्ट करने के पक्ष में है।
रणनीतिक लक्ष्यों की इस भिन्नता पर टिप्पणी करते हुए एक अमेरिकी अधिकारी ने कहा, "हमें सामरिक स्तर पर कुछ जीत मिली हैं, लेकिन साफ नीति नहीं होने की वजह से हम रणनीतिक हार की ओर बढ़ रहे हैं।" वहीं राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक निकट सहयोगी ने जानकारी दी कि राष्ट्रपति इस बात को लेकर बेहद चिंतित और असहज हैं कि ईरान के साथ किसी सहमति या समझौते तक पहुंचना उनकी शुरुआती उम्मीदों से कहीं अधिक जटिल और चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है।



















