एविएशन जगत में गति और ऊंचाई के मामले में दशकों तक बेमिसाल रहे ऐतिहासिक टोही विमान SR-71 ब्लैकबर्ड की वापसी को लेकर नई चर्चा छिड़ गई है। लगभग 27 साल पहले सेवा से हटाए जा चुके इस विमान के दोबारा आसमान में लौटने के संकेत तब मिले, जब नासा के एडमिनिस्ट्रेटर जेरेड इसाकमैन ने लॉस एंजिल्स में आयोजित ऑल-इन समिट के दौरान एक दिलचस्प प्रेजेंटेशन पेश किया। इस प्रेजेंटेशन में दिखाए गए नए एयरक्राफ्ट की बनावट, विशेष रूप से उसका कॉकपिट, पिछला टेल सेक्शन और ट्विन इंजन विन्यास, हूबहू प्रतिष्ठित SR-71 ब्लैकबर्ड से मेल खा रहा था। इसाकमैन ने वहां मौजूद लोगों के सामने यह इरादा जाहिर किया कि नासा जल्द ही पहले की तरह सबसे तेज रफ्तार और सबसे अधिक ऊंचाई पर उड़ान भरने का गौरव हासिल करेगा। उनके इस खुलासे ने दुनिया भर के एरोस्पेस विशेषज्ञों को हैरान कर दिया है कि आखिर इतने लंबे समय बाद इस पुराने विमान को फिर से एक्टिव करने की योजना क्यों बनाई जा रही है।
रिकॉर्ड्स का बादशाह: क्यों इतना खास माना जाता है यह एयरक्राफ्ट
विमानन इतिहास में लॉकहीड SR-71 ब्लैकबर्ड का स्थान बेहद अद्वितीय रहा है, जिसकी क्षमताओं की बराबरी आज तक कोई दूसरा ऑपरेशनल विमान नहीं कर पाया। इस विशेष टोही विमान ने पहली बार 22 दिसंबर 1964 को उड़ान भरी थी। इसके बाद तकनीकी परीक्षणों के दौर से गुजरते हुए जनवरी 1966 में इसे अमेरिकी वायुसेना के बेड़े में औपचारिक रूप से शामिल किया गया। अपने पूरे सेवाकाल के दौरान यह रणनीतिक जासूसी अभियानों का सबसे मजबूत आधार बना रहा।
अमेरिकी वायुसेना के आधिकारिक रिकॉर्ड बताते हैं कि करीब 24 वर्षों की सक्रिय सेवा में यह विमान दुनिया में सबसे तेज गति और सबसे अधिक ऊंचाई पर ऑपरेट करने वाला जेट बना रहा। शीत युद्ध के तनाव भरे माहौल में दुश्मन के हवाई सुरक्षा घेरे को धता बताने के लिए तैयार किए गए इस विमान ने 28 जुलाई 1976 को दो ऐसे विश्व कीर्तिमान स्थापित किए, जिन्हें आज तक कोई तोड़ नहीं सका है। उस ऐतिहासिक परीक्षण के दौरान इस प्लेन ने 2,193 मील प्रति घंटा यानी लगभग 3,529 किलोमीटर प्रति घंटे से अधिक की प्रचंड गति दर्ज की थी। इसके साथ ही यह 85,068 फीट की अभूतपूर्व ऊंचाई तक पहुंचने में कामयाब रहा था। कई दशकों तक आकाश पर राज करने के बाद इस टोही विमान ने 9 अक्टूबर 1999 को अपनी आखिरी आधिकारिक उड़ान भरी, जिसके उपरांत इसे रिटायर कर संग्रहालयों और डिस्प्ले के हवाले कर दिया गया।
डिस्प्ले से अचानक गायब हुआ टेल नंबर 844
इस पूरे मामले में रहस्य और कौतूहल उस वक्त बढ़ गया, जब सैटेलाइट से प्राप्त ताजा तस्वीरों में एक अप्रत्याशित बदलाव दर्ज किया गया। वर्ष 1999 में अपने अंतिम मिशन के समापन के बाद टेल नंबर 844 वाले ब्लैकबर्ड को एडवर्ड्स एयरफोर्स बेस के समीप स्थित नासा आर्मस्ट्रांग में एक बाहरी प्रदर्शनी के रूप में खड़ा किया गया था। वहां यह विशालकाय एयरक्राफ्ट वर्षों तक खुले आसमान के नीचे आगंतुकों और दर्शकों के लिए आकर्षण का केंद्र बना रहा।
मई के महीने में ली गई सैटेलाइट इमेजरी के अवलोकन से यह साफ उजागर हुआ कि विमान अपने निर्धारित डिस्प्ले स्टैंड से गायब है। इतने विशाल और ऐतिहासिक एयरक्राफ्ट का सार्वजनिक स्थल से अचानक हटाया जाना बिना किसी पूर्व सूचना के सामने आया, जिससे तरह-तरह के कयास लगने लगे। जानकारी के अनुसार, इस विमान को डिस्प्ले से हटाकर एक विशेष हैंगर में विस्तृत निरीक्षण और तकनीकी जांच के लिए ले जाया गया है। हालांकि, नासा प्रशासन ने विमान के इस स्थानांतरण अथवा उसकी मौजूदा स्थिति पर अभी तक कोई औपचारिक सार्वजनिक स्पष्टीकरण जारी नहीं किया है।
अनुभवी इंजीनियरों की खोज और जटिल चुनौतियां
किसी सुपरसोनिक एयरक्राफ्ट को लगभग तीन दशकों की निष्क्रियता के बाद दोबारा परिचालन योग्य बनाना तकनीकी दृष्टि से अत्यंत दुष्कर कार्य माना जाता है। विमान की जटिल प्रणालियों को समझने और उन्हें पुनः सक्रिय करने के लिए नासा ने उन सेवानिवृत्त टेस्ट इंजीनियरों से संपर्क साधना शुरू किया है, जिन्होंने कभी इस विमान के रखरखाव और संचालन में प्रत्यक्ष भूमिका निभाई थी।
इसी सिलसिले में पूर्व अमेरिकी नेवी और जोबी टेस्ट पायलट डेविड ऐश ने एयरफोर्स व नासा के पूर्व टेस्ट इंजीनियर माइक रेलजा से बातचीत की। रेलजा अब 70 वर्ष के हो चुके हैं और सेवानिवृत्त जीवन व्यतीत कर रहे हैं। नासा की इस अनोखी पहल और दोबारा जुड़ने के आमंत्रण पर उन्होंने घोर आश्चर्य व्यक्त किया। रेलजा ने संबंधित टीम को स्पष्ट तौर पर अवगत कराया कि उनकी उम्र अब ऐसे बेहद कठिन और चुनौतीपूर्ण प्रोजेक्ट पर सक्रिय रूप से काम करने की इजाजत नहीं देती। उन्होंने टीम को अपनी शुभकामनाएं देते हुए यह भी कहा कि इस विमान को दोबारा उड़ते देखना वाकई एक अद्भुत दृश्य होगा, लेकिन व्यावहारिक रूप से इसे फिर से हवा में ले जाना लगभग असंभव जान पड़ता है।
जंग, मौसम और निष्क्रिय इंजनों का संकट
माइक रेलजा ने टेल नंबर 844 को फिर से जीवित करने के मार्ग में आने वाली व्यावहारिक तकनीकी समस्याओं का विस्तार से उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि यह एयरक्राफ्ट पिछले 27 सालों से बिना किसी हलचल के जमीन पर पड़ा रहा है। खुले वातावरण में खड़े रहने के कारण दशकों तक इस पर बारिश की बूंदें गिरीं और यह रेगिस्तानी धूल व तपती धूप की मार झेलता रहा, जिससे इसके नाजुक घटकों और बाहरी ढांचे पर गंभीर असर पड़ा होगा।
इंजनों की जटिलता को समझाते हुए रेलजा ने बताया कि ब्लैकबर्ड दो मुख्य इंजनों के साथ काम करता है, जबकि नीचे एक अतिरिक्त स्पेयर इंजन लगा होता था। जब यह विमान नियमित सैन्य अभियानों में तैनात था, तब तकनीकी प्रोटोकॉल के तहत हर 90 दिनों में स्पेयर इंजन को घुमाना अनिवार्य होता था। इसके अलावा, इंजनों को हर 180 दिन के अंतराल पर चालू करके उनका विस्तृत जमीनी परीक्षण किया जाता था ताकि सभी पुर्जे कार्यशील स्थिति में रहें। इसके विपरीत, वर्तमान में ये इंजन लगभग 30 वर्षों से बिना किसी रखरखाव, स्नेहन अथवा टेस्ट साइकिल के निष्क्रिय पड़े हैं। इतने लंबे अंतराल तक उपेक्षित पड़े जटिल टर्बोजेट इंजनों को सीधे शुरू करना अत्यंत खतरनाक साबित हो सकता है।
600 मिलियन डॉलर के पार्ट्स का विनाश और सामग्री का टोटा
इस पूरे प्रोजेक्ट की राह में सबसे विकट बाधा मूल स्पेयर पार्ट्स की भारी अनुपलब्धता है। साल 2007 में अमेरिकी वायुसेना और नासा ने संयुक्त निर्णय लेते हुए ब्लैकबर्ड के लगभग 600 मिलियन डॉलर मूल्य के संचित स्पेयर पार्ट्स और उपकरणों को नष्ट कर दिया था। उस दौर में रक्षा अधिकारियों का मानना था कि भविष्य में इस रिटायर हो चुके विमान की कभी आवश्यकता नहीं पड़ेगी, लिहाजा भंडारण लागत बचाने के लिए इन्वेंट्री को नष्ट कर दिया गया। अब स्थिति यह है कि नासा को आवश्यक कलपुर्जों के लिए या तो पूरी दुनिया के पुराने डिपो में तलाश करनी होगी या फिर उन्हें भारी लागत पर शुरू से दोबारा डिजाइन करना होगा।
इसके अतिरिक्त, ब्लैकबर्ड को प्रज्वलित करने और उड़ाने के लिए आवश्यक विशेष उपभोग्य वस्तुएं भी सामान्य रूप से उपलब्ध नहीं हैं। इस विमान के इंजनों को स्टार्ट करने के लिए ट्राईइथाइलबोरेन नामक एक विशेष रासायनिक यौगिक की दरकार होती है, जिसके बिना दहन प्रक्रिया प्रारंभ नहीं हो सकती। इसके संचालन के लिए अत्यधिक तापमान सहन करने वाला खास इंजन ऑयल और विशिष्ट हाइड्रोलिक तरल चाहिए, जिनका उत्पादन वर्तमान समय में बंद हो चुका है। रेलजा ने यह महत्वपूर्ण प्रश्न भी उठाया कि विमान के भारी इंजनों को बाहर निकालने के लिए जो समर्पित इंजन कार्ट्स और इजेक्शन सीट को सुरक्षित तरीके से हटाने वाले ग्राउंड इक्विपमेंट इस्तेमाल होते थे, वे सभी उपकरण वर्षों पहले नष्ट अथवा विस्थापित किए जा चुके हैं। इन जरूरी उपकरणों के बिना विमान पर बुनियादी काम करना भी एक बड़ा तकनीकी संकट बना हुआ है।



















