कैरोलिन लैविट के हाल ही में व्हाइट हाउस प्रेस सेक्रेटरी के पद से सम्मानपूर्वक हटने की चर्चाओं के बीच, अमेरिकी राजनीति के इतिहास का एक पुराना और चर्चित विवाद फिर से सामने आ गया है। 1990 के दशक में हुए इस घटनाक्रम में एक महिला कर्मचारी को व्हाइट हाउस से बेइज्जत होकर निकलना पड़ा था। उस समय राष्ट्रपति और एक युवा इंटर्न के बीच का संबंध पूरी दुनिया की मीडिया और राजनीति में हलचल मचाने का कारण बना था।
व्हाइट हाउस में शुरुआत और अफेयर का घटनाक्रम
घटनाओं का यह सिलसिला जुलाई 1995 में शुरू हुआ था, जब 22 साल की मोनिका लेविंस्की ने व्हाइट हाउस में एक बिना वेतन वाली यानी अनपेड इंटर्न के रूप में काम करना शुरू किया था। एक सामान्य युवा पेशेवर की तरह वह अपने करियर की शुरुआत करने आई थीं, लेकिन वहां के माहौल ने उनकी पूरी जिंदगी को एक अलग दिशा में मोड़ दिया।
व्हाइट हाउस में आने के कुछ ही महीनों बाद, यानी नवंबर 1995 में मोनिका लेविंस्की और उस समय के अमेरिकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन के बीच निजी संबंध शुरू हो गए। उस समय बिल क्लिंटन की उम्र 49 साल थी और वह दुनिया के सबसे शक्तिशाली देश के राष्ट्रपति थे, जबकि लेविंस्की महज 22 साल की एक युवा कर्मचारी थीं। व्हाइट हाउस के गलियारों में राष्ट्रपति और इंटर्न के बीच की नजदीकियों को लेकर धीरे-धीरे अफवाहें फैलने लगीं।
सुरक्षा संबंधी चिंताओं और विवादों से बचने के लिए प्रशासन ने अप्रैल 1996 में लेविंस्की का तबादला रक्षा मंत्रालय यानी पेंटागन में कर दिया। हालांकि पेंटागन में नई जिम्मेदारी मिलने और जगह बदलने के बावजूद दोनों के बीच बातचीत और संपर्क का दौर जारी रहा।
लिंडा ट्रिप का धोखा और टेप रिकॉर्डिंग स्कैंडल
पेंटागन में काम के दौरान लेविंस्की की मुलाकात लिंडा ट्रिप नाम की एक महिला कर्मचारी से हुई। लेविंस्की ने लिंडा ट्रिप को अपना सच्चा दोस्त और राजदार मान लिया और बिल क्लिंटन के साथ अपने संबंधों तथा बातचीत की हर बात उनसे साझा कर दी। लेकिन लिंडा ट्रिप ने इस भरोसे को तोड़ते हुए लेविंस्की के साथ हुई फोन पर बातचीत को गुप्त रूप से रिकॉर्ड करना शुरू कर दिया।
जनवरी 1998 में लिंडा ट्रिप ने ये गुप्त ऑडियो टेप्स जांच अधिकारियों को सौंप दिए। जैसे ही इंटरनेट और समाचार माध्यमों पर यह खबर सामने आई, पूरे अमेरिका और अंतरराष्ट्रीय मीडिया में भूचाल आ गया। वाशिंगटन के प्रशासनिक गलियारों से लेकर आम जनता के बीच केवल इसी अफेयर की चर्चा होने लगी।
डीएनए सबूत, इनकार से स्वीकारोक्ति और महाभियोग
शुरुआत में राष्ट्रपति बिल क्लिंटन ने टेलीविजन कैमरों के सामने आकर लेविंस्की के साथ किसी भी तरह के संबंध से साफ इनकार कर दिया। लेकिन जांच के दौरान लेविंस्की का एक नीले रंग का परिधान यानी ब्लू ड्रेस सामने आया, जिस पर वैज्ञानिक जांच में क्लिंटन का DNA पाया गया। इस ठोस वैज्ञानिक प्रमाण के सामने आने के बाद क्लिंटन को TV पर आकर स्वीकार करना पड़ा कि उन्होंने जनता से झूठ बोला था।
झूठी गवाही देने के आरोपों के चलते बिल क्लिंटन पर महाभियोग की कार्रवाई चलाई गई। हालांकि वह अपनी राष्ट्रपति की कुर्सी बचाने में कामयाब रहे, लेकिन इस पूरे घटनाक्रम में सबसे बड़ा व्यक्तिगत नुकसान लेविंस्की को उठाना पड़ा। उन्हें भारी अपमान के साथ व्हाइट हाउस छोड़ना पड़ा और वह रातों-रात वैश्विक स्तर पर ट्रोलिंग और सार्वजनिक निंदा का शिकार बन गईं।
सार्वजनिक अपमान से निकलकर एक्टिविज्म तक की यात्रा
व्हाइट हाउस से निकलने के बाद लेविंस्की को लंबे समय तक गंभीर कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। नाम के साथ जुड़े विवाद के कारण उन्हें सालों तक कहीं नौकरी नहीं मिली और वह गहरे तनाव तथा डिप्रेशन से गुजरीं। बाद में इस माहौल से बाहर निकलने के लिए वह अपनी आगे की पढ़ाई पूरी करने ब्रिटेन चली गईं।
इस ऐतिहासिक घटनाक्रम के वर्षों बाद, मोनिका लेविंस्की ने खुद को एक नई पहचान दी है। आज वह एक सक्रिय एंटी-साइबरबुलिंग एक्टिविस्ट के रूप में काम कर रही हैं और दुनिया भर में ऑनलाइन उत्पीड़न, ट्रोलिंग तथा डिजिटल शेमिंग के खिलाफ आवाज उठा रही हैं।



















